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ईश्वर और संसार: God and World

ईश्वर और संसार: God and World
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Item Code: GPA141
Author: जयदयाल गोयन्दका (Jaya Dayal Goyandka)
Publisher: Gita Press, Gorakhpur
Language: Sanskrit Text With Hindi Translations
Edition: 2013
ISBN: 9788129307071
Pages: 256
Cover: Paperback
Other Details: 8.5 inch X 5.5 inch
weight of the book: 200 gms

श्री परमात्मने नम:

शास्त्रोंका अवलोकन और महापुरुषो के वचनो का श्रवण करके मैं हम निर्णयपर पहुँचा कि संसारमें श्रीमद्भगवगीता के समान कल्याणके लिये कोई भी उपयोगी ग्रन्थ नहीं हैगीतामें ज्ञानयोग, ध्यानयोग, कर्मयोग, भक्तियोग,आदि जितनेभी साधन बतलाये गयेहैं, उनमेंसे कोई भी साधन अपनी श्रद्धा, रूचि और योग्यताके अनुसार करने से मनुष्यकर शीघ्र कल्याण हो सकता है

अतएव उपर्युक्त साधनोंकी तथा परमात्माका त्तव रहस्य जानने के लिये महापुरुषो का और उनके अभाव में उच्चकोटिके साधकों का श्रद्धा, प्रेमपूर्वक सग करने की विशेष चेष्टा रखते हुवे गीताका अर्थ और मान सहित मनन करने तथा उसके अनुसार अपना जीवन बनाने के लिये प्राण पर्यन्त प्रयत्न करना चाहिये

 

विषय सूची

1

ईश्वर और संसार

1

2

रामायणमें आदर्श भ्रातृ प्रेम

9

3

श्रीसीताके चरित्रसे आदर्श शिक्षा

89

4

तेईस प्रश्र

117

5

शंका समाधान

127

6

जीव सम्बन्धी प्रश्रोत्तर

138

7

जीवात्मा

154

8

तत्त्व विचार

158

9

अनन्य शरणागति

177

10

गीतोक्त सांख्ययोग

180

11

गीतोक्त सांख्ययोगका स्पष्टीकरण

188

12

गीताका उपदेश

192

13

गीता और योगदर्शन

198

14

गीताके अनुसार जीवन्मुक्तका क्त क्षण

203

15

गीताके अनुसार जीव, ईश्वर और ब्रह्मका विवेचन

208

16

गीताके अनुसार कर्म, विकर्म और अकर्मका स्वरूप

215

17

गीतोक्त क्षर, अक्षर और पुरुषोत्तम

219

18

गीता मायावाद मानती है या परिणामवाद

223

19

गीतामें ज्ञानयोग आदि शब्दोंका पृथक् पृथक् अर्थोंमें प्रयोग

228

20

श्रीमद्भगववद्रीताका प्रभाव

234

21

तेरह आवश्यक बातें

244

22

मनन करने योग्य

246

23

सार बातें

248

 

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