राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत अपने प्रकाशन कार्य के अंतर्गत विभिन्न भाषाओं में देश का विशिष्ट साहित्य पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करता रहा है। इस कड़ी में अब न्यास संस्कृत भाषा में भी प्रकाशन प्रारम्भ कर रहा है।
'संस्कृत भाषा सर्व भाषाणाम् जननी' का सदेश पूर्वकाल से बहुश्रुत रहा है। संस्कृत न केवल भाषा है, बल्कि भारत की वैश्विक चेतना की उद्बोधक संस्कृति, दर्शन, जीवनदृष्टि की अभिव्यक्ति इसके माध्यम से विस्तार पाती रही है। विश्वभर की समस्त प्राचीन भाषाओं में संस्कृत का सर्वप्रथम व उच्च स्थान है। विश्व साहित्य की पहली पुस्तक माना गया ऋग्वेद इसी भाषा का देदीप्यमान रत्न है। अतः इस भाषा में न्यास का प्रकाशन किया जाना देश व देश के बाहर भी पुस्तक प्रमियों को भारत की श्रेष्ठ ज्ञान परंपरा से जोड़ने का महत् उपक्रम ही माना जाएगा।
हमने संस्कृत प्रकाशन की दिशा में विधिवत् ध्यान देने हेतु एक योजना तैयार की। इसकी शुरुआत हमने संस्कृत भाषा-साहित्य संबंधी संगोष्ठियों से की जिसे प्रायः हमारे पुस्तक मेलों के कार्यक्रमों में जोड़ा गया। इसी क्रम में जाने-माने अर्थशास्त्री, पर्यावरणविद्, संस्कृत-विद्वान और गांधीचरित्र के तज्ञ डा. मंगेश वेंकटेश नाडकर्णी की महात्मा गांधी के विषय में पुस्तक 'गान्धि-तत्त्व-शतकम्' का प्रकाशन किया गया है। इस पुस्तक में महात्मा गांधी के जीवनबोध और कृतित्व का सार 108 श्लोकों में वर्णित है। प्रत्येक श्लोक का अंग्रेजी पाठ एवं भावार्थ भी दिया गया है। महात्मा गांधी का जीवन-दर्शन सार्वकालिक लोकप्रिय एवं सदा जिज्ञासा का विषय रहा है।
मुझे विश्वास है कि हमारी संस्कृत प्रकाशन की यह पहल देश में संस्कृत के उन्नयन का एक नया पथ प्रशस्त करेगी क्योंकि संस्कृत का उन्नयन ही संस्कृति का उन्नयन है।
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