Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Yoga > Meditation > ध्यान विज्ञान (ध्यान में प्रवेश की 115 सहज विधियां): Science of Meditation
Subscribe to our newsletter and discounts
ध्यान विज्ञान (ध्यान में प्रवेश की 115 सहज विधियां): Science of Meditation
ध्यान विज्ञान (ध्यान में प्रवेश की 115 सहज विधियां): Science of Meditation
Description

पुस्तक के विषय में

 

जो लोग शरीर के तल पर ज्यादा संवेदनशील हैं, उनके लिए ऐसी विधियां हैं जो शरीर के माध्यम से ही आत्यंतिक अनुभव पर पहुंचा सकती हैं। जो भाव प्रवण हैं, भावुक प्रकृति के हैं, वे भक्ति प्रार्थना के मार्ग पर चल सकते हैं। जो बुद्धि प्रवण हैं, बुद्धिजीवी हैं, उनके लिए ध्यान, सजगता, साक्षीभाव उपयोगी हो सकते हैं।

लेकिन मेरी ध्यान की विधियां एक प्रकार से अलग हट कर हैं। मैंने ऐसी ध्यान विधियों की संरचना की है जो तीनों प्रकार के लोगों द्वारा उपयोग में लाई जा सकती हैं। उनमें शरीर का भी पूरा उपयोग है, भाव का भी पूरा उपयोग है और होश का भी पूरा उपयोग है। तीनों का एक साथ उपयोग है और वे अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग ढंग से काम करती हैं। शरीर, हृदय, मन मेरी सभी ध्यान विधियां इसी श्रृंखला में काम करती हैं। वे शरीर पर शुरू होती हैं, वे हृदय से गुजरती हैं, वे मन पर पहुंचती हैं और फिर वे मनातीत में अतिक्रमण कर जाती हैं।

ध्यान न तो ज्ञान है, क्योंकि कोई ग्रंथ पढ़ने से ध्यान नहीं उपलब्ध होता। और न ध्यान भक्ति है, क्योंकि गिड़गिड़ाने से और प्रार्थना करने से, नाचने से कूदने से और संगीत में अपने को भुलाने से कोई ध्यान उपलब्ध नहीं होता। और न ही ध्यान मात्र कर्म है कि कोई कर्मठ हो, सेवा करे या कुछ करे, तो ध्यान उपलब्ध हो जाता है। ध्यान तो एक अलग बिंदु है, वह तो जीवन में साक्षीभाव को स्थापित करने से उपलब्ध होता है।

अगर कोई अपने कर्म के जीवन में साक्षीभाव को उपलब्ध हो जाए, जो भी करे, उसका साक्षी भी हो, तो कर्म ही धर्म का अंग हो जाएंगे। तब सेवा धर्म हो जाएगी। तब जो किया जा रहा है वह धर्म हो जाएगा। बोधपूर्वक करने में ही कर्म ध्यान का हिस्सा हो जाता है। प्रेम हम करते हैं। प्रेम अगर बोधपूर्वक न हो, तो वासना बन जाता है और मोह बन जाता है। प्रेम यदि बोधपूर्वक हो, तो प्रेम से बड़ी मुक्ति इस जगत में दूसरी नहीं है, प्रेम भक्ति हो जाता है। और भक्ति के लिए मंदिर जाने की जरूरत नहीं हैं। भक्ति के लिए प्रेम का ध्यानयुक्त होना जरूरी है। अगर आप अपने बच्चे को, अपनी पत्नी को, अपनी मां को, अपने मित्र को, किसी को भी प्रेम करते हैं, अगर वही प्रेम ध्यान से संयुक्त हो जाए, अगर उसी प्रेम के आप साक्षी हो जाएं, तो वही प्रेम भक्ति हो जाएगा। प्रेम जब बोधपूर्वक हो, तो भक्ति हो जाता है। प्रेम जब अबोधपूर्वक हो, तो मोह हो जाता है।

ज्ञान जब बोधपूर्वक हो, तो मुक्त करने लगता है। और ज्ञान जब अंधा हो, मूर्च्छित हो, तो बांधने लगता है। वैसे ही अगर कोई विचारों को इकट्ठा करता रहे, शास्त्र पढ़ता रहे, व्याख्याएं पढ़ता रहे, विश्लेषण करता रहे, तर्क करता रहे और सोचे कि ज्ञान उपलब्ध हो गया, तो गलती में है। वैसे ज्ञान नहीं उपलब्ध होता, केवल ज्ञान का बोझ बढ़ जाता है। वैसे मस्तिष्क में कोई चैतन्य का संचार नहीं होता, केवल उधार विचार संगृहीत हो जाते हैं। लेकिन अगर ज्ञान के बिंदु पर ध्यान का संयोग हो साक्षी का संयोग हो, तो फिर विचार तो नहीं इकट्ठे होते, बल्कि विचार शक्ति जाग्रत होना शुरू हो जाती है। तब फिर बाहर से तो शास्त्र नहीं पढ़ने होते, भीतर से सत्य का उदघाटन शुरू हो जाता है।

मेरी दृष्टि में, ध्यान एकमात्र योग है। न तो कर्म कोई योग है, न भक्ति कोई योग है और न ज्ञान कोई योग है। ध्यान योग है। और आपकी प्रकृति कुछ भी हो, ध्यान के अतिरिक्त और कोई मार्ग नहीं है।

अनुक्रम

ध्यान की भूमिका

9

ध्यान : जीवन का सबसे बड़ा आनंद

11

ध्यान की जगह

13

ध्यान की विधि कैसे चुनें

15

सुबह के समय करने वाली ध्यान विधियां

1

सूर्योदय की प्रतीक्षा

20

2

उगते सूरज की प्रशंसा मे

20

3

सक्रिय ध्यान

21

4

मंडल ध्यान

22

5

तकिया पीटना

23

6

कुते की तरह हांफना

23

7

नटराज ध्यान

24

8

इस क्षण मे जीना

25

9

स्टॉप! ध्यान

25

10

कार्य-ध्यान की तरह

26

11

सृजन मे डूब जाएं

27

12

गैर-यांत्रिक होना ही रहस्य है

28

13

साधारण चाय का आनंद

28

14

शांत प्रतीक्षा

29

15

कभी, अचानक ऐसे हो जाएं जैसे नहीं है

30

16

'मैं यह नहीं हूं'

30

17

अपने विचार लिखना

31

18

विनोदी चेहरे

31

19

पृथ्वी से संपर्क

32

20

श्वास को शिथिल करो

32

21

'इस व्यक्ति को शांति मिले'

33

22

तनाव विधि

33

23

विपरीत पर विचार

34

24

अद्वैत'

34

25

'हां' का अनुसरण

35

26

वृक्ष से मैत्री

36

27

'क्या तुम यहां हो,

37

28

निष्क्रिय ध्यान

37

29

आंधी के बाद की निस्तब्धता

38

30

निश्चल ध्यानयोग

39

दिन के समय करने वाली ध्यान विधियां

31

स्वप्न में सचेतन प्रवेश

44

32

यौन-मुद्रा काम-ऊर्जा के ऊर्ध्वगमन की एक सरल विधि

51

33

मूलबंध ब्रह्मचर्य-उपलब्धि की सरलतम विधि

55

34

कल्पना-भोग

58

35

मैत्री : प्रभु-मंदिर का द्वार

60

36

शांति-सूत्र नियति की स्वीकृति

63

37

मौन और एकांत का इक्कीस दिवसीय प्रयोग

66

38

प्राण-साधना

71

39

मंत्र-साधना

74

40

अंतर्वाणी साधना

79

41

संयम साधना-1

81

42

संयम साधना-2

84

43

संतुलन ध्यान-1

85

44

संतुलन ध्यान-2

86

45

श्रेष्ठतम क्षण का ध्यान

86

46

'मैं-तू' ध्यान

89

47

इंद्रियों को थका डालें

89

अपराह्य में करनें वाली ध्यान विधियां

48

श्वास : सबसे गहरा मंत्र

94

49

भीतरी आकाश का अंतरिक्ष-यात्री

94

50

आकाश सा विराट एवं अणु सा छोटा

95

51

'एक' का अनुभव

96

52

आंतरिक मुस्कान

97

53

ओशो'

97

54

देखना ही ध्यान है

98

55

शब्दों के बिना देखना

99

56

मौन का रंग

99

57

सिरदर्द को देखना

100

58

ऊर्जा का स्तंभ

101

59

गर्भ की शांति

102

संध्या के समय करने वाली ध्यान विधियां

60

कुंडलिनी ध्यान

106

61

झूमना

107

62

सामूहिक नृत्य

107

63

वृक्ष के समान नृत्य

108

64

हाथों से नृत्य

108

65

सूक्ष्म पर्तो को जगाना

109

66

गीत गाओ

110

67

हा गुंजन

110

68

नादब्रह्म ध्यान

111

69

स्त्री-पुरुष जोड़ों के लिए नादब्रह्म

112

70

कीर्तन

113

71

सामूहिक प्रार्थना

114

72

मुर्दे की भांति हो जाएं

115

73

अग्निशिखा

116

रात के समय करले वाली ध्यान विधियां

74

प्रकाश पर ध्यान

120

75

बुद्धत्व का अवलोकन

120

76

तारे का भीतर प्रवेश

121

77

चंद्र ध्यान

122

78

ब्रह्मांड के भाव मे सोने जाएं

122

79

सब काल्पनिक है

123

80

ध्यान के भीतर ध्यान

123

81

पशु हो जाएं

124

82

नकारात्मक हो जाएं

125

83

'हां, हां, हां'

126

84

एक छोटा, तीव्र कपन

126

85

अपने सुरक्षा-कवच उतार दो

127

86

जीवन और मृत्यु ध्यान

127

87

बच्चे की दूध की बोतल

128

88

भय में प्रवेश

128

89

अपनी शून्यता में प्रवेश

129

90

गर्भ में वापस लौटना

129

91

आवाजें निकालना

130

92

प्रार्थना ध्यान

131

93

लातिहान ध्यान

132

94

गौरीशंकर ध्यान

133

95

देववाणी ध्यान

134

96

प्रेम

135

97

झूठे प्रेम खो जाएंगे

136

98

प्रेम को फैलाएं

137

99

प्रेमी- युगल एक-दूसरे में घुलें-मिलें

138

100

प्रेम के प्रति समर्पण

139

101

प्रेम-कृत्य को अपने आप होने दो

139

102

कृत्यों में साक्षीभाव

140

103

बहना- मिटना-तथाता ध्यान

141

104

अंधकार, अकेले होने, और मिटने का बोध

147

105

स्वेच्छा से मृत्यु में प्रवेश

153

106

सजग मृत्यु और शरीर से अलग होने की विधि

156

107

मृतवत हो जाना

157

108

जाति-स्मरण के प्रयोग

161

109

अंतर्प्रकाश साधना

167

110

शिवनेत्र

170

111

त्राटक - एकटक देखने की विधि

171

112

त्राटक ध्यान -1

172

113

त्राटक ध्यान -2

173

114

त्राटक ध्यान -3

175

115

रात्रि- ध्यान

177

परिशिष्ट

ओशो-सक परिचय

179

ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट

183

ओशो का हिंदी साहित्य

185

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ध्यान विज्ञान (ध्यान में प्रवेश की 115 सहज विधियां): Science of Meditation

Item Code:
NZA654
Cover:
Hardcover
Edition:
2013
ISBN:
9788172611699
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 7.0 inch
Pages:
192 (6 B/W illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 460 gms
Price:
$31.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
ध्यान विज्ञान (ध्यान में प्रवेश की 115 सहज विधियां): Science of Meditation

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 11963 times since 11th Jun, 2019

पुस्तक के विषय में

 

जो लोग शरीर के तल पर ज्यादा संवेदनशील हैं, उनके लिए ऐसी विधियां हैं जो शरीर के माध्यम से ही आत्यंतिक अनुभव पर पहुंचा सकती हैं। जो भाव प्रवण हैं, भावुक प्रकृति के हैं, वे भक्ति प्रार्थना के मार्ग पर चल सकते हैं। जो बुद्धि प्रवण हैं, बुद्धिजीवी हैं, उनके लिए ध्यान, सजगता, साक्षीभाव उपयोगी हो सकते हैं।

लेकिन मेरी ध्यान की विधियां एक प्रकार से अलग हट कर हैं। मैंने ऐसी ध्यान विधियों की संरचना की है जो तीनों प्रकार के लोगों द्वारा उपयोग में लाई जा सकती हैं। उनमें शरीर का भी पूरा उपयोग है, भाव का भी पूरा उपयोग है और होश का भी पूरा उपयोग है। तीनों का एक साथ उपयोग है और वे अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग ढंग से काम करती हैं। शरीर, हृदय, मन मेरी सभी ध्यान विधियां इसी श्रृंखला में काम करती हैं। वे शरीर पर शुरू होती हैं, वे हृदय से गुजरती हैं, वे मन पर पहुंचती हैं और फिर वे मनातीत में अतिक्रमण कर जाती हैं।

