पुस्तक परिचय
आधुनिक जीवन में जनसंचार की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है। जो समाज इस क्षेत्र में जितना अग्रणी है, वह विकास की उतनी ही उच्चतर मंजिलों पर स्थित है। भारत में भी पिछले दो दशकों में प्रौद्योगिकी में हुए विकास के परिणाम स्वरूप सूचना और प्रसारण के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में एफ.एम. चैनलों से मनोरंजन और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण मुकाम हासिल करने में भारी मदद मिली है। आकाशवाणी और दूरदर्शन की राष्ट्रव्यापी भूमिका ने भारत की जनता को एक-दूसरे से जोड़ दिया है। रीति-रिवाज, खान-पान, रहन-सहन, आमोद-प्रमोद तथा एक-दूसरे के साथ सांस्कृतिक एकता स्थापित करने वाले अन्य विभिन्न सूत्रों को उजागर करने में मीडिया और जनसंचार का बहुत बड़ा योगदान है। इसके अतिरिक्त यह एक ऐसा क्षेत्र है जो बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन करता है। आज इसमें देश के लाखों प्रतिभाशाली नौजवान कमा-खा रहे हैं। न्यूज रीडिंग, कम्पीयरिंग, एककरिंग, लेखन, डायरेक्शन, प्रोडक्शन से लेकर जनसम्पर्क और विज्ञापन आदि अनेक ऐसे विभाग हैं जिनमें रोजगार की अपरम्पार संभावनाएँ हैं।
लेखक परिचय
डॉ. परिभाषा तिवारी हिन्दी पत्रकारिता एवं जनसंचार की विशेषज्ञ हैं। आपने इस क्षेत्र में अनेक मौलिक काम किए हैं। जो देश विदेश में चर्चित और प्रशंशित हुए है। आपका जन्म 6 जुलाई 1967 को फतेहपुर जिले के विंदकी कस्बे में हुआ। आपकी उच्च शिक्षा कानपुर में हुई। कानपुर विश्वविद्यालय से आपने 'स्वतंत्रता आन्दोलनो में हिन्दी पत्रकारिता का योगदान' पर पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। 1994 में वे अध्यापन के क्षेत्र में आयीं। संप्रति : वे जुहारी देवी कन्या महाविद्यालय के हिन्दी एवं पत्रकारिता विभाग में रीडर हैं।
भूमिका
आधुनिक जीवन में जनसंचार की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है। जो समाज इस क्षेत्र में जितना अग्रणी है, वह विकास की उतनी ही उच्चतर मंजिलों पर स्थित है। भारत में भी पिछले दो दशकों में प्रौद्योगिकी में हुए विकास के परिणामस्वरूप सूचना और प्रसारण के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में एफ एफ चैनलों से मनोरंजन और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण मुकाम हासिल करने में भारी मदद मिली है। आकाशवाणी और दूरदर्शन की राष्ट्रव्यापी भूमिका ने भारत की जनता को एक दूसरे से जोड़ दिया है। रीति-रिवाज, खान-पान, रहन-सहन, आमोद-प्रमोद तथा एक-दूसरे के साथ सांस्कृतिक एकता स्थापित करने वाले अन्य विभिन्न सूत्रों को उजागर करने में मीडिया और जनसंचार का बहुत बड़ा योगदान है। इसके अतिरिक्त यह एक ऐसा क्षेत्र है जो बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन करता है। आज इसमें देश के लाखों प्रतिभाशाली नौजवान कमा-खा रहे हैं। न्यूज रीडिंग, कम्पीयरिंग, एककरिंग, लेखन, डायरेक्शन, प्रोडक्शन से लेकर जनसम्पर्क और विज्ञापन आदि अनेक ऐसे विभाग हैं जिनमें रोजगार की अपरम्पार संभावनाएं हैं। यह पुस्तक इन्हीं पहलुओं को विस्तार और नए तरीके से विद्यार्थियों के सामने रखती है।
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