पुस्तक परिचय
तफ्सीरी शान का हामिल जदीद तरीन तर्जमा है। સુરભાલ ગુલાલ में अदबे खुदा व अदबे मुस्तफा को रूह की तरह समोया गया है। कारी को महबूबे हकीकी से गुफ्तगू का सलीका सिखाता है। आयाते कुरआनिया के मत्न के मक़्सूद को अपने अंदर समोये हुए है। पढ़ते हुए कारी उस कैफियत और हलावत को महसूस करता है, जो कैफियत और हाल कुरआनी आयात बयान करतीं हैं। का लहजा ताज़गी और शफ्तगी लिये हुए है। कुरजान ऐसा तर्जमए कुरआन है जो ईमान अफरोज़ भी है और अमल अंगेज़ भी। इरफाहुल ज़हने जदीद में पैदा होने वाले सवालात का जवाब फराहम करता है। पढ़ने से कारी को इस्लाम की हक़्क़ानियत का साइंसी बुन्यादों पर इद्राक हासिल होता है। शैखुल इस्लाम डॉ. मुहम्मद ताहिरुल कादरी के मख़्सूस तख्लीकी तर्जे इज़्हार का मज़्हर है।
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