Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > हिन्दी > सत्य की खोज: Quest for Truth
Subscribe to our newsletter and discounts
	सत्य की खोज: Quest for Truth
सत्य की खोज: Quest for Truth
Description

पुस्तक के विषय में

 

सत्य है तो स्वयं के भीतर है। इसलिए किसी और से मांगने से नहीं मिल जाएगा।सत्य की कोई भीख नहीं मिल सकती। सत्य उधार भी नहीं मिल सकता। सत्य कहीं से सीखा भी नहीं जा सकता, क्योंकि जो भी हम सीखते हैं, वह बाहर से सीखते हैं। जो भी हम मांगते हैं, वह बाहर से मांगते हैं। सत्य पढ़ कर भी नहीं जाना जा सकता, क्योंकि जो भी हम पढ़ेंगे, वह बाहर से पढ़ेंगे।

सत्य है हमारे भीतर- न उसे पढ़ना है, न मांगना है, न किसी से सीखना है-उसे खोदना है। उस जमीन को खोदना है, जहां हम खड़े हैं। तो वे खजाने उपलब्ध हो जाएंगे,जो सत्य के खजाने हैं। ओशो

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु:

वास्तविक स्वतंत्रता क्या है

शून्य है द्वार पूर्ण का

क्या जीवन एक सपना है

संयम का अर्थ क्या है

प्रवेश से पूर्व

 

शांति की पगडंडी से आदमी सत्य के शिखरो तक पहुचता है । और शांति की पगडंडी पर वही चल सकते हैं, जिनको जीवन सपना दिखाई पड़ता है । जिन्हे जीवन एक सत्य, एक ठोस सत्य मालम होता है, वे कभी शांति के मार्गो पर नही चल सकते, यह पहली बात ।

इससे ही जुडी हुई दूसरी बात, जिस आदमी को जीवन सपना दिखाई पड़ने लगेगा, उस आदमी का व्यवहार क्या होगा? जिस आदमी को जिंदगी अयथार्थ मालूम होने लगेगी, वह आदमी जीएगा कैसे? उसके जीवन का सूत्र क्या होगा?सपने के साथ हम क्या करते है? सपने को देखते है, और तो कुछ भी नहीं कर सकते है ।

जिस आदमी को पूरी जिंदगी सपना दिखाई पड़ने लगेगी, वह एक द्रष्टा हो जाएगा, वह एक साक्षी हो जाएगा। वह देखेगा और कुछ भी नहीं करेगा जिंदगी जैसी होगी, उसे देखता चला जाएगा ।

सपना है भाव और साक्षी है परिणति सपना है आधार और साक्षी है उस पर उठा हुआ भवन ।

जब कोई आदमी जीवन को सपना जान लेता है तो फिर एक साक्षी रह जाता है, एक द्रष्टा रह जाता है । फिर एक देखने वाले से ज्यादा उसका मूल्य और अर्थ नही होता । फिर वह जीवन में ऐसे जीता है, जैसे एक दर्शक । और जब कोई आदमी दर्शक की भांति जीवन में जीना शुरू कर देता है, तब उसके जीवन में एक क्राति हो जाती है । उस क्राति का नाम ही धार्मिक क्रांति है । वह धर्म की क्राँति शास्त्रों के पढने से नही होती, साक्षी बनने से होती है । वह धर्म की क्राति पिटे-पिटाए खो को कंठस्थ करने से नहीं होती, जीवन में साक्षी के जन्म हो जाने से हो जाती है । और जो आदमी साक्षी की तरह जीने लगता है, वह चढ़ जाता है उन शिखरो पर, जहा सत्य का दर्शन होना निश्चित है।

तो दूसरा सूत्र है साक्षीभाव । जीवन में ऐसे जीना है, जैसे एक दर्शक । जैसे जीवन के बड़े पर्दे पर एक कहानी चल रही है और हम देख रहे है । एक दिन भर के लिए प्रयोग करके देखे और जिंदगी दूसरी हो जाएगी । एक दिन तय कर ले कि सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक इस तरह जीएगे, जैसे एक दर्शक । और जिंदगी को ऐसा देखेंगे, जैसे कहानी एक पर्दे पर चलती हुई । और पहले ही दिन जिंदगी में कुछ नया होना शुरू हो जाएगा ।

