प्राक्कथन
ऐसी दुनिया में जहाँ जीवन की गति अक्सर बेकाबू लगती है जात लगभग एक सार्वभौमिक अनुभवब गया है। यह उम्र, पेशे और भूगोल से परे है जो चुपचाप हमारे मन शरीर और रिश्तों को प्रभावित करता है। इस पुस्तक के माध्यम से मेरा उद्देश्य तनाव को न केवल एक चुनौती के रूप में बल्कि विकास, लचीलापन और परिवर्तन के अवसर के रूप में तलाशना है। मनोविज्ञान के प्रोफेसर और मानसिक स्वास्थ्य के समर्थक के रूप में मैंने तनाव से जूझ रहे व्यक्तियों की अनगिना कहानियाँ सुनी है-छात्र शैक्षणिक दवाव से जूझ रहे हैं, पेशेवर लोग मांग वाला कैरियर संतुलित कर रहे हैं, माता-पिता पारिवारिक जिम्मेदारियों निभा रहे हैं और व्यक्ति व्यक्तिगत और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन कहानियों ने मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर तनाव का गहन प्रभाव रेखांकित किया है. साथ ही साथ खुद को सामना करने और पनपने के लिए प्रभावी रणनीतियों से लैस करने का महत्व भी दर्शाया यह पुस्तक वर्षों के अकादमिक शोध, पेशेवर अनुभव और व्यक्तिगत चिंतन का परिणाम है। यह मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों को ज्ञान, योग और ध्यान जैसी भारतीय सांस्कृतिक प्रथाओं की समृद्धि और वास्तविक जीवन के केस स्टडीज से प्राप्त अंतर्दृष्टि को एकीकृत करती है। मेरा उद्देश्य पाठकों को तनाव, उसके प्रभावों और उसे प्रभावी बंग से प्रबंधित करने के लिए आवश्यक उपकरणों की व्यापक समझ प्रदान करना है। मैं अपने परिवार, सहकर्मियों और दोस्तों का बहुत आभारी हूँ जिन्होंने इस यात्रा में मेरा साथ दिया। मेरी बहनें रूपम तिवारी, रानू और डॉ. रोजी निक्की हमेशा प्रोत्साहन के स्रोत रही हैं। मेरी माँ मीना तिवारी, जिनके त्याग ने मुझे शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाया, एक स्थायी प्रेरणा बनी हुई हैं। अपनी बेटी दिव्यांशी जिसकी खुशी और जिज्ञासा लगातार लेखन के लिए मुझे प्रेरित करती है तथा पत्नी अंशु को भी सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ। मैं अपने मित्र प्रदीप भास्कर को इस पुस्तक की भाषा परिष्कृत करने में उनके मार्गदर्शन के लिए और अभिषेक कुमार को सामग्री टाइप करने में उनके सावधानीपूर्वक काम के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ। आप छात्र हो चाहे पेशेवर, या संतुलन और शांति की तलाश करने वाले व्यक्ति हों, यह पुस्तक आपके लिए है। मुझे आशा है, यह तनाव प्रबंधित करने और कल्याण को अपनाने की आपकी यात्रा में व्यावहारिक रणनीतियाँ, मनोवैज्ञानिक अंतर्दृष्टि और सशक्तिकरण की भावना प्रदान करते हुए एक मार्गदर्शक के रूप में काम करेगी। आइए; हम सब मिलकर इस यात्रा पर चलें, तनाव को आत्म-खोज और विकास के अवसर में बदलें।
पुस्तक परिचय
आज के प्रतिस्पर्धात्मक और तेजी से बदलते युग में तनाव (Stress) एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बन गई है। चाहे वह विद्यार्थी हो. शिक्षक, नौकरीपेशा व्यक्ति, व्यापारी. पुलिसकर्मी, न्यायाधीश या कोई भी अन्य पेशेवर कोई किसी न किसी रूप में तनाव का सामना करता है। यदि इसे सही ढंग से प्रबंधित न किया जाए, तो यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। यह पुस्तक 'तनाव प्रबंधन : एक संतुलित जीवन' तनाव के मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक