हिन्दी साहित्य अकादमी की स्थापना हुई तब से लेकर आज तक अकादमी ने कई साहित्यिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। अकादमी की बहुत सी प्रवृत्तियों में पुस्तकप्रकाशन काफी महत्त्वपूर्ण प्रवृत्ति रही है। हिन्दी अकादमी ने अलग अलग स्वरूपों में कई पुस्तकें प्रकाशित की हैं।
श्री विनोद भट्ट गुजराती के जानेमाने हास्य-व्यंग्यकार हैं। उनके हास्य-व्यंग की तुलना स्व. श्री ज्योतीन्द्र दवे के साथ कर सकते हैं। इसके पहले भी उनकी दो पुस्तकें 'विनोदनामा' और 'विनोदविमर्श' के हिन्दी अनुवाद अकादमी ने प्रकाशित किये हैं।
गुजराती में उनके द्वारा रचित 'हास्योपचार' पुस्तक का अनुवाद हिन्दी में करवाकर हिन्दी साहित्य अकादमी ने इसे गुजराती भाषा की सीमाओं से दूर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के अपने उद्देश्य की परंपरा जारी रखी है। इसके साथ ही हिन्दी और गुजराती तथा अन्य भारतीय भाषाओं के बीच आदान-प्रदान की भावना को सुदृढ बनाया है। इसके साथ ही गुजराती और हिन्दी भाषा के रचनारत नवनीत ठक्कर ने इस पुस्तक के निरामय अनुवाद का दायित्व उठाकर हिन्दी साहित्य अकादमी, गुजरात के अपने उद्देश्य की पूर्ति में सहयोग दिया। दोनों साहित्यकारों के प्रति अकादमी की ओर से आभार प्रदर्शित करता हूँ।
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