आज ही करके देखे, एक छोटा सा प्रयोग करके देखे कि जिंदगी को ऐसे देखेंगे, जैसे बड़े कैनवास पर, एक बड़े पर्दे पर कहानी चलती हो और हम सिर्फ दर्शक होंगे । सिर्फ एक दिन के लिए प्रयोग करके देखे । और उस प्रयोग के बाद आप दुबारा वही आदमी कभी नहीं हो सकेंगे, जो आप थे । उस प्रयोग के बाद आप आदमी ही दूसरे हो जाएंगे ।

साक्षी होने का छोटा सा प्रयोग करके देखे । देखे आज घर जाकर और जब पत्नी गाली देने लगे या पति गर्दन दबाने लगे, तब इस तरह देखे कि जैसे कोई साक्षी देख रहा है । और जब सस्ते पर चलते हुए लोग दिखाई पड़े, दुकाने चलती हुई दिखाई पड़े, दफ्तर की दुनिया हो, तब खयाल रखे, जैसे किसी नाटक में प्रवेश कर गए और चारो तरफ एक नाटक चल रहा है । एक दिन भर इसका स्मरण रख कर देखे और आप कल दूसरे आदमी हो जाएंगे ।

दिन तो बहुत बड़ा है, एक घंटे भी कोई आदमी साक्षी होने का प्रयोग करके नख उसकी जिंदगी में एक मोड़ आ जाएगा, एक टर्निग आ जाएगी । वह आदमी फिर कभी नहीं हो सकेगा, जो एक घंटे पहले था । क्योकि उस एक घंटे में जो उसे दिखाई पड़ेगा, वह हैरान कर देने वाला हो जाएगा । और उस एक घंटे में उसके भीतर जो परिवर्तन होगा, जो ट्रांसफार्मेंशन होगा, जो कीमिया ही बदल जाएगी: वह उसके भीतर चेतना के नये बिदुओं को जन्म दे देगी ।

एक घंटे के लिए ऐसे देखें कि अगर पत्नी गालियां दे रही हें, अगर मालिक गालियां दे रहा है, तो ऐसे देखें कि जैसे आप सिर्फ एक नाटक देख रहे हो । फिर देखे कि क्या होता है न सिवाय हंसने के और कुछ भी नहीं होगा । सिवाय हंसने के और कुछ भी नही होगा! भीतर एक हंसी फैल जाएगी और चित्त एकदम हलका हो जाएगा ।

अनुक्रम

1

परतंत्रता से सत्य की ओर

01

2

भ्रम से सत्य की ओर

19

3

श्रद्धा से सत्य की ओर

39

4

स्वप्न से सत्य की ओर

63

5

शून्य से सत्य की ओर

83

ओशो-एक परिचय

109

ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट

110

ओशो का हिंदी साहित्य

113

अधिक जानकारी के लिए

118

 

 

सत्य की खोज: Quest for Truth

Item Code:
NZA629
Cover:
Paperback
Edition:
2013
ISBN:
9788172612627
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
226
Other Details:
Weight of the Book: 200 gms
Price:
$21.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
	सत्य की खोज: Quest for Truth

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 3137 times since 4th Mar, 2019

पुस्तक के विषय में

 

सत्य है तो स्वयं के भीतर है। इसलिए किसी और से मांगने से नहीं मिल जाएगा।सत्य की कोई भीख नहीं मिल सकती। सत्य उधार भी नहीं मिल सकता। सत्य कहीं से सीखा भी नहीं जा सकता, क्योंकि जो भी हम सीखते हैं, वह बाहर से सीखते हैं। जो भी हम मांगते हैं, वह बाहर से मांगते हैं। सत्य पढ़ कर भी नहीं जाना जा सकता, क्योंकि जो भी हम पढ़ेंगे, वह बाहर से पढ़ेंगे।

सत्य है हमारे भीतर- न उसे पढ़ना है, न मांगना है, न किसी से सीखना है-उसे खोदना है। उस जमीन को खोदना है, जहां हम खड़े हैं। तो वे खजाने उपलब्ध हो जाएंगे,जो सत्य के खजाने हैं। ओशो

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु:

वास्तविक स्वतंत्रता क्या है

शून्य है द्वार पूर्ण का

क्या जीवन एक सपना है

संयम का अर्थ क्या है

प्रवेश से पूर्व

 

शांति की पगडंडी से आदमी सत्य के शिखरो तक पहुचता है । और शांति की पगडंडी पर वही चल सकते हैं, जिनको जीवन सपना दिखाई पड़ता है । जिन्हे जीवन एक सत्य, एक ठोस सत्य मालम होता है, वे कभी शांति के मार्गो पर नही चल सकते, यह पहली बात ।

इससे ही जुडी हुई दूसरी बात, जिस आदमी को जीवन सपना दिखाई पड़ने लगेगा, उस आदमी का व्यवहार क्या होगा? जिस आदमी को जिंदगी अयथार्थ मालूम होने लगेगी, वह आदमी जीएगा कैसे? उसके जीवन का सूत्र क्या होगा?सपने के साथ हम क्या करते है? सपने को देखते है, और तो कुछ भी नहीं कर सकते है ।

जिस आदमी को पूरी जिंदगी सपना दिखाई पड़ने लगेगी, वह एक द्रष्टा हो जाएगा, वह एक साक्षी हो जाएगा। वह देखेगा और कुछ भी नहीं करेगा जिंदगी जैसी होगी, उसे देखता चला जाएगा ।

सपना है भाव और साक्षी है परिणति सपना है आधार और साक्षी है उस पर उठा हुआ भवन ।

जब कोई आदमी जीवन को सपना जान लेता है तो फिर एक साक्षी रह जाता है, एक द्रष्टा रह जाता है । फिर एक देखने वाले से ज्यादा उसका मूल्य और अर्थ नही होता । फिर वह जीवन में ऐसे जीता है, जैसे एक दर्शक । और जब कोई आदमी दर्शक की भांति जीवन में जीना शुरू कर देता है, तब उसके जीवन में एक क्राति हो जाती है । उस क्राति का नाम ही धार्मिक क्रांति है । वह धर्म की क्राँति शास्त्रों के पढने से नही होती, साक्षी बनने से होती है । वह धर्म की क्राति पिटे-पिटाए खो को कंठस्थ करने से नहीं होती, जीवन में साक्षी के जन्म हो जाने से हो जाती है । और जो आदमी साक्षी की तरह जीने लगता है, वह चढ़ जाता है उन शिखरो पर, जहा सत्य का दर्शन होना निश्चित है।

तो दूसरा सूत्र है साक्षीभाव । जीवन में ऐसे जीना है, जैसे एक दर्शक । जैसे जीवन के बड़े पर्दे पर एक कहानी चल रही है और हम देख रहे है । एक दिन भर के लिए प्रयोग करके देखे और जिंदगी दूसरी हो जाएगी । एक दिन तय कर ले कि सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक इस तरह जीएगे, जैसे एक दर्शक । और जिंदगी को ऐसा देखेंगे, जैसे कहानी एक पर्दे पर चलती हुई । और पहले ही दिन जिंदगी में कुछ नया होना शुरू हो जाएगा ।

आज ही करके देखे, एक छोटा सा प्रयोग करके देखे कि जिंदगी को ऐसे देखेंगे, जैसे बड़े कैनवास पर, एक बड़े पर्दे पर कहानी चलती हो और हम सिर्फ दर्शक होंगे । सिर्फ एक दिन के लिए प्रयोग करके देखे । और उस प्रयोग के बाद आप दुबारा वही आदमी कभी नहीं हो सकेंगे, जो आप थे । उस प्रयोग के बाद आप आदमी ही दूसरे हो जाएंगे ।

साक्षी होने का छोटा सा प्रयोग करके देखे । देखे आज घर जाकर और जब पत्नी गाली देने लगे या पति गर्दन दबाने लगे, तब इस तरह देखे कि जैसे कोई साक्षी देख रहा है । और जब सस्ते पर चलते हुए लोग दिखाई पड़े, दुकाने चलती हुई दिखाई पड़े, दफ्तर की दुनिया हो, तब खयाल रखे, जैसे किसी नाटक में प्रवेश कर गए और चारो तरफ एक नाटक चल रहा है । एक दिन भर इसका स्मरण रख कर देखे और आप कल दूसरे आदमी हो जाएंगे ।

दिन तो बहुत बड़ा है, एक घंटे भी कोई आदमी साक्षी होने का प्रयोग करके नख उसकी जिंदगी में एक मोड़ आ जाएगा, एक टर्निग आ जाएगी । वह आदमी फिर कभी नहीं हो सकेगा, जो एक घंटे पहले था । क्योकि उस एक घंटे में जो उसे दिखाई पड़ेगा, वह हैरान कर देने वाला हो जाएगा । और उस एक घंटे में उसके भीतर जो परिवर्तन होगा, जो ट्रांसफार्मेंशन होगा, जो कीमिया ही बदल जाएगी: वह उसके भीतर चेतना के नये बिदुओं को जन्म दे देगी ।

एक घंटे के लिए ऐसे देखें कि अगर पत्नी गालियां दे रही हें, अगर मालिक गालियां दे रहा है, तो ऐसे देखें कि जैसे आप सिर्फ एक नाटक देख रहे हो । फिर देखे कि क्या होता है न सिवाय हंसने के और कुछ भी नहीं होगा । सिवाय हंसने के और कुछ भी नही होगा! भीतर एक हंसी फैल जाएगी और चित्त एकदम हलका हो जाएगा ।

अनुक्रम

1

परतंत्रता से सत्य की ओर

01

2

भ्रम से सत्य की ओर

19

3

श्रद्धा से सत्य की ओर

39

4

स्वप्न से सत्य की ओर

63

5

शून्य से सत्य की ओर

83

ओशो-एक परिचय

109

ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट

110

ओशो का हिंदी साहित्य

113

अधिक जानकारी के लिए

118

 

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to सत्य की खोज: Quest for Truth (Hindu | Books)

चित चकमल लागै नहीं: Discourses by Osho
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2012)
Osho Media International
Item Code: NZA889
$13.00
Add to Cart
Buy Now
ध्यान-सूत्र: Dhyana Sutra by Osho
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2012)
Osho Media International
Item Code: NZA890
$21.00
Add to Cart
Buy Now
अध्यात्म उपनिषद (ओशो): Adhyatma Upanishad (Osho)
by Osho
Hardcover (Edition: 2015)
Osho Media International
Item Code: HAA273
$43.00
Add to Cart
Buy Now
मरौ हे जोगी मरौ: Osho on Gorakhnath
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2013)
Osho Media International
Item Code: NZA633
$47.00
Add to Cart
Buy Now
सत भाषै रैदास: Osho on Raidas
Item Code: NZE219
$26.00
Add to Cart
Buy Now
जिन सूत्र: Jin Sutra (Set of 4 Volumes)
by Osho: (ओशो)
Hardcover (Edition: 2013)
Osho Media International
Item Code: HAA711
$135.00
Add to Cart
Buy Now
शून्य के पार: Beyond the Void
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2012)
OSHO Media International
Item Code: NZA630
$16.00
Add to Cart
Buy Now
मैं मृत्यु सिखाता हूं: I Teach Death
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2012)
OSHO Media International
Item Code: NZA644
$36.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
I have received my parcel from postman. Very good service. So, Once again heartfully thank you so much to Exotic India.
Parag, India
My previous purchasing order has safely arrived. I'm impressed. My trust and confidence in your business still firmly, highly maintained. I've now become your regular customer, and looking forward to ordering some more in the near future.
Chamras, Thailand
Excellent website with vast variety of goods to view and purchase, especially Books and Idols of Hindu Deities are amongst my favourite. Have purchased many items over the years from you with great expectation and pleasure and received them promptly as advertised. A Great admirer of goods on sale on your website, will definately return to purchase further items in future. Thank you Exotic India.
Ani, UK
Thank you for such wonderful books on the Divine.
Stevie, USA
I have bought several exquisite sculptures from Exotic India, and I have never been disappointed. I am looking forward to adding this unusual cobra to my collection.
Janice, USA
My statues arrived today ….they are beautiful. Time has stopped in my home since I have unwrapped them!! I look forward to continuing our relationship and adding more beauty and divinity to my home.
Joseph, USA
I recently received a book I ordered from you that I could not find anywhere else. Thank you very much for being such a great resource and for your remarkably fast shipping/delivery.
Prof. Adam, USA
Thank you for your expertise in shipping as none of my Buddhas have been damaged and they are beautiful.
Roberta, Australia
Very organized & easy to find a product website! I have bought item here in the past & am very satisfied! Thank you!
Suzanne, USA
This is a very nicely-done website and shopping for my 'Ashtavakra Gita' (a Bangla one, no less) was easy. Thanks!
Shurjendu, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2020 © Exotic India