Please Wait...

पंडित भातखंडे के ग्रंथों का संगीत शिक्षण में योगदान: Contribution of Pandit Bhatkhande Books to Music Education


पुस्तक परिचय

प्रस्तुत पुस्तक को नौ अध्यायों मिनविभक्त किया गया है! प्रथम अध्याय में भारतीय संगीत की प्राचीन परम्परा पर किंचित प्रकाश डालते हुए पंडित विष्णु नारायण भातखंडे प्रचलित हिंदुस्तानी संगीत के प्रथम शास्त्रकार के रूप में कैसे सामने आये, इसकी विवेचना की गई है! द्वितीय अध्याय पंडित भातखंडे के जीवन चरित्र और उनके उद्देश्य संगीतोध्दार से सम्बंधित है! तृतीया अध्याय मं वर्तमान संगीत तथा भातखंडे से पूर्व संगीत की स्थिति प्रकाश डाला गया है! चतुर्थ अध्याय में उनके द्वारा किये गए संगीत के पुनरुध्दार से सम्बंधित योगदानों का विश्लेषण किया गया है! पंचम अध्याय में पंडित भातखंडे के स्वरचित संगीतग्रन्थों तथा प्राचीन ग्रंथों के सम्पादन मुद्रण आदि का विवरण देते हुए वर्तमान संगीत, संगीत की सामूहिक शिक्षा और प्रचार प्रसार में उनके ग्रंथों की पामांिकता तथा महत्व पर प्रकाश डाला गया है! षष्ठम अध्याय मेंसंगीत के वाद ग्रस्त विषय तथा स्वर श्रुति शुध्द स्वर सप्तक पर विचार किया गया है!, सप्तम तथा शतम अध्याय मेंमधकालीन राग रागिनी प्रणाली तथा इसके स्थान पर थाट राग पध्दति का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है तथा हिंदुस्तानी संगीत के प्रचलित समस्त रोगो का शास्त्रीय विवेचन क्रमश छ: ओं क्रमिक पुस्तक मालिकाओं तथा भातखंडे संगीत शास्त्र के चार भागों के आधार पर किया नवम अध्याय पंडित भातखंडे कृत स्वराकण प्रणाली का विवेचन तथा उपयोगिता प्रस्तुत करता है ! उपसंहार के रूप में पंडित भातखंडे जी के ग्रंथों की प्रामाणिकता तथा प्रचलित संगीत के सन्दर्भ में संगीत सन्दर्भ में उनकी उपयोगिता का महत्त्व दिखाया गया है





Sample Pages









Add a review

Your email address will not be published *

For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Post a Query

For privacy concerns, please view our Privacy Policy

CATEGORIES

Related Items