यह संकलन भगवान श्री सत्य साई बाबा की शिक्षाओं एवं मुख्य उपदेशों की रूपरेखा संक्षिप्त में प्रस्तुत करता है। भगवान बाबा इस संकलन की विषय वस्तु के केन्द्र बिन्दु हैं। सन् 1973 के 26 नवम्बर का वह शुभ दिन मेरे जीवन का सबसे शुभ दिन था, जब आन्ध्रप्रदेश के अनन्तपुर जिले में स्थित ग्राम पुट्टपर्ती में प्रशान्तिनिलयम् में मुझे भगवान श्री सत्य साई बाबा के दुर्लभ दर्शन का सहज ही सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज जब इतने वर्षों बाद मैं विचार करता हूँ तो अब विश्वास पूर्वक कह सकता हूँ कि प्रथम दर्शन में ही मुझे उनका अनुग्रह प्राप्त हो गया था। मैने घर वापिस होते समय अपने मित्र से कहा था कि अगर हमें पुनः पुट्टपर्ती आने एवं दर्शन लाभ का अवसर प्राप्त हो सके तो यह जीवन सार्थक होगा। सन् 1974 में भगवान बाबा के मार्गदर्शन में व्हाईट फील्ड, बंगलौर में मई माह में 'भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्म' पर एक माह का शिविर आयोजित था। मुझे ईश्वर की अनुकम्पा से उसमें भाग लेने का सुअवसर प्राप्त हुआ। भगवान बाबा के सानिध्य में निरन्तर एक माह तक रहने का सौभाग्य बिरले लोगों को ही प्राप्त होता है। इस शिविर में प्रतिदिन प्रातः से सायं तक देश के विभिन्न स्थानों से आमंत्रित विद्वान विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देते थे व सायंकाल भगवान बाबा का 'वेद, ब्रह्मन् एवं भारत' विषय पर प्रवचन होता था। यह क्रम एक माह तक नियमित रूप से चलता रहा। भगवान बाबा ने हम सब लोगों को अंदर से यह बात स्पष्ट कर दी कि इस सृष्टि का कर्त्ता, पालनहार नियंता व नियमन करने वाला केवल एकमात्र परब्रह्म परमात्मा ही है। वहाँ से आने के बाद अध्यात्म की समझ बढ़ गई। अब साई साहित्य एवं अन्य अध्यात्मिक ग्रंथों के पठन, चिंतन और मनन में आनंद आने लगा। इस बीच सन् 1974 में इन्दौर में श्री सत्य साई सेवा संगठन म.प्र. का प्रान्तीय अधिवेशन आयोजित किया गया। उसमें भी भाग लेने का अवसर मिला। भगवान बाबा ने इस सम्मेलन की सफलता के लिये आशीर्वाद एवं अनुग्रह के रूप में डॉ. एन. कस्तूरी को भेजा था। इसके पश्चात् मैं संगठन की गतिविधियों से जुड़ गया व भगवान की अनुकंपा से यह क्रम बना हुआ है। इस संगठन की गतिविधियों को हम तीन भागों में विभक्त कर सकते हैं। पहला अध्यात्मिक, दूसरी सेवा सम्बन्धी एवं तीसरी शैक्षणिक जिसमें बाल विकास का कार्यक्रम एवं मानवीय मूल्यों की शिक्षा सम्मिलित हैं। संगठन की गतिविधियों में भाग लेने के कारण मुझे अनेक बार प्रशान्तिनिलयम् जाने का तथा वहाँ पर आयोजित सम्मेलनों एवं प्रशिक्षण शिविरों में भाग लेने का अवसर मिलता रहा। वहाँ पर संगठन से संबंधित सभी गतिविधियों एवं विषयों पर विस्तृत चर्चा एवं विचारों के आदान-प्रदान का अवसर व लाभ मिलता था। अतः इस संकलन में जो विषय वस्तु सारांश में प्रस्तुत की गई है वह भगवान श्री सत्य साई बाबा की आध्यात्मिक शिक्षाओं पर आधारित है। भगवान बाबा का दर्शन, सानिध्य और आशीर्वाद व्यक्ति को ज्ञान, कर्म और भक्ति की ऊर्जा से ओत-प्रोत कर देता है। इस संकलन के व्याख्यानों को तीन भागों में विभक्त किया गया है पहला भगवान बाबा का अवतरण एवं दिव्यता, दूसरा साधना एक दैविक पथ एवं तीसरा शिक्षा के द्वारा रूपान्तरण। उनके संकल्प में सृजन, योगक्षेम वहन एवं नियमन की सभी शक्तियाँ विद्यमान हैं। इस धरा पर ऐसी विभूति का अवतरण कई युगों के बाद होता है। मैंने अवतार को देखा, सुना व अपनी अल्पबुद्धि से समझा। यह सब कुछ अद्भुत है। जब 1974 में मध्यप्रेदश में श्री सत्य साई सेवा संगठन अपने शैशवकाल में था तब इस संगठन की गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने वाले प्रान्ताध्यक्ष श्री एस.पी. शेठ एवं वर्तमान में संगठन के प्रान्ताध्यक्ष श्री एस. के. सचदेवा का मैं विशेष रूप से आभारी हूँ जिनके आत्मिक स्नेह व मार्गदर्शन से यह सौभाग्य बना रहा।
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