लेखक परिचय
नाम : डॉ. हुकमसिंह भाटी जन्म : 07-12-1946, मालूंगा (जोधपुर, पिताश्री कानसिंहजी भाटी) पद : पूर्व निदेशक, प्रताप शोध प्रतिष्ठान (भूपाल नोबल्स संस्थान), उदयपुर (30 मई 1986 से मार्च 1997) एवं राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी, जोधपुर (1997 से 2010) संस्थापक : इतिहास अनुसंधान संस्थान, चौपासनी, जोधपुर पीएच.डी. गाइड : जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर सम्पादन : शोध पत्रिका 'मज्झमिका', प्रताप शोध प्रतिष्ठान, उदयपुर 'परम्परा', राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी, जोधपुर राष्ट्र की पुरालेख सम्पदा का परिरक्षण: मानव संसाधन विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय अभिलेखागार और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, दिल्ली द्वारा स्वीकृत 12 योजनाओं के माध्यम से मेवाड़ एवं मारवाड़ के 21 ठिकानों की पुरालेखीय सम्पदा का परिरक्षण और राजस्थानी की हजारों पाण्डुलिपियों की खोज एवं सर्वेक्षण कार्य सम्पन्न । शोधपूर्ण इतिहास प्रकाशित: 1. राजस्थान के मेड़तिया राठौड़, 2. मीरां बाई ऐतिहासिक व सामाजिक विवेचन, 3. सोनगरा एवं सांचोरा चौहानों का इतिहास, 4. संस्कृत व राजस्थानी ऐतिहासिक कृतियों का विवेचन, 5. मेड़ता राव दूदा एवं उनके वंशज, 6. अखेराज सोनगरा, 7. महाराणा प्रताप और सामंतगण, 8. महेचा राठौड़ों का मूल इतिहास, 9. महाराणा प्रताप ऐतिहासिक अध्ययन, 10. वीर शिरोमणि अमरसिंह राठौड़, 11. भाटी वंश का गौरवमय इतिहास भाग 1-2, 12. राजस्थानी साहित्य की विधाएं एवं लेखन, 13. सोनगरा-सांचोरा चौहानों का वृहत् इतिहास, 14. समर सूर्य बल्लू राठौड़ ऐतिहासिक विवेचन, 15. मारवाड़ के ओहदेदारों का इतिहास में योगदान, 16. मेड़तिया राठौड़ों का राजनीतिक एवं सामाजिक इतिहास, 17. जैतावत राठौड़ों का इतिहास। राजस्थानी साहित्य और ऐतिहासिक ग्रंथों की खोज तथा इतिहास के आधारभूत स्रोतों (पाण्डुलिपियों, बहियों, पट्टे-परवाने) का सम्पादन-प्रकाशन 18. राजस्थान के ख्यातकार और उनके ग्रंथों का तिथिक्रम, 19. सगतरासो, 20. राजस्थान के इतिहासकार-भाग 1 व 2, 21. महावजस प्रकाश और सारंगदेव सीसोदिया, 22. मेवाड़ के ऐतिहासिक पट्टे-परवाने, 23. इतिहासकार जेम्स टॉड : व्यक्तित्व एवं कृतित्व, 24. मेवाड़ जागीरदारां री विगत, 25. मेवाड़ रावल राणाजी री बात, 26. चूण्डावत वंश प्रकाश, 27. मेवाड़ ठिकानों के अभिलेख, 28. महाराणा राजसिंह पट्टेदारां री विगत, 29. महाराणा राजसिंह परगनां री विगत, 30. मेवाड़ के ऐतिहासिक ग्रन्थों का सर्वेक्षण, 31. राजस्थानी ऐतिहासिक दोहे, 32. सीसोद वंशावली एवं राजस्थान के रजवाड़ों की वंशावलियें, 33. मेवाड़ इतिहास के कतिपय पहलू, 34. मेवाड़ के ठिकानों एवं घरानों की पुरालेखीय सामग्री, 35. मेवाड़ जागीरदारां रे गांव-पट्टों राह मरजाद री हकीकत, 36. युग पुरुष महाराणा प्रताप, 37. गोगुंदा री ख्यात, 38. स्वतन्त्रता आन्दोलन की राजस्थानी प्रेरक रचनायें, 39. इतिहास लेखन में राजस्थानी ग्रंथों की उपयोगिता, 40. मारवाड़ रा ठिकानां री विगत, 41. मारवाड़ री ख्यात, 