पुस्तक परिचय
आज भारत क्या, विश्व के अधिकांशतः मनुष्य ही यह कहने की स्थिति में नहीं है कि वे यह कह सकें, 'कि हम पूर्णतः स्वस्थ है।' कोई तन से अस्वस्थ है, तो कोई मन से । पूर्ण स्वस्थ कहने या कहलवाने का वही अधिकारी है, जिसके तन और मन में आशा और विश्वास की गंगा चिर-प्रवाहमान् हो, हिमालय-सी गम्भीरता और हरियाली हो, उगते सूर्य-सी आभा और लाली हो तथा सुख और दुख में समता भी पाली हो, अतः विरले मनुष्य ही प्रकाश को लेकर खोजने से मिलेंगे कि जो मजबूती से कह सकें, 'कि हम पूर्णतः स्वस्थ हैं।' यदि आपको वास्तव में ही पूर्ण स्वस्थ रहना है तो यह पुस्तक आपको जीवन में नया आयाम देगी तथा आत्म-विश्वास से जीने की कला सिखाएगी और आपका जीवन की बीमारियों का बहाना लेकर बोझ-सा नहीं ढोना पड़ेगा। आप सबके लिए समग्र स्वास्थ्य की यह पुस्तक 'आपका स्वास्थ्य, आपके हाथ' इसी उद्देश्य को लेकर ही लिखी गई है।
Hindu (हिंदू धर्म) (13739)
Tantra (तन्त्र) (1004)
Vedas (वेद) (727)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2084)
Chaukhamba | चौखंबा (3180)
Jyotish (ज्योतिष) (1561)
Yoga (योग) (1169)
Ramayana (रामायण) (1334)
Gita Press (गीता प्रेस) (723)
Sahitya (साहित्य) (24809)
History (इतिहास) (9051)
Philosophy (दर्शन) (3634)
Santvani (सन्त वाणी) (2629)
Vedanta (वेदांत) (116)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist