स्वाध्याय-रत्न-मञ्जूषा' डॉ० बृजेन्द्र निगम की प्रत्यग्र साधना का सुपरिणाम है। इसमें उन्होंने वेदों और उपनिषदों के साथ गीता के भी प्रमुख मन्त्रों, अनमोल श्लोकों और महापुरुषों के अमृत वचनों को सरल भावार्थ सहित सँजोया है। दैनिक स्वाध्याय की दृष्टि से यह कार्य उन समस्त विचारवान पाठकों के लिए, जो 'स्वाध्यायान्मा प्रमदः' (स्वाध्याय में प्रामद मत करो) के आर्ष निर्देश में आस्था रखते हैं, अत्यन्त उपादेय है।
प्रस्तुत ग्रन्थ निश्चित ही घोर परिश्रम और प्रबुद्ध दृष्टि का प्रतिफल है। इसके अनुशीलन से व्यक्ति, परिवार और सम्पूर्ण समाज में निश्चित ही सद्भाव, सत्प्रवृत्ति और असंख्य सद्गुणों का समावेश होगा। जीवन में अपार सौख्य और माधुर्य का सञ्चार होगा परिणामतः राष्ट्र और समाज का भी कल्याण होगा ।
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