पुस्तक परिचय
'तनाव-प्रबन्धन' अपने आपमें एक नया विषय है। संसार में जब कोई समस्या या मुसीबत अपने पैर पसारने लगती है तो उस समस्या से मुक्ति या छुटकारा पाने के प्रयास भी सक्रिय होने लगते हैं। तनाव आदमी की अपनी कोई निजी या व्यक्तिगत चीज नहीं है, जो उसके भीतर से निकल नहीं सकती। यह एक बाहरी चीज है जो नकारात्मक सोच और व्यर्थ चिंतन के जरिए आदमी के दिलो-दिमाग में घर कर जाती है। तनाव किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं बल्कि यह दुनिया के सब लोगों की समस्या है, इसलिए हम सबको मिल-जुलकर इस महा-समस्या को दूर करने या मिटाने का सार्थक उपाय करना चाहिए। इस महान कार्य के लिए आपसी प्रेम, भाईचारे, सद्भावना, एक-दूसरे के प्रति आदर-सम्मान, दयाभावना, क्षमाभाव, सरलता, सच्चाई, ईमानदारी और कर्त्तव्यनिष्ठता की महती आवश्यकता है। इसके साथ ही आपसी कलह, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, अहंकार, घृणाभाव तथा बैर भाव आदि दुर्गुणों का भी हमें त्याग करना होगा। तभी हम सभी पूर्णतः तनावमुक्त होकर स्वस्थ, शान्तिपूर्ण और खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
भमिका
'तनाव-प्रबन्धन' अपने आपमें एक नया विषय है। संसार में जब कोई समस्या या मुसीबत अपने पैर पसारने लगती है तो उस समस्या से मुक्ति या छुटकारा पाने के प्रयास भी सक्रिय होने लगते हैं। तनाव आदमी की अपनी कोई निजी या व्यक्तिगत चीज नहीं है, जो उसके भीतर से निकल नहीं सकती। यह एक बाहरी चीज़ है जो नकारात्मक सोच और व्यर्थ चिंतन के जरिए आदमी के दिलो-दिमाग में घर कर जाती है। इस पुस्तक में तनाव प्रबंधन अथवा तनाव की रोकथाम के विभिन्न तरीकों के बारे में बताया गया है। लेकिन तनाव उपचार के ये वर्णित साधन मात्र सैद्धान्तिक, विचारणीय अथवा काल्पनिक नहीं हैं। मेरा पाठकों से निवेदन है कि वे इस पुस्तक में बताए गए उपायों पर अमल करने का प्रयास करें अर्थात् जो साधन इस ग्रंथ में बताए गए हैं, उन्हें व्यावहारिक तौर पर अपनाने की कोशिश की जानी चाहिए, तभी आपको इस पुस्तक को पढ़ने का वास्तविक लाभ प्राप्त हो सकता है। वर्तमान काल में तनाव एक ऐसी जटिल और विकट समस्या है जो दुनिया के हर देश में फैली हुई है। आमतौर से भ्रष्टाचार, गरीबी, महँगाई और अशिक्षा को ही किसी देश की अवनति का कारण माना जाता है, लेकिन सच पूछिए तो तनाव दुनिया के सभी देशों के लिए, संसार के सभी नागरिकों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। पहले तो यह समस्या केवल नगरों और महानगरों में ही फैली हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे गाँवों का विकास होता जा रहा है और गाँव संचार माध्यमों से जुड़ने लगे हैं- तनाव की समस्या गाँव और कस्बों के लोगों को भी अपना शिकार बनाने लगी है। आज संसार में एटमबम और विश्वयुद्ध को दुनिया के लिए और सम्पूर्ण मानव जाति के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता है लेकिन इस तरह के खतरे की शुरूआत विभिन्न देशों के बीच उत्पन्न हुए तनाव से होती है। इसी प्रकार इंसान पृथ्वी पर रहकर हत्या, आत्महत्या, बलात्कार, चोरी, डकैती, हड़ताल, अत्याचार और शोषण आदि जो कर रहा है; उसकी भी जड़ उसके मनो-मस्तिष्क में छाया हुआ तनाव ही है, जो उसकी बुद्धि या विवेक का ताला बंद करके उसे अन्यथा या अहितकर कार्यों को करने के लिए प्रेरित करता है। तनाव किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं बल्कि यह दुनिया के सब लोगों की समस्या है, इसलिए हम सबको मिल-जुलकर इस महा-समस्या को दूर करने या मिटाने का सार्थक उपाय करना चाहिए। इस महान कार्य के लिए आपसी प्रेम, भाईचारे, सद्भावना, एक-दूसरे के प्रति आदर-सम्मान, दयाभावना, क्षमाभाव, सरलता, सच्चाई, ईमानदारी और कर्त्तव्यनिष्ठता की महती आवश्यकता है। इसके साथ ही आपसी कलह, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, अहंकार, घृणाभाव तथा बैर भाव आदि दुर्गुणों का भी हमें त्याग करना होगा। तभी हम सभी पूर्णतः तनावमुक्त होकर स्वस्थ, शान्तिपूर्ण और खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकते हैं। मैं पाठकों से पुनः निवेदन करता हूँ कि वे इस पुस्तक में वर्णित तनाव-प्रबंधन के उपायों को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा इन उपायों का अपनी जिंदगी से ताल-मेल बिठाने का प्रयत्न करें। अगर आपमें से किसी एक के मन का तनाव दूर करने में ये उपाय सहायक सिद्ध हो सकें तो मैं अपने परिश्रम को धन्य समझेंगा।
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