भूमिका
वर्तमान समय में दुनिया के लाखों करोड़ों लोग सैकड़ों प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हैं। दुनिया में जितने लोग अनेक बीमारियों का कष्ट झेल रहे हैं, उच्च रक्तचाप या हाईपरटेंशन की बीमारी उन रोगों में सबसे ज्यादा इंसान को कष्ट दे रही है। ऐसा माना जाता है कि सारे संसार में 50% से भी ज्यादा लोग उच्च रक्तचाप की बीमारी से पीड़ित हैं। इनमें कई तो अपने रोग की स्थिति से अनजान भी हैं। जब तक हमें अपने रोग के बारे में पता न चलेगा, तब तक हम उसके इलाज के लिए अस्पताल या डॉक्टर के पास जाने के लिए भी प्रेरित नही होंगे। किसी भी रोग का पता तभी हम लगा सकते हैं, जब हमको उस रोग के लक्षणों के बारे में पता हो। इस पुस्तक में उच्च रक्तचाप रोग उत्पन्न होने पर व्यक्ति के अंदर दिखाई देने वाले या महसूस किए जाने वाले विभिन्न रोग लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इन रोग लक्षणों के प्रकट होने पर हम यह निश्चित कर सकते हैं कि उच्च रक्तचाप के हम शिकार हो चुके हैं तथा हमें डॉक्टर के पास जाकर अपना इलाज शुरू करवाना चाहिए। प्रस्तुत पुस्तक के प्रथम अध्याय में उच्च रक्तचाप या हाईपरटेंशन के बारे में सामान्य बातें बताई गयी हैं। दूसरा अध्याय उच्च रक्तचाप रोग के वर्गीकरण से सम्बंध रखता है। तीसरे अध्याय में रक्तचाप मापक यंत्रों के जरिए व्यक्ति के रक्तचाप को मापने की विधि समझाई गयी है। साथ ही विभिन्न रक्तचाप मापी यंत्रों के बारे में भी बताया गया है। इस पुस्तक का चौथा अध्याय रोग के विविध-कारणों से सम्बंधित है, जिनका पता होने पर हम यदि पहले से ही इन कारणों अथवा रोग के बीजों से अपना बचाव कर लें तो रोग के पैदा होने या रोग की गंभीर स्थिति आने से हम खुद को बचा सकते हैं। पुस्तक का पांचवाँ अध्याय रोग के लक्षणों की कहानी कहता है। उच्च रक्तचाप जब किसी व्यक्ति को अपना शिकार बनाता है तो उसके शरीर से, कार्य व्यवहार और आचरण से दुर्बलता के कई लक्षण प्रकट होने लगते हैं। इनमें से कुछ लक्षणों को देखकर हम कह सकते हैं कि इस व्यक्ति को उच्च रक्तचाप है अथवा इन लक्षणों की जानकारी होने पर तथा लक्षणों के प्रकट होने पर आदमी खुद भी समझ सकता है कि हाईपरटेंशन के रोग ने मुझको जकड़ लिया है। उच्च रक्तचाप व्यक्ति के शरीर और दिमाग पर किस प्रकार अपना प्रभाव डालता है तथा इससे और कौन-कौन से रोग तथा जटिलताएँ इंसान के अंदर पैदा हो जाती हैं- इस सबका वृतान्त पाठक गण इस पुस्तक के छंटवें अध्याय में पढ़ेंगें। इसके अलावा पुस्तक के सातवें अध्याय में रोग के निदान के तरीकों के बारे में समझाया गया है। उच्च रक्तचाप रोग के निदान में जिस प्रकार के टेस्ट या परीक्षणों को प्रयोग किया जाता है, वे सब इस अध्याय में समझाए गए हैं। पुस्तक का आठवाँ अध्याय उच्च रक्तचाप रोग की चिकित्सा अथवा उपचार (इलाज) से सम्बंधित है तथा यह सामग्री के हिसाब से विस्तृत प्रकार का है। इस अध्याय में रोगोपचार के विभिन्न तरीकों के बारे में, रोग की ऐलोपैथिक, आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा की प्रणालियों के बारे में बताया गया है। उच्च रक्तचाप में राहत पहुँचाने वाले की एलोपैथिक तथा आयुर्वेदिक दवा गोलियों का वर्णन है लेकिन मरीज को अपने डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही इन दवाओं का सेवन करना चाहिए।
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