Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > ब्राह्मण गोत्रावली: Gotravali of Brahmins
Displaying 223 of 11186         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
ब्राह्मण गोत्रावली: Gotravali of Brahmins
Pages from the book
ब्राह्मण गोत्रावली: Gotravali of Brahmins
Look Inside the Book
Description

प्रस्तावना

हमारे देश के पढे-लिखे ब्राह्मण युवकों को भी अपने गोत्र, वेद, उपवेद, शाखा-सूत्र आदि की पूरी जानकारी नहीं है

कुछ अति प्रगतिशील ब्राह्मण युवक तो नहीं, किन्तु अधिकाश ब्राह्मण युवकों में यह जिज्ञासा है कि गोत्र, प्रवर, शाखा, सूत्र क्या हैं' इसकी परम्परा क्यों और कैसे पड़ी? हमारे पूर्वज पहले कहां रहते थे? या हम किस स्थान के मूलवासी है? इत्यादि बातें जानने की कभी-कभी इच्छा उत्पन्न हो जाती है उन जिज्ञासु ब्राह्मण युवकों की जिज्ञासा को तृप्त करने के लिए डी०पी०बी० पब्लिकेशन्स के प्रकाशक श्री अमित अग्रवालजी ने, ''ब्राह्मण गोत्रावली'' नाम से एक छोटी पुस्तक सरल एव बोधगम्य भाषा में लिखने के लिए निवेदन किया ।

पुराणकर्ताओं ने भारतवर्षीय ब्राह्मणों को विध्योत्तरवासी और विंध्व दक्षिणवासी कहकर दो भागों में विभाजित कर दिया और उनका नाम गौड़ तथा द्रविड़ रखा विंध्योत्तरवासी गौड़ और विंध्य दक्षिणवासी द्रविण विभिन्न क्षेत्र विशेष में रहने के कारण दोनों के 5-5 भाग हो गये, जैसे-गौड़ ब्राह्मणों में-सरस्वती नदी के आसपास रहने वाले ब्राह्मण सारस्वत:, कन्नौज के आसपास के क्षेत्र में रहने वालों को कान्यकुब्ज, मिथिला में रहने वालों को मैथिल, अयोध्या के उत्तर सरयू नदी से पार रहने वाले सरयू पारीण, उड़ीसा में रहने वाले उत्कल तथा शेष भाग में रहने वाले गौड़ कहलाये इसी प्रकार द्रविण ब्राह्मणों को क्षेत्रीय आधार पर 5 भागों में विभक्त किया गया है, जैसे-कर्नाटक में रहने वाले कर्नाटक ब्राह्मण, आंध्रा में रहने वाले 'तैलग ब्राह्मण महाराष्ट्र में मराठी, गुजरात में रहने वाले गुर्जर ब्राह्मण तथा शेष भाग में रहने वाले द्रविण कहलाते हैं

इस लघु पुस्तिका में केवल विध्योत्तर वासी ब्राह्मणों, जैसे-गौड, सारस्वत, मैथिल, कान्यकुब्ज, सरयूपारीण तथा उत्कल ब्राह्मणों के गोत्र, प्रवर, शाखा, सूत्र, शिखा, छन्द, उपवेद, आस्पद (उपाधियां) तथा मूल गावों का संक्षेप में वर्णन किया गया है।

आशा है, जिज्ञासु ब्राह्मण युवकों की जिज्ञासा कुछ हद तक शान्त होगी, किन्तु ब्राह्मणों का ऋषि गोत्र एक सागर के समान है। उसमें से कुछ मोती ही चुनकर इस पुस्तक में रखने का प्रयास किया गया हैं।

कृपालु पाठकों से निवेदन है कि यदि किसी कुल के गोत्र प्रवर आदि के निर्णय में विसगतियां दिखायी दें, जो उनकी परम्पराओं के विरुद्ध हों, तो कृपया हमें सूचित करें, जिससे अगले सस्करण में सुधार किया जा सकें।

 

अनुक्रम

1

ॐ मगल मूर्त्तेये नम :

