Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > हिन्दी > भृगु संहिता: Bhrigu Smahita
Subscribe to our newsletter and discounts
भृगु संहिता: Bhrigu Smahita
भृगु संहिता: Bhrigu Smahita
Description

पुस्तक के विषय में

पं. राधाक़ष्ण श्रीमाली ज्योतिष, तंत्र, मंत्र और वास्तु के स्थापित हस्ताक्षर है। अनेक दशकों में आपने देश को सैकड़ों पुस्तकें दीं है। आपकी रचनाओं और खोजा के चलते ही आपको दर्जनों बार सम्मानित किया जा चुका है। वे सिर्फ कर्मकांडी नहीं है, बल्कि अनुभववाद पर भी भरोसा करते है। भृगु संहिता पं. श्रीमाली की ऐसी ही पुस्तक है, जिसमें खोज और अनुभवों का सम्मिश्रण है। इसलिए यह पुस्तक संग्रहणीय तो है ही आध्यात्मिक यात्रा के लिए जरूरी भी है।

ज्योतिष की अनेक शाखा प्रशाखाओं में गणित और फलित का महत्वपूर्ण स्थान है। फलित के माध्यम से जीवन पर पडने वाले ग्रहो के फलाफल का निरूपण किया जाता है। जन्म कालिक ग्रहों की जो स्थिति नभ मंडल में होती है, उसी के अनुसार उसका प्रभाव हमारे जीवन पड़ता है। जीवन में घटित आगे घटित होने वाली घटनाओं का ज्ञान फलित ज्योतिष द्वारा होता है। महर्षि भृगु ने इसी फलित ज्योतिष के आधार पर भृगु संहिता नामक महाग्रंथ की रचना की। सर्वप्रथम डस महाग्रंथ को अपने पुत्र शिष्य शुक्र को पढ़ाया, उनसे समस्त ब्राह्मण समाज और विश्व भर में यह ग्रंथ प्रचारित हुआ।

दो शब्द

सौर जगत् में भ्रमणकर्ता ग्रहों की गतिविधियों का प्रभाव अन्योनाश्रित संबंध होने के कारण मानव शरीर स्थित सौर-जगत पर भी पड़ता है। अत: पृथ्वी पर निवास करने वाले प्राणी आकाशचारी ग्रहों से प्रभावित होते हैं।

महर्षियों ने दिव्य दृष्टि, सूक्ष्म प्रज्ञा. विस्तृत ज्ञान द्वारा शरीरस्थ सौर मंडल का अध्ययन-मनन-अन्वेषण-पर्यवेक्षण-अवलोकन तदनुसार आकाशीय सौर मंडल की व्यवस्था की। उन ग्रहों के मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया ज्योतिष विद्या कालान्तर में देशकाल की सीमाएं बांध दिग्दिगंत में पहुंची, इसका प्रचार-प्रसार हुआ। इसे परिवर्धित करने में विदेशी विद्वानों ने भी अपना .योगदान दिया

ज्योतिष की अनेक शाखा-प्रशाखाओं में गणित और फलित का महत्त्वपूर्ण स्थान है। फलित के माध्यम से जीवन पर पड़ने वाले ग्रहों के फलाफल का निरूपण किया जाता है। जन्म कालिक ग्रहों की जो स्थिति नभ मंडल में होती है, उसी के अनुसार उसका प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। जीवन में घटित आगे घटित होने वाली घटनाओं का ज्ञान फलित ज्योतिष द्वारा होता है।

एक बार भगवान् नारायण क्षीर सागर में शेष शय्या पर विश्राम कर रहे थे, लक्ष्मी ब्रण दबा रही थी, उसी समय महर्षि श्रेष्ठ दर्शनीय वैकुण्ठ पहुंचे। भगवान के द्वारपाल जय-विजय ने उन्हें प्रणाम कर कहा, नारायण इस समय विश्रामाधीन हैं अत: उन तक आपको जाने देना संभव नहीं है। महर्षि रुष्ट हुए जय-विजय को शाप दिया कि तुम्हे मुझे रोकने के अपराध में तीन बार राक्षस योनि में जन्म लेकर पृथ्वी पर रहना लगा। जय-विजय मौन नतमस्तक खडे हो गए, इधर भृगु उस स्थान पर जा पहुंचे जहाँ भगवान शयन कर रहे थे। विष्णु को शयन करते देख भृगु ॠषि का क्रोध उमड पडा सोचा, मुझे देख विष्णु ने जान-बूझकर आखें मूंद ली हैं। मेरी अवज्ञा कर रहे है। क्रोध में उफनते ॠषि ने उसी समय श्री विष्णु के वक्षस्थल पर अपने दाएं पैर का प्रहार किया, विष्णु की आखें खुल गईं. वे उठ हाथ जोड़ प्रार्थना करते बोले- डे महर्षि। मेरी छाती तो वज के समान कठोर है, आपके चरण कमल कोमल हैं। कहीं स्थ चोट तो नहीं लगी। मैं क्षमा प्रार्थी हूं।'

ऐसा सुन महर्षि का क्रोध शांत हुआ, अपनी भूल क्रोध पर आत्म-ग्लानि हुई अत: शोकाकुल होकर विष्णु से क्षमा-याचना करके उनकी स्तुति करने लगे पर लक्ष्मी ऐसा देखा क्रोधित हो गई थी पति का अपमान सहन कर सकीं, बोलीं- 'हे ब्राह्मण! तुमने लक्ष्मीपति का निरादर किया है अत: मैं तुम्हें तुम्हारे सजातियों को शाप देती हू कि उनके घर मेरा अर्थात लक्ष्मी का वास नहीं होगा, वे दरिद्र बने भटकते रहेंगे।'

भृगु बोले-हे लक्ष्मी! मैंने क्रोधावेश में जो अपराध किया उसकी क्षमा विष्णु ले 'मांग ली है तथापि तुमने संयम रख ब्राह्मणों के लिए जो शाप दिया है वह आपके पद सम्मान योग्य नहीं है शाप ठीक है पर मैं अपने सजातीय ब्राह्मणों की प्रतिष्ठार्थ. आजीविकार्थ ऐसे ज्योतिष ग्रंथ का निर्माण करूंगा जिसके आधार पर वे प्राणी मात्र का भूत-भविष्य-वर्तमान का ज्ञान कर दक्षिणा रूपेण धनोपार्जन करेंगे तुम्हें वहां विवश होकर रहना होगा '' ऐसा कह भृगु अपने आश्रम लौट आए फिर भृगु संहिता महाग्रंथ की रचना की। उन्होंने सर्वप्रथम अपने पुत्र शिष्य शुक्र को पढाया उनसे समस्त ब्राह्मण समाज मे विश्व भर में यह ग्रंथ प्रचारित हुआ इस समय भृगु संहिता कहीं उपलव्य नहीं है अपितु भृगु संहिता के नाम से कुछ ग्रथ यत्र-तत्र अपूर्ण प्राप्त है।

मैंने अथक प्रयास कर कुछ सामग्री प्राप्त की है, उन्हें इस पुस्तक में स्पष्ट दे रहा हूं। भाई श्री गुलशन की प्रेरणा मेरा प्रयास तथा यत्र-तत्र से प्राप्त सामग्री, पुस्तक कें लेखन उनका सहयोग से ही पुस्तकाकार दे पाया हूं। उन सभी का मैं अनुगृहीत हूं।

 

अनुक्रम

1

दो शब्द

5-6

2

द्वादश-भाव

9-19

3

ग्रहों का स्वभाव और प्रभाव

20-32

4

जन्म-कुंडली का फलादेश

33-38

5

ज्ञातव्य

39-75

6

ग्रह भाव फल

76-112

7

योग

113-135

8

कुंडली फल

136-225

9

ग्रहों का परिचय

226-261

10

अरिष्ट विचार

262-266

11

प्रश्न विचार

267-275

12

विंशोत्तरी महादशा के ग्रहों का फलादेश

276-286

भृगु संहिता: Bhrigu Smahita

Deal 20% Off
Item Code:
NZA840
Cover:
Paperback
Edition:
2019
ISBN:
9788128806766
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
286
Other Details:
Weight of the Book: 320 gms
Price:
$14.00
Discounted:
$11.20   Shipping Free
You Save:
$2.80 (20%)
Be the first to rate this product
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
भृगु संहिता: Bhrigu Smahita
From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 4444 times since 7th Sep, 2019

पुस्तक के विषय में

पं. राधाक़ष्ण श्रीमाली ज्योतिष, तंत्र, मंत्र और वास्तु के स्थापित हस्ताक्षर है। अनेक दशकों में आपने देश को सैकड़ों पुस्तकें दीं है। आपकी रचनाओं और खोजा के चलते ही आपको दर्जनों बार सम्मानित किया जा चुका है। वे सिर्फ कर्मकांडी नहीं है, बल्कि अनुभववाद पर भी भरोसा करते है। भृगु संहिता पं. श्रीमाली की ऐसी ही पुस्तक है, जिसमें खोज और अनुभवों का सम्मिश्रण है। इसलिए यह पुस्तक संग्रहणीय तो है ही आध्यात्मिक यात्रा के लिए जरूरी भी है।

