क्या आप आज ही ऐसी याला पर जाना चाहेंगे, जैसी वास्को दि गामा ने 500 साल से भी पहले पुर्तगाल से भारत आने पर की थी? क्या हैलोवीन की एक रात आपको भूतों से डरना अच्छा लगेगा? कल्पना कीजिए कि एक्टिंग को लेकर आपकी चाहत इस कदर है कि आप पड़ोस के एक नाटक में अजीबो-गरीब भूमिका निभाने तक के लिए तैयार हो जाते हैं। क्या हो कि आप मैम से वाशरूम जाने की अनुमति माँगें और पॉटी की वजह से स्कूल में पाचन-तंत्र पर जीवंत चर्चा शुरू हो जाए? और सबसे बढ़कर क्या होगा यदि आप जल्दी मसल्स बनाने के लिए किसी अजीब-सी आदत के पीछे पड़ जाएँ, भले ही आप एक छड़ी की तरह दुबले-पतले हो?
चंपक सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ । जीवन के रोमांच का जश्न मनाती हैं-अतीत में नहीं, भविष्य में नहीं, बल्कि 'आज'।
1969 में शुरू हुई चंपक भारत में बच्चों की सबसे ज़्यादा बिकने वाली पत्निका है। 8 भाषाओं में प्रकाशित और 6 मिलियन से ज़्यादा बच्चों तक पहुँचने वाली यह पत्रिका ज्यादातर भारतीयों की बचपन की यादों का एक अभिन्न हिस्सा रही हैं। चंपक की कहानियाँ खूबसूरती से चित्रित की गई हैं। ये रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को बढ़ाती हैं, पढ़ने के कौशल को निखारती हैं और सकारात्मक आत्म-सम्मान लाती हैं। अपनी कहानियों के जरिये चंपक बच्चों को दूसरों के साथ सम्मान, दया और संवेदनशीलता से पेश आने, संज्ञानात्मक और तर्क-कौशल विकसित करने और बच्चों के रोजमर्रा के जीवन के लिए जरूरी हास्य लाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
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