ध्यान न तो ज्ञान है, क्योंकि कोई ग्रंथ पढ़ने से ध्यान नहीं उपलब्ध होता। और न ध्यान भक्ति है, क्योंकि गिड़गिड़ाने से और प्रार्थना करने से, नाचने से कूदने से और संगीत में अपने को भुलाने से कोई ध्यान उपलब्ध नहीं होता। और न ही ध्यान मात्र कर्म है कि कोई कर्मठ हो, सेवा करे या कुछ करे, तो ध्यान उपलब्ध हो जाता है। ध्यान तो एक अलग बिंदु है, वह तो जीवन में साक्षीभाव को स्थापित करने से उपलब्ध होता है।

अगर कोई अपने कर्म के जीवन में साक्षीभाव को उपलब्ध हो जाए, जो भी करे, उसका साक्षी भी हो, तो कर्म ही धर्म का अंग हो जाएंगे। तब सेवा धर्म हो जाएगी। तब जो किया जा रहा है वह धर्म हो जाएगा। बोधपूर्वक करने में ही कर्म ध्यान का हिस्सा हो जाता है। प्रेम हम करते हैं। प्रेम अगर बोधपूर्वक न हो, तो वासना बन जाता है और मोह बन जाता है। प्रेम यदि बोधपूर्वक हो, तो प्रेम से बड़ी मुक्ति इस जगत में दूसरी नहीं है, प्रेम भक्ति हो जाता है। और भक्ति के लिए मंदिर जाने की जरूरत नहीं हैं। भक्ति के लिए प्रेम का ध्यानयुक्त होना जरूरी है। अगर आप अपने बच्चे को, अपनी पत्नी को, अपनी मां को, अपने मित्र को, किसी को भी प्रेम करते हैं, अगर वही प्रेम ध्यान से संयुक्त हो जाए, अगर उसी प्रेम के आप साक्षी हो जाएं, तो वही प्रेम भक्ति हो जाएगा। प्रेम जब बोधपूर्वक हो, तो भक्ति हो जाता है। प्रेम जब अबोधपूर्वक हो, तो मोह हो जाता है।

ज्ञान जब बोधपूर्वक हो, तो मुक्त करने लगता है। और ज्ञान जब अंधा हो, मूर्च्छित हो, तो बांधने लगता है। वैसे ही अगर कोई विचारों को इकट्ठा करता रहे, शास्त्र पढ़ता रहे, व्याख्याएं पढ़ता रहे, विश्लेषण करता रहे, तर्क करता रहे और सोचे कि ज्ञान उपलब्ध हो गया, तो गलती में है। वैसे ज्ञान नहीं उपलब्ध होता, केवल ज्ञान का बोझ बढ़ जाता है। वैसे मस्तिष्क में कोई चैतन्य का संचार नहीं होता, केवल उधार विचार संगृहीत हो जाते हैं। लेकिन अगर ज्ञान के बिंदु पर ध्यान का संयोग हो साक्षी का संयोग हो, तो फिर विचार तो नहीं इकट्ठे होते, बल्कि विचार शक्ति जाग्रत होना शुरू हो जाती है। तब फिर बाहर से तो शास्त्र नहीं पढ़ने होते, भीतर से सत्य का उदघाटन शुरू हो जाता है।

मेरी दृष्टि में, ध्यान एकमात्र योग है। न तो कर्म कोई योग है, न भक्ति कोई योग है और न ज्ञान कोई योग है। ध्यान योग है। और आपकी प्रकृति कुछ भी हो, ध्यान के अतिरिक्त और कोई मार्ग नहीं है।

अनुक्रम

ध्यान की भूमिका

9

ध्यान : जीवन का सबसे बड़ा आनंद

11

ध्यान की जगह

13

ध्यान की विधि कैसे चुनें

15

सुबह के समय करने वाली ध्यान विधियां

1

सूर्योदय की प्रतीक्षा

20

2

उगते सूरज की प्रशंसा मे

20

3

सक्रिय ध्यान

21

4

मंडल ध्यान

22

5

तकिया पीटना

23

6

कुते की तरह हांफना

23

7

नटराज ध्यान

24

8

इस क्षण मे जीना

25

9

स्टॉप! ध्यान

25

10

कार्य-ध्यान की तरह

26

11

सृजन मे डूब जाएं

27

12

गैर-यांत्रिक होना ही रहस्य है

28

13

साधारण चाय का आनंद

28

14

शांत प्रतीक्षा

29

15

कभी, अचानक ऐसे हो जाएं जैसे नहीं है

30

16

'मैं यह नहीं हूं'

