यदि आपको यह जानना हो कि विचारों को मोतियों और हीरों से भी ज्यादा मूल्यवान् क्यों कहा जाता है तो आप इस ग्रंथ को पढ़िए। तीन सौ से भी अधिक पृष्ठों के इस ग्रंथ में लगभग पाँच हजार से अधिक अनमोल विचारों को संगृहीत किया गया है। मनुष्य के दैनंदिन जीवन में आनेवाले हर्ष-विषाद, उतार-चढ़ाव और आकर्षण-विकर्षण में वह कैसे टिका रहे, इसके समाधान-सूत्र इस ग्रंथ में संकलित हैं। हर विचार को एक या दो पंक्तियों में व्यक्त कर दिया गया है। व्यक्त करने की शैली प्रभावशाली एवं मनन-चिंतन को खंगालनेवाली है। यह शैली सरल, सहज और सीधी है। संपादक का यह दावा नहीं है कि ये विचार उसके ही हैं। इन विचारों का घराना-ठिकाना खोजना बहुत मुश्किल है। उसकी जरूरत भी नहीं है।
यदि इस ग्रंथ के पहले या किसी भी पन्ने पर आपकी नजर पड़ गई तो आप इसे आखिर तक पढ़े बिना छोड़ेंगे नहीं, क्योंकि इसके एक-एक वाक्य में अलौकिक अनुभव, विलक्षण प्रेरणा, दुर्लभ सुझाव और गहन चिंतन-चेतना भरी पड़ी है। यह अन्य ग्रंथों से इस अर्थ में अलग है कि इसे आप बार-बार पढ़ना चाहेंगे और जब-जब पढ़ेंगे, तब-तब नई प्रेरणा से आप सराबोर हो जाएँगे।
मैं चाहता हूँ कि यह ग्रंथ लाखों लोगों तक पहुँचे और इसका अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में अनुवाद भी हो। ग्रंथ के संपादक श्री राजेन्द्र प्रसाद बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने वर्षों के परिश्रम से इतना सुंदर और इतना प्रेरक ग्रंथ तैयार करके हिंदी भाषा का मान बढ़ाया है।
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