लेखक परिचय
2 जून, 1967 को उत्तर प्रदेश के ग्राम लांक, वर्तमान जिला शामली (तत्कालीन मुजफ्फर नगर) में जन्मे एम.आई. राजस्वी ने विद्यालयी जीवन से ही लेखन कार्य आरंभ कर दिया था। इनकी सर्वप्रथम लिखी गई कहानी 'प्रतिशोध की ज्वाला' बाद में 'आग का दरिया' शीर्षक से 'गृहनंदिनी' और 'हरियाणा हैरिटेज' में प्रकाशित हुई। इतिहास में एम.ए. एम.आई. राजस्वी की भारत के स्वर्णिम अतीत, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत में गहन रुचि है। यही कारण है कि इनकी 100 से अधिक लिखी गई पुस्तकों में से लगभग 70 पुस्तकें ऐतिहासिक पौराणिक पृष्ठभूमि, चरित्रों एवं घटनाओं पर आधारित हैं। गंभीर प्रकृति के पत्रकार होने के कारण इनकी पत्रकारिता के साथ ही इनके लेखन एवं संपादन में तथ्यपरक विश्लेषण, गहन विचारशीलता और तर्कसंगत आकलन के दर्शन होते हैं। दिल्ली प्रेस की पत्रिका 'गृहशोभा' के अलावा 'शुभ इंडिया', 'हरियाणा हैरिटेज', 'गृहनंदिनी' और देश के कई प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थानों में राजस्वी ने संपादन एवं लेखन कार्य किया है। इन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2017 के पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पुस्तक परिचय
रावण अपनी सफलता पर अत्यंत प्रसन्न था। अब वह राम की शक्ति और बुद्धि का परीक्षण करना चाहता था-राम कैसे सीता को खोजेंगे? खोज भी लेंगे तो कैसे लंका पहुंचेंगे? वहां भी पहुंच गए तो कैसे महाब्ली रावण के असीमित सैन्य और भुजबल से विजयी होंगे? अब उनके नर अथवा नारायण होने का भेद खुलेगा। सीता का हरण करके रावण पुष्पक विमान में उड़ चला था। सीता को एक बार लंका ले जाने की उसकी प्रतिज्ञा पूरी हो रही थी। उसने बहन शूर्पणखा के अपमान और खर-दूषण की मृत्यु का भी प्रतिशोध ले लिया था।
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