"आत्म-साक्षात्कार का अर्थ है- शरीर, मन और आत्मा में - यह ज्ञान प्राप्त करना कि हम ईश्वर की सर्वव्यापकता के साथ एक हैं; यह जानना कि हमें यह प्रार्थना करने की आवश्यकता नहीं है कि हमें उस सर्वव्यापकता का अनुभव प्राप्त हो, यह जानना कि हम न केवल सदैव उस सर्वव्यापकता के पास हैं, अपितु ईश्वर की सर्वव्यापकता हमारी सर्वव्यापकता है; तथा यह जानना कि हम वर्तमान में ईश्वर के उतने ही अंश हैं जितने कि हम कभी भी होंगे। हमें केवल इतना ही करना है कि हम अपने ज्ञान में वृद्धि करें।"
श्री श्री परमहंस योगानन्द
श्री श्री परमहंस योगानन्द ने अपनी आदर्श-जीवन शिक्षाओं में सभी संस्कृतियों, जातियों, और सम्प्रदायों के लोगों को शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक असामंजस्य से मुक्ति प्राप्त करने के साधन प्रदान किए हैं, ताकि वे अपने लिए स्थायी सुख और सर्वांगीण सफलता का सृजन कर सकें।
इस शृंखला की पुस्तकें अनेक विषयों पर परमहंसजी के आदर्श-जीवन ज्ञान को - स्वयं उनके शब्दों में और उनके निकट शिष्यों के शब्दों में- प्रस्तुत करती हैं तथा पाठकों को आध्यात्मिक अन्तर्दृष्टि और व्यावहारिक कुंजियाँ प्रदान करती हैं जिनके माध्यम से वे अपने दैनिक जीवन में आन्तरिक सन्तुलन और सामंजस्य प्राप्त कर सकते हैं जो कि योग का मूलतत्त्व है। ध्यान और इन पुस्तकों में वर्णित उचित कर्म एवं उचित दृष्टिकोण के सार्वभौमिक सिद्धान्तों के अभ्यास से व्यक्ति प्रत्येक क्षण को ईश्वर की सचेतनता का विकास करने के एक अवसर के रूप में अनुभव कर सकता है।
यद्यपि प्रत्येक पुस्तक एक विशिष्ट विषय को सम्बोधित करती है, तथापि सम्पूर्ण शृंखला में एक सन्देश प्रतिध्वनित होता है : सर्वप्रथम ईश्वर की खोज करें। श्री श्री परमहंस योगानन्द चाहे सफल संबंधों का निर्माण करने, आध्यात्मिक सन्तानों के पालन-पोषण, आत्म-पराजयकारी आदतों पर विजय प्राप्त करने, अथवा आधुनिक जीवन के अनेक अन्य लक्ष्यों और चुनौतियों के विषय में बात कर रहे हों, वे बारम्बार हमारा ध्यान जीवन के उच्चतम लक्ष्य, आत्म-साक्षात्कार - अर्थात् दिव्य आत्माओं के रूप में अपनी यथार्थ प्रकृति के ज्ञान - की ओर आकर्षित करते हैं। उनकी शिक्षाओं की प्रेरणा और प्रोत्साहन के माध्यम से हम सीखते हैं कि किस प्रकार से अपने यथार्थ स्वरूप, अर्थात् आत्मा, की अनन्त शक्ति और आनन्द के प्रति सचेतनता के द्वारा, सीमितताओं, भय और पीड़ा से परे, सही अर्थों में एक विजयी जीवन जीना सम्भव है।
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