यह कहावतें ग्राम्य-कथन या ग्राम्य-साहित्य नहीं है। यह लोक जीवन का नीतिशास्त्र है। यह संसार के नीति साहित्य का विशिष्ट अध्याय है। विश्व-याङ्ङ्गमय में जिन सूत्रों को प्रेरक, अनुकरणीय तथा उद्धरणीय माना गया है, उनका सार तत्व प्रकारान्तर से इनमें मिल जायेगा। समान अनुभव से प्रसूत इन कहावतों के अधिकांश सूत्र सार्वभौमिक सत्य होते हैं। कुछ सूत्र स्थानीय या आंचलिक वैशिष्ट्य पर प्रकाश डालते हैं।
यह जनमानस के लिये आलोक स्तम्भ हैं। इनके प्रकाश में हम जीवन के कठिन क्षणों में, लोकानुभव से मार्गदर्शन प्राप्त कर सफलता का मार्ग ढूँढते हैं। यह वह चिनगारी हैं- जिसमें अनन्त ऊष्मा है, जो जनमानस को मति, गति और शक्ति प्रदान करती हैं। यह नदी के अनगढ़ शिलाखण्डों की तरह हैं जो युग युगान्तर काल के प्रवाह में थपेड़े खा खाकर शालिग्राम वन कर शिवत्व को प्राप्त करते हैं। इनमें लोक का वैडौलपन हैं, छन्दों की शास्त्रीयता नहीं है, तथापि इनमें काव्य का सा सहज प्रवाह है, वे सहज स्मरणीय हैं।
यह कहावतें केवल विद्वानों के शोध-प्रबंधों तथा पुस्तकालयों की ही शोभा नहीं है, वे लोकमानस द्वारा स्वीकृत तथा जनता के कंठ में सदैव विराजमान जीवित-संदर्भ हैं।
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