30

17

अपने विचार लिखना

31

18

विनोदी चेहरे

31

19

पृथ्वी से संपर्क

32

20

श्वास को शिथिल करो

32

21

'इस व्यक्ति को शांति मिले'

33

22

तनाव विधि

33

23

विपरीत पर विचार

34

24

अद्वैत'

34

25

'हां' का अनुसरण

35

26

वृक्ष से मैत्री

36

27

'क्या तुम यहां हो,

37

28

निष्क्रिय ध्यान

37

29

आंधी के बाद की निस्तब्धता

38

30

निश्चल ध्यानयोग

39

दिन के समय करने वाली ध्यान विधियां

31

स्वप्न में सचेतन प्रवेश

44

32

यौन-मुद्रा काम-ऊर्जा के ऊर्ध्वगमन की एक सरल विधि

51

33

मूलबंध ब्रह्मचर्य-उपलब्धि की सरलतम विधि

55

34

कल्पना-भोग

58

35

मैत्री : प्रभु-मंदिर का द्वार

60

36

शांति-सूत्र नियति की स्वीकृति

63

37

मौन और एकांत का इक्कीस दिवसीय प्रयोग

66

38

प्राण-साधना

71

39

मंत्र-साधना

74

40

अंतर्वाणी साधना

79

41

संयम साधना-1

81

42

संयम साधना-2

84

43

संतुलन ध्यान-1

85

44

संतुलन ध्यान-2

86

45

श्रेष्ठतम क्षण का ध्यान

86

46

'मैं-तू' ध्यान

89

47

इंद्रियों को थका डालें

89

अपराह्य में करनें वाली ध्यान विधियां

48

श्वास : सबसे गहरा मंत्र

94

49

भीतरी आकाश का अंतरिक्ष-यात्री

94

50

आकाश सा विराट एवं अणु सा छोटा

95

51

'एक' का अनुभव

96

52

आंतरिक मुस्कान

97

53

ओशो'

97

54

देखना ही ध्यान है

98

55

शब्दों के बिना देखना

99

56

मौन का रंग

99

57

सिरदर्द को देखना

100

58

ऊर्जा का स्तंभ

101

59

गर्भ की शांति

102

संध्या के समय करने वाली ध्यान विधियां

60

कुंडलिनी ध्यान

106

61

झूमना

107

62

सामूहिक नृत्य

107

63

वृक्ष के समान नृत्य

108

64

हाथों से नृत्य

108

65

सूक्ष्म पर्तो को जगाना

109

66

गीत गाओ

110

67

हा गुंजन

110

68

नादब्रह्म ध्यान

111

69

स्त्री-पुरुष जोड़ों के लिए नादब्रह्म

112

70

कीर्तन

113

71

सामूहिक प्रार्थना

114

72

मुर्दे की भांति हो जाएं

115

73

अग्निशिखा

116

रात के समय करले वाली ध्यान विधियां

74

प्रकाश पर ध्यान

120

75

बुद्धत्व का अवलोकन

120

76

तारे का भीतर प्रवेश

121

77

चंद्र ध्यान

122

78

ब्रह्मांड के भाव मे सोने जाएं

122

79

सब काल्पनिक है

123

80

ध्यान के भीतर ध्यान

123

81

पशु हो जाएं

124

82

नकारात्मक हो जाएं

125

83

'हां, हां, हां'

