लेखक परिचय
विनायक त्रिपाठी विनायक त्रिपाठी प्रसिद्ध गांधीवादी लेखक तथा कार्यकर्ता हैं। छात्र-जीवन से ही सामाजिक कार्यों में अभिरुचि रखने वाले श्री विनायक, एक कुशल वक्ता और प्रखर चिंतक हैं। तरुण अवस्था में ही विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले श्री विनायक, वर्तमान में 'सन-को-राइजिंग समिति' और 'कौटिल्य फाउण्डेशन' के जरिए समाज के पुनर्निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। सामाजिक, आर्थिक विषयों पर श्री विनायक त्रिपाठी की चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। सम्मान : राज्यपाल उ. प्र. पुरस्कार, राष्ट्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), हिण्डन ग्रामीण बैंक, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक, सन को-राइजिंग समिति द्वारा प्रशस्ति-पत्र ।
पुस्तक परिचय
हमारे समाज में अतिप्राचीन काल से ही पर्यावरण के महत्त्व को महसूस कर लिया गया था इसलिए हमारे वैदिक ग्रंथों तक में पर्यावरण की संरक्षा हेतु विधि-विधानों का जिक्र है। महान दार्शनिक अरस्तु ने कहा है कि- "मानव जब पूर्णता को प्राप्त करता है तो वह सभी प्राणियों में श्रेष्ठतम होता है लेकिन यदि वह विधि और न्याय से अलग हो जाए तो वह सभी प्राणियों में सर्वाधिक निकृष्टतम होता है।" बैरी कामनर नामक विद्वान ने भी कहा है कि पारिस्थितिकी का नियम है कि प्रकृति सबसे अच्छी जानकार और सबसे बड़ी विशेषज्ञ है इसलिए प्राकृतिक व्यवस्था को प्रकृति के ऊपर ही छोड़ देना चाहिए ताकि वह अपनी बीमारियों को दूर कर सके। जब हम प्रकृति की व्यवस्था में हस्तक्षेप करते हैं तो पर्यावरणीय समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इस अवस्था में पर्यावरण-विधि के द्वारा मानव को पर्यावरण का पाठ पढ़ाया जाता है। प्रकृति ने हमें कई उपहार दिए हैं ताकि हम सुगमतापूर्वक अपना जीवन निर्वाह करें लेकिन हम अपने स्वार्थवश प्राकृतिक संसाधनों का अत्याधिक दोहन कर रहे हैं जिस कारण पर्यावरण असंतुलित हो गया है। हम हर तरह से प्रकृति पर निर्भर हैं और हमें सब-कुछ प्रकृति से ही मिलता है। जब हम प्रकृति से अनावश्यक छेड़छाड़ करते हैं तो प्रकृति अपने बचाव में कुछ उपाय अपनाती है जिनका प्रतिकूल असर हम पर पड़ता है। इसी कारण प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी है लेकिन हम स्वार्थवश अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह नहीं कर पाते हैं।
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