ज्योतिष की अनेक शाखा प्रशाखाओं में गणित और फलित का महत्वपूर्ण स्थान है। फलित के माध्यम से जीवन पर पडने वाले ग्रहो के फलाफल का निरूपण किया जाता है। जन्म कालिक ग्रहों की जो स्थिति नभ मंडल में होती है, उसी के अनुसार उसका प्रभाव हमारे जीवन पड़ता है। जीवन में घटित आगे घटित होने वाली घटनाओं का ज्ञान फलित ज्योतिष द्वारा होता है। महर्षि भृगु ने इसी फलित ज्योतिष के आधार पर भृगु संहिता नामक महाग्रंथ की रचना की। सर्वप्रथम डस महाग्रंथ को अपने पुत्र शिष्य शुक्र को पढ़ाया, उनसे समस्त ब्राह्मण समाज और विश्व भर में यह ग्रंथ प्रचारित हुआ।

दो शब्द

सौर जगत् में भ्रमणकर्ता ग्रहों की गतिविधियों का प्रभाव अन्योनाश्रित संबंध होने के कारण मानव शरीर स्थित सौर-जगत पर भी पड़ता है। अत: पृथ्वी पर निवास करने वाले प्राणी आकाशचारी ग्रहों से प्रभावित होते हैं।

महर्षियों ने दिव्य दृष्टि, सूक्ष्म प्रज्ञा. विस्तृत ज्ञान द्वारा शरीरस्थ सौर मंडल का अध्ययन-मनन-अन्वेषण-पर्यवेक्षण-अवलोकन तदनुसार आकाशीय सौर मंडल की व्यवस्था की। उन ग्रहों के मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया ज्योतिष विद्या कालान्तर में देशकाल की सीमाएं बांध दिग्दिगंत में पहुंची, इसका प्रचार-प्रसार हुआ। इसे परिवर्धित करने में विदेशी विद्वानों ने भी अपना .योगदान दिया

ज्योतिष की अनेक शाखा-प्रशाखाओं में गणित और फलित का महत्त्वपूर्ण स्थान है। फलित के माध्यम से जीवन पर पड़ने वाले ग्रहों के फलाफल का निरूपण किया जाता है। जन्म कालिक ग्रहों की जो स्थिति नभ मंडल में होती है, उसी के अनुसार उसका प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। जीवन में घटित आगे घटित होने वाली घटनाओं का ज्ञान फलित ज्योतिष द्वारा होता है।

एक बार भगवान् नारायण क्षीर सागर में शेष शय्या पर विश्राम कर रहे थे, लक्ष्मी ब्रण दबा रही थी, उसी समय महर्षि श्रेष्ठ दर्शनीय वैकुण्ठ पहुंचे। भगवान के द्वारपाल जय-विजय ने उन्हें प्रणाम कर कहा, नारायण इस समय विश्रामाधीन हैं अत: उन तक आपको जाने देना संभव नहीं है। महर्षि रुष्ट हुए जय-विजय को शाप दिया कि तुम्हे मुझे रोकने के अपराध में तीन बार राक्षस योनि में जन्म लेकर पृथ्वी पर रहना लगा। जय-विजय मौन नतमस्तक खडे हो गए, इधर भृगु उस स्थान पर जा पहुंचे जहाँ भगवान शयन कर रहे थे। विष्णु को शयन करते देख भृगु ॠषि का क्रोध उमड पडा सोचा, मुझे देख विष्णु ने जान-बूझकर आखें मूंद ली हैं। मेरी अवज्ञा कर रहे है। क्रोध में उफनते ॠषि ने उसी समय श्री विष्णु के वक्षस्थल पर अपने दाएं पैर का प्रहार किया, विष्णु की आखें खुल गईं. वे उठ हाथ जोड़ प्रार्थना करते बोले- डे महर्षि। मेरी छाती तो वज के समान कठोर है, आपके चरण कमल कोमल हैं। कहीं स्थ चोट तो नहीं लगी। मैं क्षमा प्रार्थी हूं।'

ऐसा सुन महर्षि का क्रोध शांत हुआ, अपनी भूल क्रोध पर आत्म-ग्लानि हुई अत: शोकाकुल होकर विष्णु से क्षमा-याचना करके उनकी स्तुति करने लगे पर लक्ष्मी ऐसा देखा क्रोधित हो गई थी पति का अपमान सहन कर सकीं, बोलीं- 'हे ब्राह्मण! तुमने लक्ष्मीपति का निरादर किया है अत: मैं तुम्हें तुम्हारे सजातियों को शाप देती हू कि उनके घर मेरा अर्थात लक्ष्मी का वास नहीं होगा, वे दरिद्र बने भटकते रहेंगे।'

