भूमिका
मुझे बार बार अमेरिका की यात्राएँ करना पड़ता है। वहाँ सुनने के लिये हिन्दी के भारतीय समाचार, तथा पढ़ने लिखने के लिये अंग्रेजी की पुस्तकें। पुस्तकालय हों या स्थानीय नागरिकों से चर्चा, सब जगह अंग्रेजी। वह तो भला हो इंजिनीयरिंग की शिक्षा का जिसका माध्यम अंग्रेज़ी था, जिसके कारण मुझे अमेरिका में कोई समस्या नहीं होती।
किन्तु अपनी आदत के अनुसार मैं सुबह एक दो घंटे लैपटॉप पर बैठकर बहुधा कोई नया विचार लिपिबद्ध कर लेता हूँ। कविता में हो व्यंग्य में रचना या उपन्यास, जब भी नये विचार आते हैं मैं सीधा लैपटॉप पर लिखता हूँ। और क्योंकि शुद्ध लिखता हूँ, प्रकाशकों को सुविधा रहती है।
प्रस्तुत कृति को दो भागों में मैं बांटता हूँ। पहला भाग है "सुख दुखे समे कृत्वा" जिसे प्रारंभ के 8 अंशों में समेटा जबकि दूसरा भाग है जिसे शीर्षक देता हूँ "पुनर्जन्म में भी पिटना है।
कृष्ण बिहारी नूर की एक ग़ज़ल है, "जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं।
यही विचार उन दिनों अमेरिका में मेरे मस्तिष्क में कौंधता रहा, जिसने कृति का दूसरा भाग लिखवा लिया। प्रत्येक प्राणी को प्रत्येक जन्म में न्यूनाधिक पिटना ही है।
अमेरिका भी स्वर्ग नहीं और भारत भी नर्क नहीं। प्रत्येक जीवन में थोड़ा सम्मान मिल जाता है, थोड़ी पिटाई। इसलिये "जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये, " इसी चिंतन में संतोष और सुख छुपा है।
Hindu (हिंदू धर्म) (14012)
Tantra (तन्त्र) (1041)
Vedas (वेद) (733)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2136)
Chaukhamba | चौखंबा (3466)
Jyotish (ज्योतिष) (1633)
Yoga (योग) (1211)
Ramayana (रामायण) (1314)
Gita Press (गीता प्रेस) (717)
Sahitya (साहित्य) (25364)
History (इतिहास) (9373)
Philosophy (दर्शन) (3710)
Santvani (सन्त वाणी) (2600)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist