लेखक परिचय
शिक्षा-एम.एस.सी. (प्राणी विज्ञान), पक्षी विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत्त मंडल वन अधिकारी। वरिष्ठ वन अधिकारी के तौर पर 1983 से 2017 तक राजस्थान की विभिन्न शहरों में गहन कार्य। जैसलमेर के रेगिस्तान में बतौर वन अधिकारी 25 साल तक कार्य एवं नगरीय विकास एवं पर्यटन संबंधी विषयों से सम्बद्ध रहे। भारतीय वन सेवा के अधिकारियों को नियमित तौर पर 20 वर्षों तक जैसलमेर जुगल किशोर गज्जा नगरीय पर्यटन एवं रेगिस्तान के पुरातन गांवों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करना वरिष्ठ पक्षी विज्ञानी डॉ. सालिम अली के साथ पक्षियों के जीवन आचरण माइग्रेशन एवं दैनिक दिनचर्या पर गहन अध्ययन। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी जो पिछले 150 सालों से भारत में अपनी सेवाएं दे रही हैं उस संस्था में शोधकर्ता के तौर पर अपनी सेवाएं दी एवं विलुप्ति के कगार पर खड़े पक्षी गोडावण पर अध्ययन करने वाली प्रथम टीम के सदस्य जिसमें डॉ. सालिम अली एवं डॉ. असद रफी रहमानी जैसे पक्षी विज्ञानियों के साथ कार्य करने का सौभाग्य मिला। वन सेवा अधिकारी के तौर पर वन्य जीवन रेस्क्यू टीम के मुखिया के रूप में कई बार राजस्थान के अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया जिसकी स्थानी स्तर पर प्रशासन ने भूरी-भूरी प्रशंसा भी की उदाहरण के तौर पर जसवंतपुरा जालोर में सूखा कुआं जो कि 80 फीट गहरा था जिसमें 35 घंटे तक मेहनत कर कुएं में गिरे हुए भालू को सुरक्षित निकाल के उसे जंगल में छोड़ा। अध्ययन काल के दौरान विशेष रूप से कृष्ण मृग एवं काले मुंह के हनुमान लंगूरों पर शोध कार्य एवं गहन अध्ययन ।
पुस्तक परिचय
पुष्करणा ब्राह्मण समुदाय के बारे में अनेक बातें समाज में प्रचलित है लेकिन सत्यता की पुष्टि के लिए दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। श्री जुगल किशोर गज्जा की अनेक वर्षों की शोध के बाद यह पुस्तक बहुत कुछ बातें सारगर्भित एवं तथ्य सहित बताती है। प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठने की परम्परा एवं आध्यात्मिक संत कबीर के ब्रह्म मुहूर्त के प्रयाग के बारे में विस्तार से वर्णन बेहद रोचक है। पुस्तक में पुरातन मंत्रोच्चार एवं त्रिकाल संध्या के बारे में भी विस्तार से बताया गया है जो ब्रह्म मुहूर्त के महत्त्व को दर्शाती है। पुष्करणा ब्राह्मण समुदाय की जातियों के बारे में अत्यन्त गहन एवं सूक्ष्म अध्ययन, आने वाली विचारशील पीढ़ी के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण जानकारी साबित होगा। इस पुस्तक में श्री गज्जा का जातियों के सम्बन्ध में गहन अध्ययन स्पष्ट रूप से नजर आता है। जाति विशेष की परम्परा उत्पत्ति एवं इतिहास दुर्लभ है। आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अत्यन्त आवश्यक दस्तावेज के रूप में यह पुस्तक महत्त्वपूर्ण है। जब हम यह पुस्तक पढ़ते हैं तब लगता है पुष्करणा ब्राह्मण समुदाय कितना विशिष्ट एवं बुद्धिजीवी है, हमारी हर बात रंग एवं विचारों से पूर्ण है। श्री गज्जा प्रख्यात पक्षी विज्ञानी डॉ. सलीम अली के साथ भी कार्य कर चुके हैं तथा वर्तमान में डॉ. असद रफी रहमानी, विश्व के प्रसिद्ध वरिष्ठ पक्षी विज्ञानी है एवं श्री गज्जा ने उनके साथ भी कार्य किया है। पुस्तक में हमारे धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर स्थलों का विस्तृत वर्णन जी.पी.एस. विवरण सहित दर्ज किए गया है। श्री गज्जा की वर्षों की तपस्या का परिणाम यह पुस्तक एक ऐतिहासिक दस्तावेज है।
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