पुस्तक परिचय
प्रस्तुत पुस्तक 'स्वतंत्रता संग्राम में पत्र-पत्रिकाओं का योगदान' में देश की आजादी में जिन पत्र-पत्रिकाओं की मुख्य भूमिका रही उनका विवरण प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का यदि सही ढंग से आकलन किया जाय तो स्वतंत्रता की पृष्ठभूमि तैयार करने में पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका सर्वोपरि रही है। स्वतंत्रता आन्दोलन के लिए राजनेताओं को जितना संघर्ष करना पड़ा, उससे तनिक भी कम संघर्ष पत्रों एवं पत्रकारों को नहीं करना पड़ा।
उन दिनों पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादक, प्रकाशक एवं मुद्रक को न तो किसी का सम्बल था और न संरक्षण। संसाधनों का अभाव साथ ही अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य की न कोई संविधान सम्मत अवधारणा। बावजूद पत्रकारिता व्यवसाय नहीं मौशन के रूप में अपनाई गई। लक्ष्य सिर्फ एक था, देश को दासता की जंजीरों से मुक्त करना। लेखनी के माध्यम से जन जागरण का उत्कट उद्घोष करना । ब्रिटिश नौकरशाही को जड़ मूल से उखाड़ फेंकने का संकल्प और पुरस्कार में कारावास भोगने के अतिरिक्त नृशंस यातनाएँ सहने को तत्पर रहना ।
आशा है कि प्रस्तुत पुस्तक पत्रकारिता के क्षेत्र में रुचि रखने वाले पाठकों एवं शोध छात्रों के लिए मिल का पत्थर साबित होगा।
लेखक परिचय
डॉ० भारती कुमारी सिंह पिता श्री धीरेन्द्र नारायण सिंह (धीरप्रशान्त) माता - श्रीमती सरस्वती देवी पति - श्री विवेकानन्द सिंह शिक्षा - एम० ए०, बी० एड०, बी० लिब० पी-एच० डी० रचनाएँ - कादम्बिनी, आर्यावर्त, दैनिक हिन्दुस्तान, आज, नवभारत टाईम्स, दैनिक जागरण, शैली, वर्तिका, अनुव्रत नियमित प्रकाशन । भावना, आदि पत्र-पत्रिकाओं में कार्यरत समप्रति, जवाहर नवोदय विद्यालय, अररिया, पी०जी०टी० (हिन्दी शिक्षक) सम्पर्क सूत्र डा० भारती कुमारी सिंह, द्वारा श्री विवेकानन्द सिंह (आर० ओ०), अनुग्रह नारायण सिंह समाज अध्ययन संस्थान, पटना-1 चलिवार्ता - 9835497340
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