पुस्तक परिचय
यह प्रसंग उदाहरण है कि श्रीराम को यह आभास था कि अगर वे माता के पास आज्ञा लेने जाएं तो शायद माता उन्हें इसकी आज्ञा नहीं देगी। जिससे कि पिता के वचनों का असम्मान होगा। इसलिए उन्होंने अपनी माता का सामना करने से ही इंकार कर दिया। माता कैकेयी भी श्रीराम को अपने बेटे भरत से भी ज्यादा प्रेम करती थी। उन्हें श्रीराम से बहुत आशाएं थी। इसी कारण जब कैकेयी ने श्रीराम के लिए 14 वर्षों का वनवास मांगा तब सबसे ज्यादा भरत हैरान हुए थे। क्योंकि वह जानते थे कि माता को राम से कितना प्रेम है। दरअसल कैकेयी ने चौहद वर्ष का वनवास मांगकर यह समझाया कि अगर व्यक्ति युवावस्था में चौदह यानी पांच ज्ञानेन्द्रियाँ (कान, नाक, आंख, जीभ, त्वचा) पांच कर्मेन्द्रियां (वाक, पाणी, पाद, पायु, उपस्थ) तथा मन, बुद्धि, चित और अहंकार को वनवास (एकान्त आत्मा के बश) में रखे तभी अपने अंदर के घमंड और रावण को मार सकता है। दूसरी बात यह कि रावण की आयु में केवल 14 वर्ष शेष बचे थे। कैकेयी को श्रीराम पर पूरा भरोसा था वो जानती थीं कि श्रीराम ही हैं जो रावण का वध कर पृथ्वी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिला सकते हैं। लेकिन राजा दशरथ को यह भरोसा नहीं था इसलिए उन्होंने पुत्र मोह में अपने प्राण गंवा दिए। माता कैकयी यथार्थ जानती थीं। जो नारी युद्ध भूमि में दशरथ के प्राण बचाने के लिए अपना हाथ रथ के धुरे में लगा सकती हैं, रथ संचालन की कला में दक्ष हैं, वह राजनैतिक परिस्थितियों से अनजान कैसे होंगी। कैकेयी चाहती थी कि श्रीराम का यश चौदहों भुवनों में फैले और यह बिना तप और बिन रावण वध के संभव नहीं था। कैकेयी चाहती थीं कि राम केवल अयोध्या के ही सम्राट न बनकर रह जाएं, वह विश्व के समस्त प्राणियों के हृदयों के सम्राट भी बनें। इसलिए श्रीराम को अपनी साधित शोधित इन्द्रियों तथा अन्तःकरण को तप के द्वारा तदर्थ सिद्ध करना होगा। तभी रावण वध संभव है। वहीं महाराज अनरण्य के उस शाप का समय पूर्ण होने में 14 ही वर्ष शेष थे, जो शाप उन्होंने रावण को दिया था कि मेरे वंश का राजकुमार ही तेरा काल होगा।
लेखक परिचय
शिक्षा : स्नातक कार्यानुभव, कैरियर की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी से 2002 में जुड़कर बुथ में मेंबर मंडल सचिव नागपुर महानगर उपाध्यक्ष । नागपुर महानगर महामंत्री उभामो नागपुर महानगर अध्यक्ष उभामो प्रदेश सचिव महाराष्ट्र प्रदेश महामंत्री उभामो। और वर्तमान दायित्व प्रदेश प्रवक्ता महाराष्ट्र भाजपा। सदस्य हिन्दी साहित्य अकादमी महाराष्ट्र सरकार। प्रेरणा स्रोत पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी भारत रत्न परम श्रद्धेय पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेईजी। प्रकाशनाधीन पुस्तकेंः संघ के 100 साल एवं पर्यावरण और मानवजाति का भविष्य
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