भृगु बोले-हे लक्ष्मी! मैंने क्रोधावेश में जो अपराध किया उसकी क्षमा विष्णु ले 'मांग ली है तथापि तुमने संयम रख ब्राह्मणों के लिए जो शाप दिया है वह आपके पद सम्मान योग्य नहीं है शाप ठीक है पर मैं अपने सजातीय ब्राह्मणों की प्रतिष्ठार्थ. आजीविकार्थ ऐसे ज्योतिष ग्रंथ का निर्माण करूंगा जिसके आधार पर वे प्राणी मात्र का भूत-भविष्य-वर्तमान का ज्ञान कर दक्षिणा रूपेण धनोपार्जन करेंगे तुम्हें वहां विवश होकर रहना होगा '' ऐसा कह भृगु अपने आश्रम लौट आए फिर भृगु संहिता महाग्रंथ की रचना की। उन्होंने सर्वप्रथम अपने पुत्र शिष्य शुक्र को पढाया उनसे समस्त ब्राह्मण समाज मे विश्व भर में यह ग्रंथ प्रचारित हुआ इस समय भृगु संहिता कहीं उपलव्य नहीं है अपितु भृगु संहिता के नाम से कुछ ग्रथ यत्र-तत्र अपूर्ण प्राप्त है।

मैंने अथक प्रयास कर कुछ सामग्री प्राप्त की है, उन्हें इस पुस्तक में स्पष्ट दे रहा हूं। भाई श्री गुलशन की प्रेरणा मेरा प्रयास तथा यत्र-तत्र से प्राप्त सामग्री, पुस्तक कें लेखन उनका सहयोग से ही पुस्तकाकार दे पाया हूं। उन सभी का मैं अनुगृहीत हूं।

 

अनुक्रम

1

दो शब्द

5-6

2

द्वादश-भाव

9-19

3

ग्रहों का स्वभाव और प्रभाव

20-32

4

जन्म-कुंडली का फलादेश

33-38

5

ज्ञातव्य

39-75

6

ग्रह भाव फल

76-112

7

योग

113-135

8

कुंडली फल

136-225

9

ग्रहों का परिचय

226-261

10

अरिष्ट विचार

262-266

11

प्रश्न विचार

267-275

12

विंशोत्तरी महादशा के ग्रहों का फलादेश

276-286

Post a Comment
 
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to भृगु संहिता: Bhrigu Smahita (Hindu | Books)

भृगु संहिता: Bhrigu Samhita
Item Code: NZM135
$43.00
Add to Cart
Buy Now
भृगु सरल पद्धति: Bhrigu Saral Paddhati (Part-I)
Paperback (Edition: 2017)
Saptarishis Publications
Item Code: NZL993
$21.00
Add to Cart
Buy Now
Bhrigu Samhita
by Dr. T.M. Rao
Paperback (Edition: 2008)
Hindology Books
Item Code: IDK466
$23.50
Add to Cart
Buy Now
Rahu and Kethu in Bhrigu Astrology
by Dr. N. Srinivasan Shastry
Paperback (Edition: 2018)
Sagar Publications
Item Code: IDK220
$16.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
Fantastic! Thank You for amazing service and fast replies!
Sonia, Sweden
I’ve started receiving many of the books I’ve ordered and every single one of them (thus far) has been fantastic - both the books themselves, and the execution of the shipping. Safe to say I’ll be ordering many more books from your website :)
Hithesh, USA
I have received the book Evolution II.  Thank you so much for all of your assistance in making this book available to me.  You have been so helpful and kind.
Colleen, USA
Thanks Exotic India, I just received a set of two volume books: Brahmasutra Catuhsutri Sankara Bhasyam
I Gede Tunas
You guys are beyond amazing. The books you provide not many places have and I for one am so thankful to have found you.
Lulian, UK
This is my first purchase from Exotic India and its really good to have such store with online buying option. Thanks, looking ahead to purchase many more such exotic product from you.
Probir, UAE
I received the kaftan today via FedEx. Your care in sending the order, packaging and methods, are exquisite. You have dressed my body in comfort and fashion for my constrained quarantine in the several kaftans ordered in the last 6 months. And I gifted my sister with one of the orders. So pleased to have made a connection with you.
EB Cuya FIGG, USA
Thank you for your wonderful service and amazing book selection. We are long time customers and have never been disappointed by your great store. Thank you and we will continue to shop at your store
Michael, USA
I am extremely happy with the two I have already received!
Robert, UK
I have just received the top and it is beautiful 
Parvathi, Malaysia
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2021 © Exotic India