पहलुओं को गहराई से समझाने का प्रयास करती है। इसमें न केवल तनाव के कारणों और प्रभावों का विश्लेषण किया गया है, बल्कि इसे प्रबंधित करने के लिए व्यवहारिक और वैज्ञानिक रणनीतियाँ भी प्रस्तुत की गई हैं। इस पुस्तक में क्या मिलेगा? तनाव के मूल कारण और इसके प्रभाव, मस्तिष्क और शरीर पर तनाव का मनोवैज्ञानिक प्रभाव, व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में तनाव प्रबंधन की तकनीकें, संज्ञानात्मक व्यवहारिक चिकित्सा (CBT), माइंडफुलनेस, योग और ध्यान जैसे प्रभावी उपाय, विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले पेशेवरों (पुलिस, न्यायपालिका, स्वास्थ्य कर्मी) के लिए तनाव प्रबंधन के उपाय, दीर्घकालिक मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखने के उपाय। यह पुस्तक न केवल विद्यार्थियों, प्रोफेशनल्स और गृहस्थ जीवन जीने वालों के लिए उपयोगी है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े शोधकर्ताओं, शिक्षकों और परामर्शदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं और तनाव से प्रभावी ढंग से निपटना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपकी मार्गदर्शिका बनेगी।
लेखक परिचय
शैक्षणिक यात्रा एवं शोध कार्य डॉ. राजेश कुमार तिवारी एक प्रतिष्ठित मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद् और लेखक हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य, व्यक्तित्व विकास और तनाव प्रबंधन पर अपने शोध एवं लेखन के लिए प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में, आप टी.एन.बी. कॉलेज, भागलपुर, बिहार के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। डॉ. तिवारी ने मनोविज्ञान में अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2002 में पीएच.डी. पूरी की। आपका शोध कार्य व्यक्तित्व और मनोवैज्ञानिक प्रेरणाओं के जटिल पहलुओं को उजागर करता है। मनोविज्ञान के विभिन्न पहलू पर शोध आलेख प्रकाशित हुई है। आप शिक्षण और शोध के क्षेत्र में कई दशकों से सक्रिय हैं और मनोविज्ञान को व्यावहारिक जीवन से जोड़ने का प्रयास करते रहे हैं। उनकी रुचि शिक्षा प्रणाली, तनाव प्रबंधन, अपराध मनोविज्ञान, प्रेम मनोविज्ञान, और सनातन धर्म के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को गहराई से समझने और प्रस्तुत करने में रही है। लेखन और प्रकाशन डॉ. तिवारी ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें क्रिमिनल साइकोलॉजी (अपराध मनोविज्ञान), ए हैंडबुक ऑफ इमोशन (भावनात्मक मनोविज्ञान), फाउंडेशन ऑफ सोशल साइकोलॉजी (सामाजिक मनोविज्ञान)। इसके अलावा, आप 'सनातन धर्मः अतिम मनोवैज्ञानिक विज्ञान' और 'अपराध मनोविज्ञान का अनुप्रयुक्त अध्ययन जैसी पुस्तकों पर भी कार्य कर रहे है। व्यावहारिक योगदान डॉ. तिवारी न केवल शिक्षण और शोध में योगदान देते हैं, बल्कि विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक संस्थानों के लिए तनाव प्रबंधन कार्यशालाएँ, मनोवैज्ञानिक परामर्श, और प्रेरणादायक व्याख्यान भी देते रहे हैं। हाल ही में, उन्होंने पुलिस कर्मियों, न्यायाधीशों, प्रशासनिक अधिकारियों, छात्रों और शिक्षकों के लिए तनाव प्रबंधन परियोजनाएँ भी तैयार की हैं।
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