यह किताब, ब्रह्मर्षि पत्री जी द्वारा कोरोना काल में दिए गए सौ दिनों के संदेशों का संच है। लॉकडाउन की वजह से मनुष्य को हर स्तर पर कई नई परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। मानसिक स्तर पर संतुलित कैसे रहें? सभी लोग यह तथा जीवन के अनेक आध्यातिक प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ने की कोशिश में लगे हैं। जीवन को ऐसे समय में किस दृष्टी से देखें पत्री जी हमें यह अपने आत्मज्ञान द्वारा अत्यंत सरलता से समझाते हैं। इस ज्ञान से हमें अपनी अज्ञानता का आभास होगा। सत्य का मार्ग स्वीकार करने में यह ज्ञान सहायक है। आप भी इसे पढ़कर अपने आत्मज्ञान को बढ़ाइए और अपनी आत्मा की यात्रा को सुगम बनाइये। यह ज्ञान आपको केवल कोरोना काल में ही नहीं, किसी भी कठिन परिस्थिति में मदद करेगा। स्वयं की दृष्टि से कैसे स्वयं की सृष्टि बदल जाती है, यह आपको गहराई से समझ आएगा और आप ऐसे अनेक लोगों की सहायता कर पाएँगे जो आत्मज्ञान के पथ पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
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