7

2

ब्राह्मण कर्म से होता है या जन्म से

7

3

ब्राह्मण और उनके भेद

11

4

गौड़ ब्राह्मणों के क्षेत्र

13

5

आदि-गौड़ की शाखाएं

14

6

गौड़ ब्राह्मणों के गोत्र-उपगोत्र

15

7

ऋषि गोत्रीय गांव

18

8

सारस्वत ब्राह्मण

31

 

सारस्वत कुलों की उपाधि आदि का वर्णन

32

9

सारस्वत ब्राह्मणों के भेद

35

10

सनाढ्य ब्राह्मणों की उत्पत्ति

40

11

मैथिल ब्राह्मणोत्पत्ति

45

12

मैथिल ब्राह्मणों का व्रज में आगमन

50

13

कान्यकुब्ज ब्राह्मणोत्पत्ति

79

14

सरयू पारीण ब्राह्मणोत्पत्ति

99

 

सरयू पारीण ब्राह्मणों के भेद

99

 

विभिन्न उपाधियों से सम्बोधित होने वाले गांव

100

 

सरयू पारीण ब्राह्मणों के गोत्र प्रवरादि

101

 

सरयू पारीण ब्राह्मणों की कुछ विशेषताएं

109

15

शकद्वीपीय ब्राह्मण या शाकलद्वीपीय ब्राह्मण

111

16

जांगिड़ और पंचाल ब्राह्मण

112

Sample Page
















ब्राह्मण गोत्रावली: Gotravali of Brahmins

Item Code:
NZD230
Cover:
Paperback
Edition:
2015
Publisher:
Language:
Hindi
Size:
9.5 inch X 7.0 inch
Pages:
146
Other Details:
Weight of the Book: 250 gms
Price:
$18.00   Shipping Free
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
ब्राह्मण गोत्रावली: Gotravali of Brahmins

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 81214 times since 13th May, 2017

प्रस्तावना

हमारे देश के पढे-लिखे ब्राह्मण युवकों को भी अपने गोत्र, वेद, उपवेद, शाखा-सूत्र आदि की पूरी जानकारी नहीं है

कुछ अति प्रगतिशील ब्राह्मण युवक तो नहीं, किन्तु अधिकाश ब्राह्मण युवकों में यह जिज्ञासा है कि गोत्र, प्रवर, शाखा, सूत्र क्या हैं' इसकी परम्परा क्यों और कैसे पड़ी? हमारे पूर्वज पहले कहां रहते थे? या हम किस स्थान के मूलवासी है? इत्यादि बातें जानने की कभी-कभी इच्छा उत्पन्न हो जाती है उन जिज्ञासु ब्राह्मण युवकों की जिज्ञासा को तृप्त करने के लिए डी०पी०बी० पब्लिकेशन्स के प्रकाशक श्री अमित अग्रवालजी ने, ''ब्राह्मण गोत्रावली'' नाम से एक छोटी पुस्तक सरल एव बोधगम्य भाषा में लिखने के लिए निवेदन किया ।

पुराणकर्ताओं ने भारतवर्षीय ब्राह्मणों को विध्योत्तरवासी और विंध्व दक्षिणवासी कहकर दो भागों में विभाजित कर दिया और उनका नाम गौड़ तथा द्रविड़ रखा विंध्योत्तरवासी गौड़ और विंध्य दक्षिणवासी द्रविण विभिन्न क्षेत्र विशेष में रहने के कारण दोनों के 5-5 भाग हो गये, जैसे-गौड़ ब्राह्मणों में-सरस्वती नदी के आसपास रहने वाले ब्राह्मण सारस्वत:, कन्नौज के आसपास के क्षेत्र में रहने वालों को कान्यकुब्ज, मिथिला में रहने वालों को मैथिल, अयोध्या के उत्तर सरयू नदी से पार रहने वाले सरयू पारीण, उड़ीसा में रहने वाले उत्कल तथा शेष भाग में रहने वाले गौड़ कहलाये इसी प्रकार द्रविण ब्राह्मणों को क्षेत्रीय आधार पर 5 भागों में विभक्त किया गया है, जैसे-कर्नाटक में रहने वाले कर्नाटक ब्राह्मण, आंध्रा में रहने वाले 'तैलग ब्राह्मण महाराष्ट्र में मराठी, गुजरात में रहने वाले गुर्जर ब्राह्मण तथा शेष भाग में रहने वाले द्रविण कहलाते हैं

