पुस्तक परिचय
प्रस्तुत बहुरत्ना इस प्राचीन वाणी में सनातन धर्म का दिग्दर्शन तथा हमारे श्री रामस्नेही सम्प्रदाय के मुख्य आचार्यों की परम्परा रचना-परिणाम और काव्यात्मक उत्कृष्ट इतिहास के साथ-साथ मैंने जो अभी तक हमारे श्री रामधाम भोजास के अनंत विभुषित श्री हरिदासोत सन्त महापुरुषों के हस्तलिखित अप्रकाशित ग्रन्थ हैं तथा कुछ बिना लिखा केवल मौखिक कथाओं के रूप में है उन सबका लगभग पहली बार विस्तृत विवेचन एवं विश्लेषण किया गया है। यानी उनकी प्रामाणिक जीवनी प्रस्तुत करने के साथ ही साथ उनके भक्ति एवं अध्यात्म दर्शन तथा समाज एवं जीवन दर्शन की तलस्पर्शी बहुआयामिक आध्यात्मिक जीवन में विश्व कल्याणार्थ चिन्तन, मननयुक्त उद्बोधन, उद्गार व्यक्त कर हिन्दी साहित्य की मुख्य धारा में सम्मिलित किया है। जो कि यह विश्व के सभी धर्म निषेध युक्त दृष्टि से सम्पूर्णतः समान तथा एकमत है और विधियुक्त दृष्टि से विभिन्न देश, काल व परिस्थिति आदि के कारण सुरगुण-निर्गुण भिन्नता युक्त होते हुए भी उद्देश्य की दृष्टि से अभिन्न ही है। क्योंकि सनातन धर्म के सब वेद-शास्त्र हम सबको सम्यक् जीवन जीने की कला तथा मोक्ष प्राप्ति का सही ज्ञान सिखाते हैं।
लेखक परिचय
महन्त रामनिवास रामस्नेही जन्म : वैसाख सुदि 3, विक्रम संवत् 2006 पिता का नाम: श्री खैराजरामजी कस्वा जाट माता का नाम : श्रीमती मीराँ बाई जन्म स्थान : ग्राम-रामनगर, पोस्ट-गोटन, तह. मेड़ता, जिला-नागौर शिक्षा : कक्षा 8वीं पास श्री जैन रत्न विद्यालय, भोपालगढ़ (जोधपुर) गुरु दीक्षा : महन्त श्री युक्तिरामजी महाराज से विक्रम संवत् 2022, मिति वैसाख सुदि 3 के दिन श्री रामधाम रामचौकी, बिराई, जिला-जोधपुर (राजस्थान) गौद्ध शिष्यत्व : श्री रामधाम भोजास का उत्तराधिकारी पद ग्रहण किया। मिति वैसाख सुदि 3 वि.सं. 2030 महन्त परमपूज्य सतगुरु श्री श्री 1008 श्री धनारामजी महाराज के कर कमलों के द्वारा
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