42. स्वातंत्र्य वीर राव चन्द्रसेन, 43. साहित्य-इतिहास के साधक : डॉ. नारायणसिंह भाटी, 44. गढ़ जोधपुर घेरे री बही, 45. कच्छवाहां री ख्यात वंशावली, 46. भारत में नाथों के आसन, 47. राजस्थान में ग्रंथों की खोज, 48. झींथड़ा री ख्यात, 49, मारवाड़ के ठिकानों की पुरालेखीय सम्पदा, 50. शालिहोत्र, 51. उहड़ राठौड़ां री ख्यात, 52. मारवाड़ रा परगनां री फरसत, 53. मध्यकालीन राजस्थान के सामाजिक इतिहास के स्रोत, 54. बीकानेर री ख्यात, 55. राजस्थानी शोध संस्थान का स्वर्णिम इतिहास, 56. आयुर्वेदशास्त्र-रामविनोद, 57. राठौड़ां री ख्यात-भाग-1 से 3, 58. इतिहासविद् गौरीशंकर हीराचन्द ओझा, 59. डॉ. नारायणसिंह भाटी का साहित्य-इतिहास-संस्कृति चिन्तन, 60, भादराजून ठिकाणा री तवारीख, 61. जूनी व्रत कथावां, 62. अश्वमेध यज्ञ कथा, 63. राजस्थानी नींसाणी संग्रह, 64. सुगन विचार, 65. रघुवीरसिंह सीतामऊ के पत्र डॉ. नारायणसिंह भाटी के नाम, 66. स्वनामधन्य महाराव सुरताण देवड़ा, 67. राजस्थानी शब्द कोष और पदम्श्री सीताराम लालस, 68. सूफी दरवेश बाबा शेख फरीद की जीवनी और वाणी, 69. पीपाजी की परची, 70. ओसवाल वंशावली एवं रीति रिवाज। सम्मान एवं पुरस्कार : उत्कृष्ट कार्य हेतु उदयपुर में महाराणा कुम्भा पुरस्कार, महाराणा प्रताप साहित्य पुरस्कार और भटनागर पुरस्कार के अतिरिक्त दुर्गादास स्मृति समिति (जोधपुर), बीर अमरसिंह राठौड़ जयंती समिति (नागौर), महाराणा प्रताप फाउंडेशन (परबतसर), जौहर स्मृति संस्थान (चित्तौड़गढ़) और भाटी इतिहास समिति द्वारा सम्मानित । मीरां कला मन्दिर, उदयपुर से 'मीरा साहित्य शिरोमणि' अलंकरण से सम्मानित, मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट द्वारा 'मारवाड़ रतन इतिहास पुरस्कार' से सम्मानित।
पुस्तक परिचय
राजस्थान की ऐतिहासिक-धरा ने अनेक ख्याति प्राप्त योद्धाओं को जन्म दिया। उन योद्धाओं के त्याग, निष्ठा और स्वामीभक्ति के साथ ही साहस, शौर्य, पराक्रम तथा बलिदान के फलस्वरूप भारत के इतिहास में इस क्षेत्र का विशेष स्थान रहा है। योद्धाओं के चारित्रिक गुणों एवं आदर्शों को लेकर प्रारंभ में जहाँ साहित्य सृजन हुआ वहीं कालान्तर में इतिहास रचा गया। इस प्रकार के योद्धाओं में बल्लू राठौड़ का नाम विशेष उल्लेखनीय रहा है। इस पुस्तक में इतिहास के आधारभूत नवीन स्रोतों का तुलनात्मक अध्ययन कर बल्लू के जीवन की घटनाओं और गुणों को उजागर किया गया है। इसके साथ ही इतिहास में प्रचलित भ्रांत धारणाओं का निराकरण तथ्यों के आधार पर करते हुए सच्चे इतिहास-लेखन की ओर विद्वानों का ध्यान आकृष्ट किया है। इतना ही नहीं वीरवर बल्लू के पूर्वजों और मारवाड़ के शासकों के बारे में नूतन तथ्य उद्घाटित करने के अतिरिक्त बल्लू के वंशजों की जानकारी संजोने के साथ ही चांपावत राठौड़ों के ठिकानों की वंशावलियों, ठिकानों की रेख और चाकरी आदि सूत्रों को रेखांकित करने का विनम्र प्रयास किया है, जिससे इसकी उपयोगिता बढ़ गई है। शोध कार्य को आगे बढ़ाने में यह पुस्तक सहायक सिद्ध होगी। सामान्य पाठकों के लिए भी यह एक रोचक पुस्तक है।
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