इस लघु पुस्तिका में केवल विध्योत्तर वासी ब्राह्मणों, जैसे-गौड, सारस्वत, मैथिल, कान्यकुब्ज, सरयूपारीण तथा उत्कल ब्राह्मणों के गोत्र, प्रवर, शाखा, सूत्र, शिखा, छन्द, उपवेद, आस्पद (उपाधियां) तथा मूल गावों का संक्षेप में वर्णन किया गया है।

आशा है, जिज्ञासु ब्राह्मण युवकों की जिज्ञासा कुछ हद तक शान्त होगी, किन्तु ब्राह्मणों का ऋषि गोत्र एक सागर के समान है। उसमें से कुछ मोती ही चुनकर इस पुस्तक में रखने का प्रयास किया गया हैं।

कृपालु पाठकों से निवेदन है कि यदि किसी कुल के गोत्र प्रवर आदि के निर्णय में विसगतियां दिखायी दें, जो उनकी परम्पराओं के विरुद्ध हों, तो कृपया हमें सूचित करें, जिससे अगले सस्करण में सुधार किया जा सकें।

 

अनुक्रम

1

ॐ मगल मूर्त्तेये नम :

7

2

ब्राह्मण कर्म से होता है या जन्म से

7

3

ब्राह्मण और उनके भेद

11

4

गौड़ ब्राह्मणों के क्षेत्र

13

5

आदि-गौड़ की शाखाएं

14

6

गौड़ ब्राह्मणों के गोत्र-उपगोत्र

15

7

ऋषि गोत्रीय गांव

18

8

सारस्वत ब्राह्मण

31

 

सारस्वत कुलों की उपाधि आदि का वर्णन

32

9

सारस्वत ब्राह्मणों के भेद

35

10

सनाढ्य ब्राह्मणों की उत्पत्ति

40

11

मैथिल ब्राह्मणोत्पत्ति

45

12

मैथिल ब्राह्मणों का व्रज में आगमन

50

13

कान्यकुब्ज ब्राह्मणोत्पत्ति

79

14

सरयू पारीण ब्राह्मणोत्पत्ति

99

 

सरयू पारीण ब्राह्मणों के भेद

99

 

विभिन्न उपाधियों से सम्बोधित होने वाले गांव

100

 

सरयू पारीण ब्राह्मणों के गोत्र प्रवरादि

101

 

सरयू पारीण ब्राह्मणों की कुछ विशेषताएं

109

15

शकद्वीपीय ब्राह्मण या शाकलद्वीपीय ब्राह्मण

111

16

जांगिड़ और पंचाल ब्राह्मण

112

Sample Page
















Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

Testimonials

Nice website..has a collection of rare books.
Srikanth
Beautiful products nicely presented and easy to use website
Amanda, UK.
I received my order, very very beautiful products. I hope to buy something more. Thank you!
Gulnora, Uzbekistan
Thank you very much for the courtesy you showed me for the time I buy my books. The last book is a good book. İt is important in terms of recognizing fine art of İndia.
Suzan, Turkey
Thank You very much Sir. I really like the saree and the blouse fit perfeact. Thank You again.
Sulbha, USA
I have received the parcel yesterday and the shiv-linga idol is sooo beautiful and u have exceeded my expectations...
Guruprasad, Bangalore
Yesterday I received my lost and through you again found order. Very quickly I must say !. Thank you and thank you again for your service. I am very happy with this double CD of Ustad Shujaat Husain Khan. I thought it was lost forever and now I can add it to my CD collection. I hope in the near future to buy again at your online shop. You have wonderful items to offer !
Joke van der Baars, the Netherlands
I recently ordered a hand embroidered stole. It was expensive and I was slightly worried about ordering it on line. It has arrived and is magnificent. I couldn't be happier, I will treasure this stole for ever. Thank you.
Jackie
Today Lord SIVA arrived well in Munich. Thank you for the save packing. Everything fine. Hari Om
Hermann, Munchen
Thank you very much for keeping such an exotic collection of Books. Keep going strong Exotic India!!!
Shweta, Germany
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India