भूमिका
इस पुस्तक में दमा रोग के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डालने की चेष्टा की गयी है। एलर्जी अथवा किसी पदार्थ के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता को दमा रोग का प्रमुख कारण माना जाता है लेकिन एलर्जी के अलावा मौसम में परिवर्तन तथा व्यक्ति के अंदर आया हुआ भावात्मक बदलाव भी दमा या अस्थमा रोग का गौण कारण माना जाता है। दमा रोग के इलाज के लिए यौं तो अब तक कई प्रकार की दवाओं या औषधियों का आविष्कार हो चुका है और दमा रोगी डॉक्टर के परामर्श से इन औषधियों का नियमित सेवन करके स्वास्थ्य लाभ पाता है लेकिन दमा का इससे भी ज्यादा बेहतर इलाज ऐसे पदार्थों, मौसम और माहौल से बचना है, जिसमें दमा रोग पैदा करने वाले कीटाणु पैदा होते हैं। असल में अपना बचाव ही दमा रोग का सबसे बेहतर इलाज है। ऐसा देखा गया है कि युवकों एवं प्रौढ़ व्यक्तियों के अलावा छोटी और बड़ी उम्र के बच्चे भी दमा रोग का शिकार हो जाते हैं। बड़ी उम्र के बच्चों में तो दमा रोग के लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं लेकिन छोटी उम्र के बच्चों में अस्थमा के लक्षणों को खोज पाना मुश्किल होता है। निरंतर बदलता हुआ भौगोलिक एवं सामाजिक परिवेश, बढ़ता हुआ प्रदूषण और खानपान में सतर्कता न बरतना ये सभी कारण दमा रोग की उत्पत्ति के मूल हैं। अतः दमा रोग से बचने के लिए हमें इन सब पहलुओं पर ध्यान देना होगा। जहाँ तक हो सके, हम एलर्जिक पदार्थों से बचे रहें और यदि हमको दमा रोग हो जाए तो हम घबराने के बजाय अस्पताल या डॉक्टर के पास जाएँ। डॉक्टर हमारे लिए जो औषधियाँ लिखे, उन्हें डॉक्टर के बताए अनुसार ही नियमित रूप से लेते रहें। इसी से दमा या अस्थमा रोग पर काबू पाया जा सकता है।
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