लेखक परिचय
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी जगतप्रिय आध्यात्मिक गुरु हैं। मानवीय मूल्यों के पुनर्जागरण द्वारा संसार को तनावमुक्त और हिंसामुक्त बनाने के उनके लक्ष्य ने विश्व भर में करोड़ों लोगों को संसार की उन्नति के लिए अपने उत्तरदायित्व के क्षेत्र को विस्तृत करने और सेवारत होने की प्रेरणा दी है। सन् 1956 में दक्षिण भारत में जन्मे, गुरुदेव को बाल्यकाल में अधिकांशतः गहरे ध्यान में देखा जाता था। चार वर्ष की अवस्था में, संस्कृत के प्राचीन ग्रंथ श्रीमद्भगवद् गीता के श्लोकों का पाठ कर उन्होंने अपने शिक्षकों को अचंभित कर दिया। उनमें गहनतम सत्य को सरल शब्दों में प्रस्तुत करने की अद्वितीय कुशलता है। गुरुदेव ने 1981 में आर्ट ऑफ लिविंग की स्थापना की जो एक शैक्षिक और मानवतावादी गैर सरकारी संस्था है। यह संस्था संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद (इ.सी.ओ.एस.ओ.सी) के साथ विशेष परामर्शदाता के स्तर पर कार्य करती है। 180 देशों में उपस्थित यह गैर लाभकारी, शैक्षिक व मानवतावादी संगठन, व्यक्तिगत स्तर पर शांति स्थापित करते हुए सामाजिक स्तर पर मानवतावादी मूल्यों की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है। 1997 में गुरुदेव ने इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ह्यूमन वैल्यूज़ की स्थापना की जो मानवीय मूल्यों और संवहनीय विकास को प्रोत्साहित करता है। गुरुदेव विश्व भर में विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों, प्रशिक्षणों, व्यक्तिगत बातचीत, आर्ट ऑफ लिविंग कार्यशालाओं और मानवतावादी उपक्रमों द्वारा 80 करोड़ से भी अधिक लोगों तक पहुँच चुके हैं। उन्होंने जनसामान्य तक उन पुरातन अभ्यासों को पहुँचाया जो पहले परम्परागत रूप से विशेष वर्ग तक ही सीमित थे। उन्होंने आत्म-विकास हेतु अनेक ऐसी तकनीकें बनाईं जिसे दैनिक जीवन में अपनाकर सुगमता से मन को शांत रखा जा सकता है तथा अधिक उत्साहित और आत्मविश्वासी बना जा सकता है।
पुस्तक परिचय
राज्य का शासन सरल नहीं लेकिन राजा जनक अपने सभी कर्तव्यों का कुशलता से पालन करते थे। शक्तिशाली राजा होने पर भी वे प्रायः सोचते थे, 'ज्ञान कैसे प्राप्त होता है? मुक्ति कैसे मिलती है?' सब प्रकार के भोग विलासों से घिरे होने पर भी उनके मन में प्रश्न था, 'वैराग्य कैसे प्राप्त किया जाता है?' उनके प्रश्नों के उत्तर एक युवा महामुनि अष्टावक्र द्वारा दिए गए। यद्यपि महामुनि अष्टावक्र का शरीर आठ स्थानों से विकृत था, पर वे परम सत्य में पूर्ण रूप से स्थापित थे। गुरुदेव इस अद्भुत संवाद के मर्म को सरल शब्दों में आज के समय के सन्दर्भ प्रस्तुत कर रहे हैं।
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