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दादा-दादी नाना- नानी (कहानियाँ रिश्तों की) - Stories on Grandparents

पुस्तक परिचय

भारतीय समाज में रिश्तो को जितनी मजबूती, आत्मीयता और ऊर्जा हासिल रही है, वह विरल है | एक तरह से कहा जा सकता है क़ी इस देश की यथार्थ को रिश्तो क़ी समझ के बगैर जाना-समझा नहीं जा सकता है | माँ-पिता, भाई-बहन, दोस्त, दादी-नानी, बाबा -नाना, मामा, मौसा-मौसी, बुआ-फूफा, दादा, चाचा, दोस्ती-अनगिनत सम्बन्ध है जो लोगो के अनुभव-संसार में जीवंत है और जिनसे लोगो का अनुभव-संसार बना है | इसीलिए हमारे देश क़ी विभिन्न भाषाओ में लिखी गई कहानियो, उपन्यासों आदि में ये आदि में ये रिश्ते बार-बार समूची ऊष्मा, जटिलता और गहनता के साथ प्रकट हुए है | न केवल लेखको, कवियों, कलाकारों बल्कि सामाजिक चिंतको के लिए भी ये रिश्ते एक तरह से लिटमस पेपर है जिनसे वे अपने अध्ययन क्षेत्र के निष्कर्षो, स्थापनाओं, सिद्धान्तों की जाँच कर सकते है | अतः रिश्तो पर रची गई कहानियो की यह श्रृंखला हमारी दुनिया का अंकन होने के साथ-साथ हमारी दुनिया को पहचानने और उसकी व्याख्या करने की परियोजना के लिए सन्दर्भ कोश के रूप में भी ग्रहण की जा सकती है |




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