पुस्तक परिचय
प्रो. राजमणि शर्मा का आलोचना-कर्म' पुस्तक डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय द्वारा लिखी गई एक ऐसी पुस्तक है जो प्रो. शर्मा के भाषावैज्ञानिक दृष्टि को, उनकी साहित्यिक सोच को जानने-समझने का दस्तावेज है। 'साहित्य के रूप', 'प्रसाद का गद्य साहित्य', 'आधुनिक भाषाविज्ञान', 'काव्यभाषा : रचनात्मक सरोकार', 'हिन्दी भाषा इतिहास और स्वरूप', 'अनुवाद विज्ञान सिद्धांत एवं प्रयोग', 'भारतीय प्राणधारा का स्वाभाविक विकास हिन्दी कविता', 'मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै', 'दलित चेतना की कहानियाँ : बदलती परिभाषाएँ', 'अपभ्रंश भाषा और साहित्य', 'हिन्दी भाषा विकास के विविध आयाम', 'हिन्दी साहित्येतिहास के कुछेक ज्वलंत प्रश्न', 'यादों के झरोखे' के रचनाकार प्रो. राजमणि शर्मा भाषावैज्ञानिक भी हैं; आलोचक भी हैं; आत्मकथा लेखक भी हैं; समय, समाज एवं व्यक्ति की दशा और दिशा पर विचार करने वाले गंभीर चिन्तक भी हैं। प्रो. राजमणि शर्मा का आलोचना-कर्म (भाषावैज्ञानिक और साहित्यिक परिप्रेक्ष्य) में प्रो. शर्मा की रचनाओं के बहाने; उनकी आलोचना से जुड़ी कृतियों के धरातल से; उनके भाषावैज्ञानिक विश्लेषणों के संसार से गुजरते हुए हम उनके आलोचना-संसार से तो परिचित होते ही हैं साथ ही उनकी आलोचना-दृष्टि से भी रूबरू होते हैं। "यहाँ हम उनके भाषा-बोध को भी देखते हैं, उनके वैयाकरण के स्वरूप के भी दर्शन करते हैं; उनकी साहित्य-चिन्ता के साथ ही साहित्येतिहास के अनेकानेक प्रसंगों से जूझते टकराते एक स्थापना देते भी देखते हैं; कविता एवं कहानी के साथ ही साहित्य की अनेकानेक विधाओं के व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक पक्षों पर विचार करते देखते हैं देख सकते हैं। भाषाविज्ञान पर बात करते हुए वे उसके नवीन से नवीन पक्षों को उद्घाटित करने की कोशिश करते हैं; भाषा पर विचार करते समय सर्जनात्मक दृष्टि और भाषा के आपसी संबंधों पर उन्हें गंभीर चिन्तन करते पाते हैं; साहित्य के रूपों पर विचार करते समय हम उन्हें एक सैद्धांतिक दृष्टि देने वाले काव्यशास्त्रीय आलोचक के रूप में देखते हैं तो कविता की अनूठी परम्परा पर विचार करते समय प्राचीन से लेकर नवीन काव्य-लेखन, काव्य-संवेदना तक की गहरी यात्रा करते और उसमें भाषा के महत्त्व को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए देखते हैं।" कुल मिलाकर प्रो. राजमणि शर्मा की आलोचना-दृष्टि इन रचनाओं में संवाद पर बल देती है तथा हमारे साहित्येतिहास-बोध को नई दृष्टि, नई ऊर्जा, नयी राह देने का कार्य करती है। प्रो. शर्मा के साहित्य-चिन्तन को, उनकी रचनात्मक दृष्टि को, उनकी भाषावैज्ञानिक चेतना को, उनके चिन्तन के विविध पक्षों को समझने-समझाने की एक कोशिश है यह पुस्तक 'प्रो. राजमणि शर्मा का आलोचना-कर्म' । वस्तुतः यह पुस्तक प्रो. राजमणि शर्मा के आलोचना-कर्म को भाषा की दृष्टि से, संवेदना की दृष्टि से, विचार एवं चिन्तन की दृष्टि से देखने की कोशिश करती है। प्रो. शर्मा की आलोचना-दृष्टि भाषा को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं मानती बल्कि अर्थ-निर्माण की सक्रिय संरचना के धरातल पर उसे देखती और विश्लेषित भी करती है। वे विचारों एवं अनुभवों की गहनता को समझते हैं, उसके महत्त्व को समझते हैं इसीलिए भाषा को, शब्द को उसके समानान्तर रखकर, उसके साथ रखकर एक संवाद की स्थिति का निर्माण करते हैं।
लेखक परिचय
डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय जन्म: 20-10-1959 ई. मीरजापुर (उ.प्र.) जिले के अंतर्गत एक गाँव-छटहाँ में। शिक्षा : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से बी.ए. (ऑनर्स-हिन्दी), एम.ए., पीएच.डी. (हिन्दी) कार्य :• जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर में- प्रोफेसर 2003-2006 तक विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग 2015-2019 तक अध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग 40 से अधिक शोध छात्रों का पीएच.डी./एम.फिल. उपाधि हेतु शोध-निर्देशन आकाशवाणी जोधपुर के विविध कार्यक्रमों, अनेक साहित्यिक संगोष्ठियों एवं कवि सम्मेलनों में सहभागिता एवं उनका आयोजन। छायावादोत्तर हिन्दी काव्य: बदलते मानदंड एवं स्वरूप (शोध-प्रबंध), 1990 प्रेमचंद प्रकाशन : की भाषा (आलोचना), 1995 क्योंकि रचना बोलती है (आलोचना), 1997 कविता की राह (आलोचना), 2002 आईने में समय के हम फिर खड़े (काव्य-संग्रह), 2002 कविता का पक्ष (आलोचना), 2008 कहानी का वर्तमान (आलोचना), 2009 बोधिवृक्ष से (काव्य-संग्रह), 2010 विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में साहित्य के विविध विषयों पर 150 से अधिक लेख एवं पुस्तक-समीक्षाएँ प्रकाशित । सदस्यता : सदस्य : हिन्दी सलाहकार समिति, केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, नई दिल्ली (2015 से 2018 तक) हिन्दी परामर्श मंडल एवं जनरल काउंसिल, साहित्य अकादमी, नई दिल्ली (2018-22) कार्यकारिणी, भारतीय हिन्दी परिषद्, इलाहाबाद (1997-2015) कार्यक्रम सलाहकार समिति, आकाशवाणी, जोधपुर केन्द्र (2017-18) सरस्वती सभा, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर (2017-18) सिंडीकेट, एकेडमिक काउंसिल, सीनेट, एवं अकादमिक सलाहकार समिति (SWAYAM PRABHA DTH) EMRC, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर सम्मान : विशिष्ट साहित्यकार सम्मान, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर सहस्राब्दी हिन्दी सेवी सम्मान लक्ष्मीनाराय.
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