लेखक परिचय
डॉ. जय प्रकाश पाण्डेय हिन्दी विभागाध्यक्ष, संत जेवियर्स कॉलेज, रांची। विशेष उपाधियाँ: विद्या वाचस्पति (1991), साहित्य श्री (1994), विद्या सागर (2001), जय शंकर प्रसाद पुरस्कार, अखिल भारतीय विद्वत परिषद् वाराणसी से (2011)1 विशेष सम्मान अटल शिक्षा रत्न सम्मान (2023), हिन्दी सेवी सम्मान (2024)। अनेक पुस्तकों एवं पत्र पत्रिकाओं में अस्सी से अधिक समीक्षात्मक एवं शोधपरक लेख, कविताएँ, लघुकथाएं एवं नाटक प्रकाशित । दूरदर्शन एवं आकाशवाणी केन्द्र, राँची से विविध रचनाएं प्रसारित। अनेक विचारगोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध-पत्रों की प्रस्तुति
पुस्तक परिचय
महाकवि जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रवर्तक ही नहीं बल्कि उसकी प्रोढ़ता, गम्भीरता, शालीनता आदि के परम पोषक कवि भी रहे हैं। -उनकी कविताओं में प्रकृति के सचेतन रूप के साथ-साथ मानव के लौकिक-पारलौकिक जीवन की जैसी रमणीक झांकी अंकित है, वैसी किसी अन्य कवि की काव्य-रचनाओं में दृष्टिगोचर नहीं होती। प्रसाद के काव्य में समरसता का अमर संदेश है, जिसमें जीवन को परिपूर्णता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने अपनी काव्य-रचनाओं में नारी के विभिन्न रूपों को रेखांकित किया है। उनके काव्य में राष्ट्रीयता की भावना प्रखर रूप से उजागर हुई है। भावों की तीव्रता, अनुभूतियों की सूक्ष्मता और विचारों की गतिशीलता की त्रिवेणी को प्रवाहित करने वाली कल्पना की गहरी पैठ महाकवि जयशंकर प्रसाद के काव्य की अन्यतम विशेषता रही है। उन्होंने अपनी भावनाओं और अनुभूतियों को प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत किया है।
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