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प्रेमचंद (भारतीय साहित्य के निर्माता) Premchand (Makers of Indian Literature)

प्रेमचंद (भारतीय साहित्य के निर्माता) Premchand  (Makers of Indian Literature)
$12.00
Item Code: NZA291
Author: कमल किशोर गोयनका (Kamal Kishore Goyandka)
Publisher: Sahitya Akademi, Delhi
Language: Hindi
Edition: 2018
ISBN: 9788126040230
Pages: 124
Cover: Paperback
Other Details: 8.5 inch x 5.5 inch

पुस्तक परिचय

प्रेमचंद (1880-1936) भारत के शीर्षस्थ एवं कालजयी साहित्यकारों में से एक हैं । संपूर्ण विश्व साहित्य में उनका नाम बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है । वे बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न साहित्यकार थे । उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक, लेख, संपादकीय, संस्मरण, समीक्षा आदि गद्य विधाओं में लिखा, लेकिन उन्हें एक कहानीकार और उपन्यास लेखक के रूप में ही ज्यादा पहचाना गया । उन्हें अपने जीवनकाल में ही 'उपन्यास-सम्राट' की पदवी मिल गई थी ।

प्रेमचंद ने 15 उपन्यास, 300 से अधिक कहानियाँ, 3 नाटक, 10 अनुवाद, 7 बाल पुस्तकें तथा हज़ारों लेख, संपादकीय, भाषण, भूमिका आदि की लेखकीय धरोहर छोड़ी है । यह स्थिति हिंदी एवं उर्दू दोनों भाषाओं से ही दिखाई पड़ती है, चूँकि वे इन दोनों ही भाषाओं में समान रूप से सृजनशील थे ।

उनका उपन्यास गोदान और कहानी 'कफ़न' उनकी सर्वाधिक चर्चित और कालजयी रचनाएँ हैं । प्रेमचंद की रचनाओं में भारतीय किसान के करुण जीवन के यथार्थ को मर्मभेदी रूप में प्रस्तुत किया गया है । उनकी रचनाओं की सामग्री उनके जीवन के निजी अनुभवों और निकट परिवेश के सूक्ष्म निरीक्षण से समेटी गई है ।

लेखक परिचय

कमल किशोर गोयनका (जन्म : 1938) प्रस्तुत विनिबंध के लेखक गोयनका जी की ख्याति प्रेमचंद के अध्ययन, अध्यापन एवं अनुसंधान के लिए समर्पित व्यक्ति के रूप में है । प्रेमचंद पर केंद्रित आपकी दो दर्जन से ज्यादा मौलिक एवं संपादित कृतियाँ प्रकाशित हैं, जिनमें प्रमुख हैं-प्रेमचंद विश्वकोश (दो खंड, 1981), प्रेमचंद का अप्राप्त साहित्य (दो खंड, 1988), प्रेमचंद के नाम पत्र (2002), प्रेमचंद की अप्राप्त कहानियाँ (2005), प्रेमचदं कहानी रचनावली (छह खंड, 2011) आदि । अन्य लेखकों और विषयों पर भी उनकी 20 से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हैं । दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत डॉ. ज़ाकिर हुसैन स्नातकोत्तर (सांध्य) महाविद्यालय के हिंदी विभाग से सेवानिवृत्त उप-प्राचार्य गोयनका जी को भारतीय भाषा परिषद (कोलकाता), हिंदी अकादमी (दिल्ली), उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान (लखनऊ), केंद्रीय हिंदी संस्थान (आगरा) और हिंदी प्रचारिणी सभा, मॉरीशस के पुरस्कारों सहित अनेक पुरस्कार-सम्मान प्राप्त हुए हैं ।

 

 

अनुक्रम

1

जीवन

7

2

साहित्य

11

3

साहित्य-चिन्तन

20

4

सृजन-प्रक्रिया

28

5

राष्ट्र स्वराज्य का कथात्मक महासमर

34

6

समाज जागरण, मुक्ति एवं कायाकल्प

46

7

कृषि संस्कृति रक्षा की अनिवार्यता

56

8

विचार गांधीवाद या समाजवाद

66

9

साम्प्रदायिकता एकता का संकल्प

74

10

मनोविज्ञान प्रयोग की दिशाएँ

85

11

भाषा वैभव और वैशिष्ट्य

92

12

प्रासंगिकता विचार का औचित्य

103

13

उपसंहार

108

 

परिशिष्ट

121

 

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