प्रस्तुत काव्य संग्रह की लगभग सभी रचनाएँ सोच एवं ज़िम्मेदारी की भावना से जुड़ी हुई हैं। अनुभवों का ठोस संसार लिए, मानवीय सरोकारों के साथ युवा कवयित्री वर्तिका अग्रवाल की कविताएँ बेहद आत्मीय लगती हैं। उनका भावबोध व रचना-रूप पाठकों को आतंकित नहीं करता न ही कोरे कल्पना लोक की सैर कराता है। वे सत्य के धरातल पर कविता के सार्थक शब्दों और भावनाओं को सन्तुलन के साथ पेश करती हैं और सूक्ष्म रूप में बड़ी बात कह जाती हैं।
विभिन्न विषयों पर रुचिपूर्वक लिखी गयी कविताएँ
सीधे-सादे सरल शब्दों में आम इन्सान की चिन्ता और सरोकारों से जुड़ी हुई हैं। व्यक्ति, समाज, सामाजिक विडंबनाएं और व्यथाओं की अभिव्यक्ति के साथ साथ इनमें आप मानवीय चेतना, चिंतन और दैनिक जीवन से जुड़े संस्मरण, वर्तमान जीवन का सच, व्यवस्था, सामाजिक यथार्थ एवं आम व्यक्ति विशेषकर महिलाओं का स्वर मुखरित होते देखेंगे।
संक्षिप्त में यदि कहा जाये तो प्रस्तुत संग्रह की समस्त रचनाएं मनुष्य की समग्र पीड़ा की अभिव्यक्ति है तथा नारी जीवन के दुख, दर्द, उत्साह, निराशा, आशा स्वाभिमान, आत्मसम्मान और विवेक का दर्शन है।
आशा है पाठक वृन्द माण्डवी प्रकाशन की इस भेंट का स्वागत करेंगे और हमेशा की भांति इस संग्रह पर भी अपनी निष्पक्ष प्रतिक्रियाओं से हमें अवश्य अवगत करायेंगे, यह विश्वास है।
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