प्राक्कथन
कृषि विकास का स्तर ही देश की उन्नति का सूचकांक एवं आर्थिक संवृद्धि का प्रतीक होता है। मानव सभ्यता के विकास के प्रारंभ से ही कृषि लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन रहा है। आज भी कृषि विश्व की अधिकांश जनसंख्या का प्रमुख व्यवसाय तथा आय का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। अधिकांश विकासशील देशों में प्रधान व्यवसाय होने के कारण कृषि राष्ट्रीय आय का सबसे बड़ा आधार रोजगार एवं जीवन यापन का प्रमुख साधन औद्योगिक विकास, वाणिज्य एवं विदेशी व्यापार का स्रोत है। कृषि इन देशो की अर्थव्यवस्था की रीढ़ तथा विकास की कुंजी है। कृषि विकास के सोपान पर चढ़कर ही विश्व के विकसित राष्ट्र आज आर्थिक विकास के शिखर पर पहुंच सके हैं। इतिहास इस बात का गवाह है, कि इंग्लैंड, जर्मनी, रूस तथा जापान आदि देशों के विकास में कृषि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा तीव्र औद्योगिकीकरण के लिए सुदृढ़ आधार प्रदान किया। यही कारण है कि प्राचीन काल से लेकर आज तक के विचारकों ने कृषि विकास पर पर्याप्त बल दिया है। भारत देश कृषि प्रधान देश है, किसान व कृषि देश के प्राण के सामान है। भारत में कृषि केवल एक आर्थिक क्रिया नहीं है, बल्कि उसके निवासियों की एक जीवन शैली भी है। यह कई जातियों, धर्मों, भाषाओं के लोगों को एक सूत्र में बांधती है। हमारे देश में कृषि अर्थव्यवस्था का आधार स्तंभ है। देश के आर्थिक विकास में कृषि विकास की अहम भूमिका रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था हो या भारतीय जनजीवन सभी कृषि के इर्द-गिर्द ही चक्कर काटते नजर आते हैं। महात्मा गांधी भी कृषि को "भारत की आत्मा" मानते थे। वर्ष 1958 में कृषि के महत्व को रेखांकित करते हुए कृषि प्रशासनिक समिति ने कहा था "कृषि ही सभी उद्योगों की जननी है" और मनुष्य को जीवन प्रदान करने वाली है। भारत की पहचान एक कृषि प्रधान देश के रूप में है और देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी अभी भी गांवों में बसती है। जीविका का मुख्य साधन कृषि, पशुपालन और कृषि से जुड़े अन्य व्यवसाय है। हमारी अर्थव्यवस्था के निर्धारण में आज भी कृषि महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 29 मई 2020 को पेश किए गए राष्ट्रीय आय से संबंधित आंकड़ों के आधार पर भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान 17.8 प्रतिशत रहा है। हालांकि औद्योगीकरण एवं अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों के बढ़ने के कारण सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान कम हुआ है। इसके बावजूद देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। वैसे तो भारतीय अर्थव्यवस्था अति प्राचीन काल से ही कृषि आधारित रही है। कृषि और पशुपालन हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। भारत की ग्रामीण जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा रोजगार के लिए कृषि पर निर्भर है। आज भी भारत में कृषि कुल श्रमशक्ति के 5 प्रतिशत को रोजगार उपलब्ध करवाती है। अधिकतम उद्योग ऐसे हैं, जो सीधे-सीधे कृषि पर आधारित है और उन्हें कच्चे माल की आपूर्ति कृषि क्षेत्र से ही होती है जैसे वनस्पति एवं बागान उद्योग, चीनी उद्योग एवं डेयरी उद्योग आदि ऐसे उद्योग जिनका सीधा संबंध कृषि है इस प्रकार अनेक उद्योग ऐसे हैं जिनकी निर्भरता परोक्ष रूप से कृषि पर बनी हुई है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार क्षेत्र में भी भारतीय कृषि की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। वर्ष 2019-20 में कृषि क्षेत्र की आर्थिक समीक्षा के अनुसार देश में 296. 65 मिलियन टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ। आज भारत विभिन्न देशों को प्रचुर मात्रा में मसाले, आयल, बीज, चाय, तंबाकू, मेवे आदि निर्यात करता है, जिसका आधार कृषि ही है। हम कृषि से बनी वस्तुओं के भी बड़े निर्यातक है। अच्छे स्तर एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि अच्छी बनी हुई है। कृषि उत्पादों के निर्यात से हमें विदेशी मुद्रा भी मिलती है। वर्ष 2019 में कृषि संबंधित वस्तुओं का निर्यात लगभग 252 हजार करोड़ का हुआ था कृषि निर्यात से भारतीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है। पिछले कुछ वर्षों में कृषि, पशुपालन, दुग्ध, फल, सब्जियां और विभिन्न प्रकार के रेशेदार फसलों के उत्पादन में भारत ने आश्चर्यजनक प्रगति की है और सब्जी तथा खाद्यान्नों में विशेषकर गेहूं धान उत्पादन में तो यह विश्व में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। भारत में कृषि विकास का सही प्रारंभ वर्ष 1960-70 के दशक में हरित क्रांति के रूप में प्रारंभ हुआ था।
लेखक परिचय
डॉ. वीरेन्द्र कुमार अहिरवार का जन्म 1973 में निवाड़ी, जिला-टीकमगढ़, मध्यप्रदेश में हुआ, आपने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा से स्नातक एवं स्नात्कोत्तर की उपाधि प्राप्त की साथ ही बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल से बी. एड. एवं एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की एवं जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर से पी-एच. डी. की उपाधि प्राप्त की आपको कृषि विकास के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है। आप 2010 में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से सहायक प्राध्यापक (भूगोल) के पद पर चयनित होकर विभिन्न शासकीय महाविद्यालयो में सेवारत रहे। आप शासकीय महाविद्यालय लहार जिला-भिण्ड में प्राचार्य के पद पर रहे। आपने दो पुस्तकों का संपादन कार्य भी किया, आपके कई शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ में प्रकाशित हो चुके, वर्तमान में आप प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय स्नात्कोत्तर महाविद्यालय निवाडी में भूगोल विभाग मे विभागाध्यक्ष के रुप में कार्यरत है।
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