126

84

एक छोटा, तीव्र कपन

126

85

अपने सुरक्षा-कवच उतार दो

127

86

जीवन और मृत्यु ध्यान

127

87

बच्चे की दूध की बोतल

128

88

भय में प्रवेश

128

89

अपनी शून्यता में प्रवेश

129

90

गर्भ में वापस लौटना

129

91

आवाजें निकालना

130

92

प्रार्थना ध्यान

131

93

लातिहान ध्यान

132

94

गौरीशंकर ध्यान

133

95

देववाणी ध्यान

134

96

प्रेम

135

97

झूठे प्रेम खो जाएंगे

136

98

प्रेम को फैलाएं

137

99

प्रेमी- युगल एक-दूसरे में घुलें-मिलें

138

100

प्रेम के प्रति समर्पण

139

101

प्रेम-कृत्य को अपने आप होने दो

139

102

कृत्यों में साक्षीभाव

140

103

बहना- मिटना-तथाता ध्यान

141

104

अंधकार, अकेले होने, और मिटने का बोध

147

105

स्वेच्छा से मृत्यु में प्रवेश

153

106

सजग मृत्यु और शरीर से अलग होने की विधि

156

107

मृतवत हो जाना

157

108

जाति-स्मरण के प्रयोग

161

109

अंतर्प्रकाश साधना

167

110

शिवनेत्र

170

111

त्राटक - एकटक देखने की विधि

171

112

त्राटक ध्यान -1

172

113

त्राटक ध्यान -2

173

114

त्राटक ध्यान -3

175

115

रात्रि- ध्यान

177

परिशिष्ट

ओशो-सक परिचय

179

ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट

183

ओशो का हिंदी साहित्य

185

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to ध्यान विज्ञान (ध्यान में... (Yoga | Books)

Meditation Science and Practice
Deal 20% Off
by N.C. Panda
Paperback (Edition: 2003)
D. K. Printworld Pvt. Ltd.
Item Code: IDD290
$23.50$18.80
You save: $4.70 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Meditation Science and Practice
Deal 20% Off
by N.C. Panda
Paperback (Edition: 2003)
D. K. Printworld Pvt. Ltd.
Item Code: IDD291
$26.00$20.80
You save: $5.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Meditation: The Art and Science
by Swami Veda Bharati
Paperback (Edition: 2008)
Wisdom Tree Publications
Item Code: IHK030
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Mind and Meditation: The Art And Science Of Awakening
by Dr. Amit Jain
Paperback (Edition: 2012)
D. K. Printworld Pvt. Ltd.
Item Code: NAE433
$21.00
Add to Cart
Buy Now
The Science of Meditation
Deal 20% Off
by Sneh Chakraburtty
Paperback (Edition: 2009)
New Age Books
Item Code: IHL005
$26.00$20.80
You save: $5.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Science of Meditation 
Item Code: IDD350
$20.00
Add to Cart
Buy Now
The Path of Meditation: A Step by Step Guide to Meditation
by Osho
Hardcover (Edition: 2008)
Rebel Publisher
Item Code: IHL571
$27.50
Add to Cart
Buy Now
Mantra and Meditation
Deal 20% Off
Item Code: IDC985
$26.00$20.80
You save: $5.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Kriya-Yoga: The Science of Life-Force
Deal 10% Off
Item Code: NAE428
$40.00$36.00
You save: $4.00 (10%)
Add to Cart
Buy Now
The Heart of Yoga (Yoga: The Science of the Soul)
by Osho
Hardcover (Edition: 2015)
Osho Media International
Item Code: NAM143
$43.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
My previous purchasing order has safely arrived. I'm impressed. My trust and confidence in your business still firmly, highly maintained. I've now become your regular customer, and looking forward to ordering some more in the near future.
Chamras, Thailand
Excellent website with vast variety of goods to view and purchase, especially Books and Idols of Hindu Deities are amongst my favourite. Have purchased many items over the years from you with great expectation and pleasure and received them promptly as advertised. A Great admirer of goods on sale on your website, will definately return to purchase further items in future. Thank you Exotic India.
Ani, UK
Thank you for such wonderful books on the Divine.
Stevie, USA
I have bought several exquisite sculptures from Exotic India, and I have never been disappointed. I am looking forward to adding this unusual cobra to my collection.
Janice, USA
My statues arrived today ….they are beautiful. Time has stopped in my home since I have unwrapped them!! I look forward to continuing our relationship and adding more beauty and divinity to my home.
Joseph, USA
I recently received a book I ordered from you that I could not find anywhere else. Thank you very much for being such a great resource and for your remarkably fast shipping/delivery.
Prof. Adam, USA
Thank you for your expertise in shipping as none of my Buddhas have been damaged and they are beautiful.
Roberta, Australia
Very organized & easy to find a product website! I have bought item here in the past & am very satisfied! Thank you!
Suzanne, USA
This is a very nicely-done website and shopping for my 'Ashtavakra Gita' (a Bangla one, no less) was easy. Thanks!
Shurjendu, USA
Thank you for making these rare & important books available in States, and for your numerous discounts & sales.
John, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2020 © Exotic India