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भिमायन (अस्पृश्यता के अनुभव) - Bhimayan

भिमायन (अस्पृश्यता के अनुभव) - Bhimayan
$16.80$21.00  [ 20% off ]
Item Code: NZE454
Author: दुर्गाभाई व्याम और सुभाष व्याम (Durgabhai Vyam and Subhash Vyam)
Publisher: Eklavya Prakashan, Bhopal
Language: Hindi
Edition: 2012
ISBN: 9789381300411
Pages: 106 (Throughout B/W Illustrations)
Cover: Paperback
Other Details: 11.5 Inch X 8.5 inch
weight of the book: 360 gms

पुस्तक के विषय में

भारत में अछूत होने का क्या अर्थ है? कुछ भारतीय दूसरों के स्पर्श को हिकारत से क्यों देखते हैं? भीमराव रामजी अम्बेडकर (१८९१-1956) भारत के एक अग्रणी क्रान्तिकारी, नियमित तौर पर अस्पृश्यता और भेदभाव सहने के अपने अनुभव बता रहे हैं: १० साल की उम्र में स्कूल, कोलम्बियो विश्वविद्याल से लौटने के बाद बड़ौदा में, और यात्रा के दौरान| सारी विषमताओं का सामना करते हुए भी अम्बेडकर ने भारत के संविधान का ड्राफ्ट तैयार किया और अंतत: बौद्ध बन गए| अम्बेडकर की तरह की अनुभवों ने भारत के १७ करोड़ दलितों का आज भी पीछा नहीं छोड़ा हैं| आज भी पानी, आश्रय और जीवन के अन्य बुनियादी जरूरते उन्हें मना हैं|

इस अभूतपूर्व किताब में परधान - गोड़ कलाकार दुर्गाबाई व्याम और सुभाष व्याम ने महाड़ सत्याग्रह जैसी ऐतिहासिक घटनाओ और हाल की घटनाओँ को साथ बना हैं| महाकाव्य के दर्जे की अपनी जादुई कला से परम्परागत शैली के बंधनो को तोड़ते हुए उन्होंने ग्राफ़िक शैली में नई ऊर्जा फूँक दी हैं |

 


Contetns

 

जॉन बज्रर द्वारा भूमिका 9
एक दिन 11
पानी 17
आश्रय 59
यात्रा 75
भीमायन की कला 95
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