पुराण भारतीय इतिहास-गंगा की वह प्रवहमान धारा हैं, जो चतुर्वेद रूपी गोमुख से निःसृत है। साहित्येतिहासकारों ने भारतीय साहित्य के अंतर्गत कथा-विधा का उद्गम वैदिक काल से ही माना है। 'ऋग्वेद' के दशम मण्डल में अनेक आख्यान समाहित हैं। पुराण, उपनिषद्, रामायण, महाभारत आदि परवर्ती संस्कृत साहित्य में यत्र-तत्र इन्हीं पुरा-आख्यानों का विकसित रूप दृष्टिगत होता है। पुरा-इतिहासकारों ने समय-समय पर जो कुछ सिरजा, वह वाचिक परम्परा में पोषित हुआ और अन्ततः लिपिबद्ध हो गया।
पुराणों में किसी भी समाज के जीवंत रहने के लिए आवश्यक प्रणाली, यथा आचार-विचार, मर्यादित व्यवस्था, लोक व्यवहार, सामाजिक सुगठन आदि; पर व्यापक विमर्श है। इनके रचनाकारों ने अपनी बात स्पष्ट करने, उनका प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए इनमें स्थान-स्थान पर अनेक कथा-प्रसंगों को पिरोया है। ये सभी आख्यान न केवल तत्कालीन समाज का दर्पण हैं, बल्कि गंभीर अध्येता और सामान्य पाठक, दोनों के लिए समान उपयोगी हैं।
इन पुरा-आख्यानों में चरित्रों के रूप में देव, दानव, ऋषि, मुनि, नाग, किनर, गंधर्व, अप्सराएं, चक्रवर्ती सम्राट, महाराजा, राजा और सामान्य नागरिक आदि मनुष्य तो हैं ही; इनमें पशु, पक्षी, नदियां, पहाड़, वृक्ष आदि भी ऐसे मानवीय और उदात्त स्वरूप में सामने आते हैं कि पाठक विस्मय-विमुग्ध हो जाता है। खल-चरित्रों की भी इनमें कोई सीमा नहीं है। कुछ जातियां, जैसे असुर, स्वभाव से ही दुष्ट वर्णित हैं, तो देवगण भी केवल सत् के भण्डार नहीं हैं। उनके खल-आचरण को भी कहीं सप्रयास ढंका नहीं गया है, बल्कि घटनाओं को यथासंभव निरपेक्षता से वर्णित किया गया है।
इसे तत्कालीन रचनाकारों की अद्भुत कल्पना शक्ति कहें अथवा तत्कालीन उन्नत समाज का प्रमाण कि इनमें वायु में विचरण करने वाले विमान हैं, तो सेतु बनाने की तकनीक भी। मनुष्य पशु-पक्षियों से बतियाता भी है, तो वे एक-दूसरे की सहायता भी करते हैं। तत्कालीन विध्वंसक और लक्ष्य का पीछा करने वाले अनेक अस्त्र-शस्त्रों में आज के अनेक विकसित हथियारों का साम्य भी सहज ही देखा जा सकता है। पल भर में अदृश्य और प्रकट हो जाना तथा मन की गति से यात्रा इन कथाओं के ऐसे प्रसंग हैं, जिनका उत्तर आज के विज्ञान के पास भी नहीं है।
इसके बावजूद इन पुरा-आख्यानों में महज कल्पना की ऊंची उड़ान नहीं है, बल्कि मनुष्य के दैनंदिन जीवन में उपयोगी अनेक ऐसे सूत्र भी सहजता से गुंथे हुए हैं, जो आचरण में उतारे जाने पर किसी को भी मनुष्य-श्रेष्ठ बनाने में सक्षम हैं। मुझे उम्मीद है कि पुरा-कथाओं का यह संकलन पाठकों का न सिर्फ मनोरंजन करेगा, बल्कि अपनी संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने और उसे संस्कारवान् बनाने में भी मदद करेगा।
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