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हम और यह विश्व: Ham aur Yah Vishav

NZ$42
Includes any tariffs and taxes
Specifications
Publisher: Suruchi Prakashan, Delhi
Author Manmohan Vaidya
Language: Hindi
Pages: 287
Cover: PAPERBACK
9.5x6.5 Inch
Weight 350 gm
Edition: 2025
ISBN: 9789391154714
HCH048
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Book Description

प्रस्तावना 

     

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या आर.एस.एस. भारत में काम करने वाला संगठन है, जिससे लोग सुपरिचित हैं। परंतु इसके लक्ष्य, कार्य तथा कार्यपद्धति के वारे में अभी भी जनसामान्य ही नहीं, विद्वानों को भी ठीक-ठीक जानकारी नहीं है। संघ के कार्य से जिनके स्वार्थ के खेल बंद होते हैं अथवा हो सकते हैं, वे इसके विरुद्ध प्रचार करने लगते हैं ताकि संघ का कार्य आगे न बढ़ सके। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी के विरोध अथवा किसी घटना की प्रतिक्रिया में काम नहीं करता। इसलिए ऐसे दुष्प्रचारों में कुतर्क, भ्रामक प्रतिपादन तथा असत्य बातें प्रचुर मात्रा में पायी जाती हैं। पहले, जानकारी के अभाव अथवा संघ से प्रत्यक्ष संपर्क के अभाव में असत्य प्रचार के कारण व्यक्तियों को बरगलाना संभव था, किन्तु अब संघ-कार्य के विस्तार के कारण बहुत से लोग वस्तुस्थिति का प्रत्यक्ष अनुभव ले रहे हैं इसलिए अब वह आसान नहीं रहा। संघ के बारे में मन में शंका अथवा भ्रम पैदा होने का एक कारण और हो सकता है। भारतीय परंपराओं से निकली भाषाओं के शब्दों के पीछे एक विशिष्ट भाव जगत है। भारतीय विचार की कई संकल्पनाएँ अनोखी और विशिष्ट हैं। उनके समानार्थी अथवा समांतर कल्पनाएँ भी विश्व के अन्य विभागों में भाव जगत से नदारद हैं। इसलिए उन शब्दों के जर्य को व्यक्त करने वाले प्रतिशब्द अन्यत्र मिलते नहीं। दुर्भाग्य से भारत की जनता भारत को भारतीय भाषाओं के माध्यम से जानने का साधन यानी अपनी मातृभाषाओं का ज्ञान तथा अपनी परंपरा के ग्रंथ आदि को भूल रही है। विदेशी भाषा के, गलत अर्थ व्यक्त करने वाले, अधूरे शब्दों से जब वह भारत को समझने का प्रयास करती है, तब समझने में गलती हो ही जाती है। प्रस्तुत पुस्तक संघ तथा भारत के बारे में लिखते समय जाने-अनजाने, चाहे अनचाहे की गयी गलतियों का संज्ञान लेकर, उसके सही अर्थ बताकर भ्रम तथा अज्ञान को दूर करने का एक प्रयास है। डॉ. मनमोहन वैद्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह हैं। वे बचपन से संघ-कार्य के विभिन्न दायित्वों का भारत तथा विदेशों में प्रवास करते हुए निर्वहण करते आये हैं। कार्य के निमित्त भी उनका समाज के कई प्रबुद्धजनों से संपर्क हुआ है। उन्हें संघ कार्य की विरासत अपने पिताश्री से प्राप्त हई. वैसे ही लेखनी की कुशलता भी वहीं से मिली। भारत तथा आवश्यकतानुसार विश्व के अन्य देशों की पत्र-पत्रिकाओं में भी; उनके लेख छपते रहे हैं तथा पड़े जाते रहे हैं। वे अनेक विषयों का अध्ययन करते रहते हैं। इस पुस्तक में उन्होंने अनेक विषयों की विज्ञद चर्चा विस्तारपूर्वक, तर्क और उदाहरणों के साथ की है। यह पुस्तक केवल संघ संबंधी दुष्प्रचारों का खंडन अथवा संघ को समझने में हुई त्रुटियों का खंडन मात्र नहीं है। संघ के स्वयंसेवक का विचारविश्व जब विश्वविचारों के संपर्क में आता है, तब संघ के दृष्टिकोण से मन में आने वाले प्रतिभाव भी इस पुस्तक में अक्षरबद्ध किये गये हैं। स्वयंसेवक का सामान्यतः यह स्वभाव होता है कि; किसी भी घटना या विचार का संघ-दृष्टि से सकारात्मक विश्लेषण कर; उसके सारांश से अपने स्वयंसेवकत्व को समृद्ध करना। अपने संपर्क में आने वाले छोटे-बड़े व्यक्तियों, मित्रों और संबंधियों के बारे में; उनके निरीक्षण-परीक्षण के बाद भी, स्वयंसेवक के मन में यह प्रक्रिया चलती रहती है। इस लेखन के मूल में ये सारी बातें पढ़ने पर ध्यान में आयेंगी। इसीलिए इस पुस्तक में आप धर्म जैसी जटिल संकल्पनाओं की चर्चा, संघ-कार्य को लेकर किसी घटना के निमित्त समाज या अन्य माध्यमों में चली चर्चा का दो टूक परामर्श भी पढ़ सकेंगे।

 

लेखक परिचय

 

डॉ. मनमोहन वैद्य (जन्म 1955, नागपुर) ने नागपुर विश्वविद्यालय से रेडियो केमिस्ट्री (जो न्यूक्लियर केमिस्ट्री का एक भाग है) में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। 1983 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के उत्तरदायित्व ग्रहण करने से पहले वे व्याख्याता के रूप में कार्य कर रहे थे। 1983 से अब तक डॉ. वैद्य ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में विभिन्न दायित्त्व का निर्वाह किया है। विश्व विभाग के दायित्व का निर्वहन करते हुए उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों का भ्रमण किया है। डॉ. वैद्य 1996 से गुजरात प्रान्त के प्रान्त प्रचारक, 2008 से 2018 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख (मीडिया संपर्क के प्रमुख) तथा 2018 से 2024 तक वे रा. स्व. संघ में वे संघ के अखिल भारतीय के अखिल भारतीय सह-सरकार्यवाह (संयुक्त सचिव) थे। वर्तमान में कार्यकारिणी सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। डॉ. वैद्य अपनी साहित्यिक गतिविधियों के लिए भी जाने जाते हैं। राष्ट्रीय महत्त्व के समसामयिक मुद्दों पर वे विभिन्न पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में अक्सर लिखते रहते हैं। उनकी पहली पुस्तक 'बी एंड द वर्ल्ड अराउंड' 2023 में प्रकाशित हुई थी, जो आज भी बहु-चर्चित है, उसी का यह हिंदी अनुवाद है। मराठी, हिंदी, गुजराती और अंग्रेजी में निपुण, वे अपनी अनूठी कहानी कहने की शैली में संघ, सामाजिक-सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मुद्दों के बारे में युवा मन की जिज्ञासाओं का समाधान करते हैं, जिससे वे युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हैं।

 

पुस्तक परिचय

 

आज जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है, ऐसे में यह अनुपम कृति संघ के विविध विषयों पर उसके चिंतन को प्रतिबिंबित करने वाला एक समयानुकूल दर्पण बनकर सामने आती है। यह पुस्तक संघ के भीतर से उसकी सोच को समझने का एक अवसर प्रदान करती है, एक ऐसी दृष्टि जिसमें 'भारत' की उस अवधारणा का सूक्ष्म विश्लेषण है, जिसे हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने प्रतिपादित किया, जिसे अनेक पीढ़ियों ने अपने जीवन में आत्मसात किया, और जो मानव अस्तित्व की विराट योजना में अपने पूर्ण स्वरूप में प्रकट होने वाली है। इस पुस्तक के माध्यम से भारतीयता की गहराई धर्म, स्वत्व, हिन्दुत्व और सनातन जैसे जटिल विचारों पर गहन विमर्श के माध्यम से उजागर होती है। उपनिषदों से लेकर समकालीन महान व्यक्तित्वों के जीवन के उदाहरणों के माध्यम से लेखक भारत की आत्मा को पुनः जागृत करते हैं और 'सेक्युलरिज्म', 'लिबरलिज्म' तथा 'अखण्ड भारत' जैसी बहुचर्चित समकालीन अवधारणाओं पर अपनी गहन दृष्टि प्रस्तुत करते हैं। डॉ. वैद्य की सरल भाषा, प्रसंगों से भरी शैली में किया गया विवरण, विद्वत्ता और भारतीय समाज से उनका जीवंत जुड़ाव पाठक को गहन चिंतन में ले जाते हैं कि हम कौन हैं और हमें बनना क्या है।

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