लेखक परिचय
डॉ. ध्रुवजी पाण्डेय मूलतः ग्राम व पोस्ट कैथी, (मारकण्डेय महादेव) वाराणसी के रहने वाले है। आप मीरजापुर शहर में स्थित जी. डी. बिनानी पी. जी. कालेज में प्रोफेसर राजनीति विज्ञान के रुप में 1991 से आजावधि तक सेवारत है। आप बचपन से ही जिज्ञासु प्रवृति के साधक रहे है। आप सन्तो एवं आध्यात्मिक चेतना से गहरे रुप में जुड़े है। आपके पूज्य गुरुदेव स्वामी सुदर्शन दास जी महाराज (खप्पर बाबा) रहे है। आपने इसके पूर्व "भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन एवं भारत का संविधान" नामक पुस्तक भी लिखा है। आपकी राजनीति विज्ञान विषय से सम्बन्धित पुस्तक "भारत में राजनीतिक प्रक्रिया" शोध प्रकाशित होने जा रही है। लेखक राजनीति विज्ञान पर भी विशेष पकड़ रखते है। आपकी पत्नी डॉ. सुनीता पाण्डेय संस्कृत व्याकरण की विद्वान है। डॉ. सुनीता पाण्डेय सुन्दर-मुन्दर जायसवाल नगर पालिका बालिका इन्टर कालेज मीरजापुर की प्रधानाचार्य भी है। आपकी एक अग्रेंजी भाषा में लिखी जा रही पुस्तक "The Science of Consxiusnese and Maharshi Arvindo" प्रकाशानाधीन है।
पुस्तक परिचय
वैदिक साहित्य के अध्ययन से हमें ज्ञात होता है कि भारतीय चिन्तकों एवं दर्शनिकों की आध्यात्मिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में विश्व को महान देन है। वास्तव में, वैदिक काल और महाकाव्यों के काल का राजनीतिक इतिहास निश्चित एवं क्रमबद्ध रूप में उपलब्ध नहीं है। तीसरी शताब्दी ई.पू. से पहले राजशास्त्र पर कोई ग्रन्थ विशेष नहीं लिखा गया था। अतः हमें प्राचीन भारत की शासन पद्धति के बारे में जो कुछ भी जानकारी प्राप्त हुई है वह प्राचीन साहित्य तथा वेदों, ब्राह्मणों, धर्मसूत्रों, धर्मशास्त्रों, उपनिषदों, पुराणों, महाकाव्यों, जैन ग्रन्थों तथा बौद्ध जातकों आदि से मिली है। इनके अतिरिक्त प्राचीन भारत की शासन पद्धति पर लिखे गये ग्रन्थ जैसे-कौटिल्य का अर्थशास्त्र, कामन्दकीय नीतिशास्त्र, शुक्र नीति आदि विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। हिन्दू काल के राजनीतिक इतिहास पर लिखे गये अनेक ग्रंथों, ग्रीक लेखकों के वर्णनों आदि से भी हिन्दू राज्यों और उनकी शासन पद्धतियों के विषय में काफी जानकारी प्राप्त होती है। संस्कृत, साहित्य में लिखे गये अनेक ग्रंथों, जैसे-पाणिनि के 'व्याकरण', कालिदास के 'रघुवंश', विशादत्त के 'मुद्राराक्षस' आदि में भी प्राचीन भारतीय शासन पद्धति के बारे में कुछ सूचना मिलती है। इस प्रकार स्पष्ट है कि प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिन्तन के अध्ययन हेतु जानकारी प्राप्त करने का सबसे महत्वपुर्ण स्रोत प्राचीन साहित्य है, जिसे कई भागों एवं श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। डॉ. जायसवाल के अनुसार हमें इस विषय का ज्ञान कराने वाले साधन हिन्दू साहित्य के विस्तृत क्षेत्र में मिलते हैं। वैदिक, संस्कृत तथा प्राकृत ग्रन्थों और इस देश के शिलालेखों तथा सिक्कों में रक्षित लेखों से हमें इस विषय की बहुत सी बातें ज्ञात होती हैं। इस समय हमें हिन्दू राजनीति शास्त्र के कुछ मूल ग्रन्थ भी उपलब्ध हैं। ये थोड़े से ग्रन्थ उस विशाल ग्रन्थ-भण्डार के अवशेष मात्र हैं, जिन्हें समय-समय पर हिन्दू भारत के अनेकानेक राजनीतिज्ञों और शासकों ने प्रस्तुत किया था।
Hindu (हिंदू धर्म) (13570)
Tantra (तन्त्र) (1008)
Vedas (वेद) (730)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2086)
Chaukhamba | चौखंबा (3186)
Jyotish (ज्योतिष) (1557)
Yoga (योग) (1161)
Ramayana (रामायण) (1337)
Gita Press (गीता प्रेस) (724)
Sahitya (साहित्य) (24675)
History (इतिहास) (8996)
Philosophy (दर्शन) (3626)
Santvani (सन्त वाणी) (2624)
Vedanta (वेदांत) (116)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist