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भारतीय मुस्लिम महिलाएँ एवं विकास: Bharatiya Muslim Mahilayein Evam Vikash

$38
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Specifications
Publisher: Ayushman Publication House, Delhi
Author Hareram Singh
Language: Hindi
Pages: 192
Cover: HARDCOVER
9.0x5.5 Inch
Weight 370 gm
Edition: 2012
ISBN: 9789381842058
HCC261
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Book Description

प्राक्कथन

     

 

भारतीय संविधान भारत को एक सम्प्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतान्त्रिक गणराज्य घोषित करता है तथा इसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता प्रदान करता है। यह धार्मिक स्वतन्त्रता ही विभिन्न धर्मावलम्बियों के लिए अलग-अलग वैयक्तिक कानून द्वारा शासित होने की छूट प्रदान करती है। संविधान के लागू होने की अर्द्धशती बीत जाने पर भी अनुच्छेद ४४ में वर्णित नीति निदेशक तत्व-राज्य एक समान नागरिक संहिता बनाने का प्रयास करेगा- एक सदेच्छा ही बना हुआ है। विधियाँ किसी समाज विशेष को संचालित करने वाली नियमावली होती है जिससे समाज में बदलाव के साथ-साथ परिवर्द्धन और परिवर्तन होता रहता है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो विधि और समाज के मध्य जो तारतम्यता होती है वह समाप्त हो जाती है। भारत में मुस्लिम समुदाय सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। १६६१ की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या में मुसलमानों का प्रतिशत ११.६७ है। २००१ की जनगणना का अभी तक आधिकारिक प्रकाशन नहीं हुआ है, लेकिन अनुमानित आकड़ों के अनुसार वर्तमान में मुसलमानों का प्रतिशत १२ है। मुसलमानों की कुल जनसंख्या में ६ करोड़ से अधिक मुस्लिम महिलाएं हैं। मुसलमानों में प्रति १००० पुरुषों के पीछे ६३० महिलाएं है। मुस्लिम समुदाय की अपनी एक वैयक्तिक विधि है, जिसके माध्यम से इस समुदाय में निकाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण आदि से सम्बन्धित मामले निपटाये जाते हैं। इन मान्यताओं में किसी प्रकार के परिवर्तन अथवा सुधार का सुझाव देना मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथियों द्वारा इसे अल्पसंख्यक वर्ग के विरुद्ध बहुसंख्यक वर्ग का आक्रमण माना जाता है और इसे इस्लाम के खतरे के रूप में देखा जाता है। इसका स्पष्ट उदाहरण शाहबानो मामले में देखा जा सकता है। इस सन्दर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को मुस्लिम समुदाय के रूढ़िवादी तत्वों ने इसे मुस्लिम वैयक्तिक कानून में हस्तक्षेप माना और इसका विरोध किया। परन्तु मुस्लिम समुदाय के ही प्रगतिवादी तबके ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का समर्थन किया। परन्तु सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय लागू नहीं हो सका। इसके स्थान पर १६८६ का मुस्लिम महिला (विवाह-विच्छेद पर अधिकारों का संरक्षण) विधेयक पारित हुआ। प्रस्तुत पुस्तक का उद्देश्य इन विभिन्न विचारों की गूढ़ समीक्षा करना है। मुख्यतः यह विवेचित करना है कि मुस्लिम वैयक्तिक कानून भारतीय मुस्लिम महिलाओं के विकास में किस प्रकार का योगदान करती है एवं आधुनिक सामाजिक परिस्थितियों के सन्दर्भ में मुस्लिम वैयक्तिक विधि के मुख्य प्रावधानों की प्रासंगिकता कहाँ तक है और किन कमियों के कारण मुस्लिम महिलाओं का विकास अन्य समुदाय की महिलाओं के समान नहीं हो सका।

 

लेखक परिचय

 

डॉ० हरेराम सिंह जन्म 01 अगस्त, 1973 (बलिया, उ.प्र.) शिक्षा एम.ए. पी-एच. डी. (राजनीतिविज्ञान) बी.एच.यू.. यू.जी.सी. नेट सम्प्रति अध्यक्ष एवं रीडर, राजनीति विज्ञान विभाग देवेन्द्र पी.जी. कालेज बेलथरा रोड़, बलिया, उ.प्र. अनुभव-पिछले 11 वर्षों से राजनीति विज्ञान विभाग में अध्ययन-अध्यापन। शोध छात्रों का निर्देशन । 10 शोध-पत्र राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित। दो अन्य पुस्तके प्रकाशाधीन 1) पाश्चात्प राजनीति विचारों का इतिहास (प्लेटो से लेकर बर्क तक) 2) अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति

 

पुस्तक परिचय

 

पुस्तक में मुस्लिम महिलाओं की सामाजिक आर्थिक, राजनीतिक अधिकारों का आकलन किया गया है। इसके लिए भारत में इस्लाम का आगमन, मुगलकाल तथा मुस्लिम व्यैक्तिक कानून के अस्तित्व से सम्बंधित प्रावधानों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए मुस्लिम महिलाओं की ऐतिहासिक भूमिकाओं का विवरण दिया गया है। पुस्तक में भारतीय सन्दर्भ में मुस्लिम महिलाओं की अधिकारिक स्थिति का आकलन किया गया है। यह देखने का प्रयास किया गया है कि जो व्यवस्थाएं कुरान, हदीस, शरिअत में दी गई हैं, क्या उनका वास्तविक लाभ मुस्लिम महिलाओं को प्राप्त है, या उनको इन लाभों से वश्चित रखा गया है। भारत में मुस्लिम वर्ग सबसे बड़ा अल्पसंख्यक वर्ग है जिसमें लगभग 10 करोड़ से ऊपर महिलाएं हैं। इनकी स्थिति भारतीय समाज की दलित महिलाओं से भी नीचे की है। मुस्लिम महिलाएं विकास के किसी भी पैमाने, जैसे आर्थिक विकास, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता, सांस्कृतिक विकास, व्यक्तिगत पहचान तथा स्वतन्त्रता का उपभोग में नहीं आती है। प्रस्तुत पुस्तक में मुस्लिम महिलाओं के विकास को प्रभावित करने वाले सम्पूर्ण उत्तरदारी कारकों की समीक्षा की गयी है। इसमें इस्लामिक और गैर इस्लामिक दोनों कारकों का विवरण प्रस्तुत है। मुस्लिम महिलाओं के कल्याण हेतु सरकारी एवं गैर सरकारी प्रयत्नों, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एवं सामाजिक कल्याण बोर्ड के रिपोटों का भी मूल्यांकन किया गया है।

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